UP —इस बीजेपी नेता ने कैसे धो डाला अखिलेश यादव को

यूपी में बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने अखिलेश के अयोध्या बस को लेकर किए गए तंज पर ऐसा जवाब दिया कि लग यही रहा है कि अखिलेश अब कभी भी जब अयोध्या को लेकर बीजेपी से कोई प्रश्न पूछेंगे तो दस बार जरूर सोचेंगे, जी हां आपको बता दें कि जब पत्रकारों ने केतकी सिंह से पूछा कि अखिलेश पूछ रहे हैं कि केंद्र सरकार , यूपी सरकार जनकपुर से एक बस अयोध्या चलाने वाली थी तो अब वो बस कहां चली गई ।  इस पर केतकी ने बोला कि पहले अखिलेश बताएं कि जब उन्होंने सरकारी आवास छोड़ा था तो नलों की टूटियां कहां गई, अभी तक वो मिली नहीं हैं , जाहिर था बीजेपी नेता ने अखिलेश को नलों की टूटियां गांयब करने का आरोप लगाकर पूरी तरह धो डाला। यही नहीं केतकी सिंह ने यह भी कह दिया कि जो नेता राम लल्ला के उद्धघाटन पर उसके दर्शन करने अयोध्या नहीं पहुंचे उनको अयोध्या के बारे में कोई प्रशन करने का अधिकार नहीं है।

बंद कमरे में योगी ने खामोश करवा दिए बगावती सुर

यूपी में योगी का इतना दबदबा इतना जोर है कि विपक्ष तो उनपर सीधा हमला करने से कतराता ही है साथ ही उनके पार्टी के नेताओं की भी योगी के सामने हवा निकलती है और यही नहीं यूपी में बीजेपी के सहयोगी दल चाहे पीठ पीछे सरकार के बारे में योगी के बारे में कुछ भी कटाक्ष कर लें पर योगी के सामने आते ही उनकी बोलती बंद हो जाती है, जी हां अब यही हुआ पिछले कुछ समय से निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद लगातार बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने की धमकी दे रहे थे इसको लेकर राजनीती गलियारों में काफी चर्चाएं भी हो रही थी , यहां तक कि संजय निषाद ने बीजेपी को दो टूक यह तक दिया था कि हमसे कोई फायदा नहीं है तो गठबंधन तोड़ दें, हम इसके लिए पूरी तरह से तैयार बैठे हैं।पर अचानक ही संजय निषाद के सुर बदल गए और उन्होंने अपने बगावती सुर से अलग हटकर बोलना शुरू कर दिया कि यूपी के सीएम योगी जी तो हमारे अभिभावक और मार्गदर्शक भी हैं , हमें बीजेपी से कोई नाराजगी कैसे हो सकती है, पता चला कि इस बदले सुर का कारण खुद सीएम योगी ही हां, जी हां संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हाल ही में मुलाकात की और बंद कमरे में क्या बात हुई की बाहर आते ही संजय निषाद एक आज्ञाकारी नेता की तरह बीजेपी की तारीफ करने लगे । संजय निषाद का कहना है कि उन्होंने योगी जी को अवगत कराया है कि उनकी ही जाति के कुछ बीजेपी नेता लगातार बीजेपी में छेद कर रहे हैं। उनसे हम नाराज हैं। योगी जी ने उन्हें आशवस्त कर दिया कि जिसके साथ हम हैं, बीजेपी भी उसके साथ है। खैर संजय निषाद कुछ भी सफाई दें चर्चाएं यहीं हैं कि बंद कमरे में योगी के तेवर ने उनके गुस्से को अच्छी तरह शांत कर दिया होगा।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।