ओम बिरला को हटाने की मुहिम – कांग्रेस की हताशा साफ नजर आ रही

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है पर स्पीकर को हटाना कोई मामूली या आसान काम नहीं है, जिस तरह से कांग्रेस और तमाम विपक्ष मिलकर ओमबिरला के पीछे पड़कर उन्हें हटाने के लिए तमाम चर्चा कर रहा है उससे आम जनता के बीच यही मैसेज पहुंच रहा है कि विपक्ष बड़ी आसानी से स्पीकर को पद से हटा सकता है, पर आपको बता दें कि यह इतना आसान नहीं है, सबसे पहले तो लोकसभा में सरकार बहुमत में है तो अपने आप ही यह प्रस्ताव पास नहीं होने वाला है, पर इसके अलावा भी एक पूरी प्रक्रिया के तहत यह किया जाता है जो आसान कतई नहीं है, जी हां सबसे पहले सदन के 50 सदस्यों को नोटिस के समर्थन में खड़ा होना होगा और अगर ऐसा नहीं होता तो स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश ही नहीं किया जा सकता।पता चला है कि कांग्रेस के तीन सदस्य मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि सदन से इसकी अनुमति मांगेगे और जब इसको 50 सदस्यों का समर्थन मिल जाएगा तो इसपर चर्चा और मतदान होगा। अभी तक इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, पर स्पीकर को उऩके पद से हटाने के लिए 272 वोटों की जरूरत होगी जो विपक्ष के पास दूर दूर तक नहीं दिखते हैं। आपको बता दें कि वर्तमान लोकसभा में सरकार के पास 293 सांसद हैं जबकि विपक्ष के पास कुल मिलाकर 238 सांसद ही हैं, ऐसे में साफ लग रहा है कि स्पीकर को पद से हटाने का मामला केवल और केवल लोकसभा का कीमती समय बरबाद करने का ही है , कांग्रेस और दूसरी विपक्ष के दलों को साफ पता है कि स्पीकर पद से नहीं हटाए जा सकते हैं पर कहते हैं ना जब किसी बात के लिए अहम सामने आ जाता है तो सामने खड़ी हार भी दिखाई नहीं देती, आज विपक्ष के साथ भी वही हो रहा है।
Congress को मिला एक और झटका

मध्य प्रदेश में बीजेपी की बंपर जीत के बाद वैसे ही कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लग चुका है और अब रही सही कसर हाईकोर्ट कोर्ट के एक फैसले ने कर दी और कांग्रेस को मिल गया एक और झटका, दरअसल मामला विजयपुर विधानसभा सीट का है, जहां से कांग्रेस विधाक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द हो गया है और अब वहां बीजेपी के रामनिवास रावत विधायक बन जाएंगे, आपको बता दें कि विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए था और कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा जीत गए थे , पर उसके बाद पता चला कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने ऊपर चल रहे केस की जानकारी नहीं दी है बस बीजेपी को मौका मिला और उसके खिलाफ बीजेपी नेता रामनिवास रावत कोर्ट चले गए और मुकेश के खिलाफ चल रहे छह केस की जानकारी कोर्ट को दे दी, बस उसके बाद कोर्ट ने सारे तथयों को देखने के बाद उपचुनाव रिजल्ट को शून्य कर दिया।आपको बता दें कि पहले उम्मीदवार का चुनाव शून्य होने पर दूसरे नंबर वाले को विधायक मान लिया जाता है, बस तभी बीजेपी की लाटरी निकल गई क्योंकि रामनिवास रावत दूसरे नंबर पर थे। वैसे आपको बता दें कि साल 2023 में रामनिवास रावत कांग्रेस में थे और जीत हासिल की थी पर लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था , पर उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
