अखिलेश को मिला एक और मौका योगी को डाउन करने का

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव योगी को डाउन करने का  कोई मौका  नहीं छोड़ते हैं  अब यूपी में जिस तरह से लगातार खुदाई करके मंदिरों को निकाला जा रहा है, मस्जिदों के वजूद पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं उस पर कटाक्ष करते हुए अखिलेश ने योगी को ही आड़े हाथों ले लिया और उन्होंने दावा किया है कि   मुख्यमंत्री आवास में भी एक शिवलिंग मौजूद है। इसलिए योगी सरकार प्रदेश में जिस तरह से तमाम धार्मिक स्थलों की खुदाई करवा रही है अब उसे जल्दी से जल्दी मुख्यमंत्री आवास की भी खुदाई   करके शिवलिंग को सुरक्षित बाहर निकालन लेना  चाहिए। समाजवादी पार्टी लगातार यूपी में होने वाली खुदाई का विरोध कर रही है और उसके चलते ही अखिलेश ने यह नया पासा फेंककर योगी को ही फंसाने की कोशिश कर डाली, उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि राजभवन में योगी के नाकों तले अवैध रूप से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन  सरकार जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। अखिलेश ने  महाकुंभ की अधूरी तैयारियों, गन्ना भुगतान में देरी,  बिजली की ऊंची कीमतों और युवाओं के लिए रोजगार के अभाव जैसे मुद्दों पर भी योगी सरकार पर जमकर हमला बोला।उन्होंने कहा कि महाकुंभ में हर कोई अपने आप ही आता है  किसी को निमंत्रण देने की जरूरत नहीं होती पर हीं दिया जाता है, लेकिन सरकार सारे काम छोड़कर महाकुंभ का निमंत्रण बांटने में व्यस्त है। अखिलेश ने कहा कि  महाकुंभ की तैयारियां अधूरी हैं। पुलों का निर्माण पूरा नहीं किया जा सका है।

क्या वजह थी सोनिया गांधी  पीवी नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई

आखिर क्या वजह रही होगी की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी  पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के  अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं हाल ही में जिस तरह से कांग्रेस मनमोहन सिंह के स्मारक की जगह को लेकर बयानबाजी कर रही है, इसे भी राजनीती में घसीट रही है, इस पर उनके अपनों ने ही कांग्रेस को करारा जवाब देना शुरू कर दिया है।सबसे पहले तो पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के भाई ने ही कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कह दिया कि दूसरों की बुराई करने से पहले कांग्रेस खुद  20 साल पीछे मुड़कर देखे और जाने की उन्होंने अपने नेता पीवी नरसिम्हा राव को कितना सम्मान दिया था,नरसिंह राव से कांग्रेस इतनी नाराज थी कि उनका शव पार्टी मुख्यालय तक में नहीं लाने दिया गया, उनका दाह संस्कार दिल्ली में नहीं कराया गया और बाद में उनके शव को इतने अपनाम के बाद आंध्रप्रदेश ले जाया गया था। कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के लिए कोई प्रतिमा भी नहीं बनवाई,। पीवी नरसिम्हा राव के पोते एनवी सुभाष ने राहुल पर निशाना साधा और कहा कि  क्या उन्हें राजनीति का यही समय मिला है। उन्हें बोलने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस ने तो प्रणब मुखर्जी को भी सम्मान नहीं दिया।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।