अल-फलाह यूनिवर्सिटी —– छात्र क्यों नहीं  पहचान पाए बीच में छुपे आतंकवादियों को

आजकल स्कूलों में बच्चों को  good touch, bad touch के बारे में पढ़ाया जाता है, बच्चों को यह भी बताया जाता है कि खराब , गलत लोगों कैसे होते हैं, कैसे अपने जाल में फंसाते हैं उन्हें कैसे पहचानना चाहिए ,    लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ज्यादातर बच्चों का मासूम दिमाग यही सोचता है कि खराब आदमी की शक्ल राक्षस जैसी होगी, उसके बाल बढ़े होंगे, वह गालियां देता होगा, मारता होगा ,   पर असलियत में ऐसा नहीं होता ये बाते आजकल स्कूलों में बच्चों को विशेष तौर पर समझाई जाती हैं, कि  खराब आदमी की शक्ल भी अच्छी होती है ,वो  प्यार भी करता है विश्वास हासिल करने के लिए  गिफ्ट भी देता है,  , कभी कभी चाकलेट भी थमा देता है  और जब फिर धोखा देता है, नुकसान पहुंचाता है, यह बात इसलिए कर रहे हैं कि लाल किले में ब्लास्ट करने वाले उमर उन नबी ने  अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच अपनी ऐसी ही ईमेज बनाई हुई थी, वह  मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर था और वहां के छात्रों के बीच  अपने  शांत स्वाभाव के लिए जाना जाता था, बहुत से छात्र उसकी   बुद्धिमानी के कायल थे कोई सपने में भी नहीं सोचता था कि उमर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है और एक झटके में इतने लोगों की जान भी ले सकता है. यही बात इस कांड में शामिल  डॉ. मुजम्मिल के बारे में भी पता चली वह  पढ़ाते थे और छात्रों के बीच अपने सहज और मदद करने के कारण बहुत  लोकप्रिय थे। यही कारण है कि किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा कि ये दोनों डाक्टर आतंकी साजिश में शामिल हो सकते हैं।  लाल किले की दर्दनाक घटना यह बात एक बार फिर साबित करती है कि आजकल बुरे लोग आपके बीच में बैठे आपके विश्वास से खेल रहे हैं, देश को धोखा दे रहे हैं।

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