हाल ही में समाजवादी पार्टी के  मीडिया सेल ने यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के डीएनए को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक पोस्ट किया था औऱ इसको लेकर ब्रजेश पाठक ने जमकर अखिलेश यादव को घेर लिया।एक पोस्ट में उन्होंने  सपा के कद्दावर नेता और  माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के साथ  मुजफ्फरनगर दंगा व कारसेवकों पर गोली चलवाने की घटना का  जिक्र किया और  अखिलेश पर  समाजवादी  का इतिहास याद दिलाते हुए तंज कसा की अगर पार्टी  डीएनए से जुड़ी कोई भी जिज्ञासा शेष रह गई हो तो आप निसंकोच उनसे पूछ सकते हैं। आपको बता दें कि ब्रजेश पाठक के डीएनए पर टिप्पणी करने पर अखिलेश जब कुछ ज्यादा घिर गए तो उन्होंने पैतरा बदलते हुए  गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए लिखा — मुंह से निकला रिपीट, मन में था डिलीट’। आपको बता दें कि हाल ही में अखिलेश ने जब  योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने पर कटाक्ष किया तो  अमित शाह ने  जवाब दिया था कि वह भी रिपीट होंगे।बस यही बात पकड़कर अखिलेश योगी को घेरना चाह रहे थे पर ब्रजेश पाठक ने उन्हें यहां भी धो ड़ाला और
लिखा कि मैं तो आपसे आपकी पार्टी के डीएनए के बारे में पूछ रहा हूं। अगर निरुत्तर हो गए हों तो क्षमा मांग लीजिए और बात खत्म करिए। आखिर सपा के डीएनए वाले सवाल से इतने डरे-सहमे क्यों हैं आप?’

नीतिश का आसान हिलाने की लड़ाई में शामिल  उनके ही दो नेता

इस बार बिहार चुनाव में नीतिश कुमार के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी, सबसे बड़ा कारण है प्रशांत किशोर का राजनीति और चुनाव प्रचार में बहुत ज्यादा एक्टिव होना और जिन प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार ने  घर में पनाह देकर  नेतागिरी के सारे गुण सिखाए वही अब  JDU तोड़ने के लिए जबदस्त कोशिशे कर रहे हैं और इसमें उन्हें सफलता भी मिल रही है क्योंकि इतने साल नीतिश कुमार के साथ रहकर इन्होंने नीतीश की राजनीती के सारे दांव पेच सीखे और अब वही तरीके वो नीतिश पर बाखूबी अजमा रहे हैं, हाल ही में उन्होंने jdu के नेताओं को खुलेआम अपने साथ आने का ऑफर और कहा कि नीतीश कुमार अब ना दल बना सकते हैं और ना चला सकते हैं।  इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज  का हाथ थाम jdu को बड़ा झटका दिया, वहीं प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद उदय सिंह को अपनी पार्टी में पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बिहार में बीजेपी और jdu दोनों को ही झटका दे डाला। चर्चा यही चल रही हैं कि   नीतिश के दो वफादार नेताओं को पीके यानी प्रशांत किशोर ने उनसे छीन लिया और अभी तो ये शुरूआत है, आपको बता दें कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के लिए चुनाव को पूरा काम किया और  जीत मिलने के बाद प्रशांत ने ना केवल जेडीयू ज्वाइन की बल्कि नीतिश से उनकी दोस्ती इतनी बढ़ गई कि वो  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास में ही लंबे समय तक रहे।

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