इस नेता की मौत का जिम्मेदार कौन, जबरदस्त राजनीती
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रॉय की डेथ पर राजनीती शुरू हो गई है, मुकुल राय पूर्व रेल मंत्री भी थे और 2021 में भाजपा से चुनाव जीतने के बाद वो तृणमूल में वापस आ गए थे। लेकिन उसके पहले 2000 17 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी। उसके पहले 1999 से वो तृणमूल कांग्रेस में थे। लेकिन उनकी डेथ पर तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं फिराहाद हाकिम। हालांकि फिराद हाकिम बहुत विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन उन्होंने यह आरोप लगाया है कि मुकुल रॉय पर लगातार इस बात का दबाव था कि उनको वापस भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए और इस दबाव को वो नहीं झेल पाए और यही उनकी डेथ का कारण बना। अब इस तरह के वियर्ड से इस तरह की चीजें बहुत सारी हो रही हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व सारे नेता ममता बनर्जी से लेकर के अभिषेक बनर्जी और सारे नेता अभी जब हुमायूं कबीर छोड़ के गए थे। हुमायूं कबीर ने जिस तरह की बात की तो यह कहा जा रहा था कि वो बीजेपी के इन्फ्लुएंस में आकर के ऐसा कर रहे हैं। इस तरह की चीजें इस तरह के आरोप इस तरह की बातें हो रही हैं। लेकिन एक बार फिर ये मुकुल रॉय जो संगठन के लिए बहुत सक्रिय और मजबूती से काम करते थे और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। उनके डेथ के बाद जिस तरह से आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है और दिलीप जो बीजेपी के नेता हैं। उन्होंने इसको सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस की जिम्मेदारी बताया कि किस तरह से तृणमूल कांग्रेस जो है दिलीप घोष ने कहा है कि इतना ज्यादा मुकुल रॉय पर दबाव था तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कि वो उनके लिए मुश्किल वाली स्थिति पैदा हुई। तो यह जो पूरा का पूरा मामला है यह चुनाव के दृष्टि से इसको देखा जा रहा है और अब जैसेजैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं इस तरह की बयानबाजी बढ़ेंगी घटेंग नहीं।
Rahul Gandhi को हटाया जाए विपक्ष के पद से

ना केवल कांग्रेस के अंदर से बल्कि बाहर से भी अब राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर के या उनकी नेतृत्व में जो निर्णय हो रहे हैं जोबातें हो रही हैं उसको लेकर के विरोध शुरू हो गया है या असहमति शुरू हो गई है। अब आईएडीआईए के नेता को लेकर के कार्तिक चिदंबरम ने कहा कि वो रोटेशन से होना चाहिए। उसके बाद मणिशंकर अय्यर ने बोला कि उनको नेता प्रतिपक्ष के पद से हट जाना चाहिए। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस लगातार यह कह रही है कि वो है शिवसेना कह रही है। समाजवादी पार्टी कह रही है और उसके बाद जो बची खुची कसर थी जो अभी एआई समिट के दौरान जिस तरह से टॉपलेस्ट प्रोटेस्ट किया था कांग्रेस के नेताओं ने उसके बाद और कहा जा रहा है कि जो कांग्रेस के लोगों का कांग्रेस के नेताओं का उनके कार्यकर्ताओं का नेता से लेकर के कार्यकर्ताओं तक जो एक इमेज बनती जा रही है कि वो उनका दृष्टिकोण एंटी इंडिया है और सारे ऐसे काम करते हैं जो भारत की छवि को नुकसान पहुंचाता है तो उसमें कांग्रेस को अपने नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है।कांग्रेस के नेतृत्व पर प्रश्न कर रही है। इसलिए कि कार्यकर्ता का स्वतंत्र निर्णय नहीं हो सकता है। और जिस तरह से एआई प्रोटेस्ट के एआई सबमिट के दौरान प्रोटेस्ट हुआ था उसमें बाकायदा पहले से योजनाबद्ध तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया गया। रजिस्ट्रेशन करा करके वहां जा पहुंचे करके और सारा का सारा विघ्न डालने की कोशिश की। हालांकि जिस तरह का रिएक्शन वहां के जो पार्टिसिपेंट्स थे उनका था वो भी अपने आप में कांग्रेस के लिए उससे कुछ मैसेज ले सीखने की लेने की जरूरत है।
Karnatka में एक बार फिर कांग्रेस संकट में

कर्नाटक में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद उप मुख्यमंत्री के लिए इस बात की रस्साकसी हो रही है कि दो साल ढाई साल पूरे होने के बाद सीधा रमैया को जो अभी के मुख्यमंत्री हैं उनको अपना पद छोड़ देना चाहिए और वह डीके शिवकुमार को दे देना चाहिए। उप मुख्यमंत्री जो हैं लेकिन इस पर कोई बात आगे नहीं बढ़ी है। डी के शिव कुमार का लगातार दबाव है लेकिन सीधा रमैया का दबाव भी उनसे ज्यादा मजबूत दिख रहा है। इसलिए कि कोई परिवर्तन नहीं कर पाए और इसमें कांग्रेस की मजबूरी यह हो सकती है कि सीधा रमैया जो है जिस कास्ट से आते हैं अगर उनको पद से हटाया गया तो कांग्रेस के लिए वहां मुश्किलें बढ़ जाएंगी। लेकिन इन सबके बीच कुछ इस तरह की बात हो रही है कि कांग्रेस का मंत्रिमंडल जो है वो मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। कांग्रेस के 31 31 जो विधायक हैं उन्होंने एक पत्र लिखा है राष्ट्रीय अध्यक्ष को और ये 31 के 31 जो है विधायक फर्स्ट टाइम के विधायक हैं। पहली बार चुनाव जीत करके आए हैं और इन्होंने सीता रमैया कैबिनेट में अपनी उनको शामिल किए जाने की बात कही है। अब ये एक नया मोड़ है जब मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री लॉगर हेड्स पर हैं। 31 पहली बार के विधायक इस बात का दबाव बना रहे हैं कि उनको मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। महाराष्ट्र में लगातार इस तरह की विरोध वाली स्थिति है और जो आगे आने वाले चुनाव में उनके लिए मुश्किल वाली बात हो सकती है। इसलिए कि लगातार डी के शिवकुमार जो केंद्रीय नेतृत्व है उसके साथ बातचीत कर रहे हैं। उन पर दबाव बना रहे हैं कि अब उनको मुख्यमंत्री पद दिया जाए। हालांकि लगभग 3 साल होने को है और चुनाव में 2 साल का वक्त है और डीके शिवकुमार की कोई भी नाराजगी कांग्रेस के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है।
RSS प्रमुख जोर देकर कर रहे ये बातें

मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक मोहन भागवत जो हैं वो इधर काफी दिनों से इस तरह की बातें कर रहे कर रहे हैं जो हिंदू ग्रुपों को तो अच्छा लग रहा है लेकिन वो मुस्लिम ग्रुप्स में थोड़ी नाराजगी पैदा कर रहा है लेकिन वो इस तरह की बातें कर रहे हैं। अब उन्होंने अभी हाल फिलहाल यह बात कही थी कि जो लोग स्वेच्छा से घर वापसी करना चाहे उनको घर वापसी कराया जाना चाहिए और इसमें जो प्रयास हो रहे हैं उन प्रयासों को थोड़ा सा आगे बढ़ाने की या थोड़ा सा उसको और जो मजबूत करने की या उस पर थोड़ा जोर देने की जरूरत है या उसके प्रयास को थोड़ा सा इंटेंसिफाई करने की जरूरत है। इसको लेकर के बहुत सारे लोगों ने बात कही वो बात दो दिन पुरानी है। लेकिन अभी जो बात है वो है कि सर संचालक ने कहा है कि अगर यूनिफार्म सिविल कोड भारत में लागू होता है तो यह एक अच्छी बात होगी। भारतीय जनता पार्टी के मेनिफेस्टो में यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट की बात कही थी और इसको लेकर के भारतीय जनता पार्टी लगातार कोशिशें भी कर रही थी और कहा यह जा रहा था कि अगर इस बार का चुनाव मतलब 2024 का लोकसभा चुनाव भाजपा मजबूती के साथ जीत कर आती तो वो इसको लागू करती लेकिन उनका संख्या कम हो गई उसका विकल्प है जिसको भाजपा जिस पर काम कर रही है वो धीरे-धीरे उन प्रदेशों में जहां उनकी सत्ता है वहां पर इसको लागू कर रही है और उसमें उत्तराखंड सबसे पहला राज्य था। गोवा में पहले से ही यह कानून था और उत्तराखंड के बाद गुजरात में भी इसको लागू किया जा रहा है। तो इस तरह से और उसके बाद धीरे-धीरे बहुत सारे और प्रदेश है जहां इनको एक के बाद एक लागू किए जाने की बात है। तो अगर केंद्र स्तर पर इस तरह की कोई बात बनती है और कोई मंशा बनती है तो उसका उसकी बात मोहन भागवत जी कह रहे हैं। और मतलब उनकी बातों से स्पष्ट है कि जिस तरह से उत्तराखंड में इसको लागू किया गया है उसी क्या उसी मॉडल पर पूरे देश में इसको लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड जो है वो अह जनवरी 27 को मतलब लगभग एक साल हो गए जहां पर यूनिफार्म सिविल कोड लागू हुए। जनवरी 27 2025 में इसको लागू किया गया था। अब यह एक साल से ज्यादा का समय हो गया। तो मोहन भागवत के इस बयान पर निश्चित तौर पर लोगों का रिएक्शन भी होगा। लेकिन आजकल मोहन भागवत जो है इस तरह के विषयों को लेकर के बहुत दृढ़ता के साथ बोलते हुए नजर आ रहे हैं।
