कभी बाहरी थे अब अचानक पार्टियों को क्यों याद आ रहे हैं UP-Bihar के लोग ?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लगता है सभी दल यहां बसे  यूपी-बिहार के लोगों को रूझाने का हर संभव प्रयत्न कर रहे हैं और में सबसे पहला नंबर बीजेपी का है  क्योंकि भाजपा पर लगातार आरोप लगते आए हैं कि  वह उत्तर भारतीयों के वोट तो लेती है, पर  उन्हें  लड़ने के लिए टिकट नहीं देती , लेकिन इस बार उत्तर भारतीयों को टिकट देने में भाजपा ने कांग्रेस की बराबरी  कर उसे कड़ी टक्कर दी है दोनों ही नेशनल पार्टियों ने  चार-चार उत्तर भारतीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।  वैसे कभी एक समय में कईं  पार्टियां यूपी-बिहार के लोगों को महाराष्ट्र से  हर का मानती थी पर आज उन्हें सिर माथे पर बिठाया हुआ है। वो हैं ना कि राजनीती में कोई भी काम बिना किसी फायदे के लिए नहीं किया तो  आपको बता दें कि  मुंबई और मुंबई उपनगर में ही 35 लाख से अधिक उत्तर भारतीय लोग रहते हैं। इसके अलावा उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से लाखों लोग  पूरे महाराष्ट्र में बसे हुए हैं और  इन वोटर्स को ही अपने पक्ष में करने के लिए सभी दलों ने अपने-अपने कोटे से काफी बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय उम्मीदवारों को टिकट  दिए हैं।वैसे भी महाराष्ट्र की राजनीति पर काफी समय से उत्तर भारतीयों ने अपना प्रभाव छोड़ा हुआ है।   डॉ. राम मनोहर त्रिपाठी, चंद्रकांत त्रिपाठी, कृपाशंकर सिंह,मोहम्मद आरिफ नसीम खान, नवाब मलिक, विद्या ठाकुर जैसे उत्तर भारत मूल के नेता महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। साल 2009 के विधानसभा चुनाव में तो मुंबई महानगर की लगभग 25 प्रतिशत  सीटों पर उत्तर भारतीय विधायक ही चुने गए थे।

अजीत पवार मुस्लिम VOTERS  को लुभाने की पूरी कोशिश पर हो सकता खेला 

बीजेपी गठबंधन महायुति की ओर से मुंबई में  तीन मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर चुनावी   मुकाबला बहुत कड़ा कर दिया है , वैसे मुस्लिम वोटर्स को लुभाने के लिए इन तीनों उम्मीदवारों पर  अजीत पवार की  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  ने भरोसा जता कर उन्हें अपने  कोटे से टिकट दिया है , पर अजीत पवार के साथ खेला हो सकता है क्योंकि  उद्धव के साथ राज ठाकरे और अखिलेश यादव ने भी इनके खिलाफ कद्दावर नेताओं को खड़ा कर दिया है। अजीत पवार ने मुंबई की मानखुर्द-शिवाजीनगर सीट से अपने  नेता और  पूर्व मंत्री नवाब मलिक को टिकट दिया है,  जहां  से तीन बार से समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आजमी जीत रहे हैं।इसलिए यहां कांटे की टक्कर है।  नवाब मलिक की बेटी सना मलिक को भी अजीत पवार मैदान में लाए हैं और उन्हें अणुशक्ति नगर सीट से टिकट मिला है पर उनके खिलाफ फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर के पति फहद अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। सिर्फ 23 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले अणुशक्ति नगर क्षेत्र में शिवसेना के वोट भी अच्छे-खासे हैं। 2014 में यहां से शिवसेना का ही विधायक चुना गया था। इस बार शिवसेना में विभाजन के कारण वह वोट किसके साथ जाएगा, अनुमान लगाना मुश्किल है। अजीत पवार  के तीसरे  मुस्लिम उम्मीदवार जीशान सिद्दीकी है, जिनके पिता बाबा सिद्दीकी की कुछ ही दिनों पहले गोली मारकर  हत्या कर दी गई थी , उनकी  सीट शिवसेना का गढ़ मानी जाती है। क्योंकि इसी क्षेत्र में  उद्धव ठाकरे का घर है। माना जा रहा है कि  मतदाताओं की सहानुभूति जीशान को मिल सकती है  पर  उनके खिलाफ  एक तरफ उद्वव ठाकरे परिवार के युवा उम्मीदवार  वरुण सरदेसाई हैं और दूसरी तरफ राज ठाकरे ने अपनी पार्टी से तृप्ति सावंत को उतार दिया है तो यहां  त्रिकोणीय मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है।

RSS कमर कस ली है जीताने के लिए

लगता है महाराष्ट्र और झारखंड में  BJP को जीत दिलाने के लिए   RSS के नेताओं,  स्वयंसेवकों ने कमर कस ली है। बीजेपी के लिए यह बात काफी उत्साहवर्धक भी है क्योंकि हाल फिलहाल में हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली जीत के पीछे सबसे ज्यादा RSS की कड़ी मेहनत बताई जा रही है।  वैसे  महाराष्ट्र और झारखंड दोनों ही राज्यों में RSS के कईं संगठन काफी सक्रिय हैं और इलाकों में काफी पकड़ है।  झारखंड में RSS का संगठन वनवासी कल्याण  आश्रम आदिवासियों के बीच काफी सालों से काम कर रहा है  वहीं यहां पर  RSS विचारधारा से जुड़े अनेकों  संगठन जैसे   किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद , मजदूर संघ, विद्या भारती, सेवा भारती, स्वदेशी जागरण मंच जैसे लगभग  50  संगठन हैं जो BJP को जीताने के लिए काम कर रहे हैं। झारखंड में स्वयंसेवक पीएम मोदी के नारे- एक हैं तो सेफ हैं, के बारे में बात कर रहे हैं, साथ ही voters,  100 फीसदी मतदान करने बाहर निकलें इसके लिए बाकायदा रणनीति बनाई गई है। महाराष्ट्र में भी RSS के अलग-अलग संगठनों के स्वयंसेवक घर-घर जाकर पर्चा बांट रहे हैं। इस पर्चे के जरिए वे कह रहे हैं कि भूमि जिहाद, धर्मांतरण, दंगा, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न रोकने वाली सरकार चुनें। यहां  ‌BJP के पक्ष में मतदान करने की अपील सीधे नहीं हो रही पर BJP  जिन मुद्दों को उठा रही है, उस आधार पर अपने RSS , Voters से मतदान करने की अपील कर रही है।

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पाकिस्तान से आती थी सैलरी-Congress का ये सांसद फंस सकता है जिस तरह से बीजेपी कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद गौरव गोगोई के पाकिस्तान से कथित संबंधों को लेकर सबूतों के साथ सामने आ रही है इससे यह मामला काफी गंभीर बनता जा रहा है, अब चूंकि ये मामला राजनीती से उठकर अब ये मामला देश की सुऱक्षा से जुड़ रहा है तो इसके लिए कांग्रेस की परेशानी जाहिर है और इसके जवाब में कांग्रेस के कईं नेता ऐसे तर्क पेश कर रही हैं जिनकी वास्तविकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूरा मामला समझते हैं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुलकर लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि सांसद गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ गोगोई को एक पाकिस्तानी फर्म ने नौकरी दी थी और फिर उन्हें भारत ट्रांसफर कर दिया था और इस दौरान उनकी सैलरी पाकिस्तान के एक नागरिक अली तौकीर शेख दिया करते थे, रविवार को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी सरमा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है , उन्होंने बताया कि असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच में कईं गंभीर सवाल खड़े किए हैं, सरमा ने कहा कि ib यानी इंटलीजेंस की गोपनीय जानकारी इसी तरह पाकिस्तान भेजी गई, उन्होंने यह भी बताया कि शेख 2010 से 2013 के बीच 13 बार भारत आया और भारत विरोधी नैरिटिव तैयार किया । ————–गौरव गौगई की पत्नी आरोपों के घेरे में यही नहीं रविवार को ही बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने भी गौरव गोगई को घेरते हुए सोशल मीडिया पर एक सवाल करके कांग्रेस को और परेशानी में डाल दिया, प्रदीप भंडारी ने पूछा है कि क्या यह सच नहीं है कि गौरव गोगोई ने 2014 में कालीबोर से सांसद चुने जाने के तुरंत बाद 14 मार्च 2015 को युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तान उच्चायोग का दौरा किया था, बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने यह सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गौरव गोगोई बताएंगे कि उनकी पाकिस्तान यात्रा को वहां के गृह मंत्रालय ने सुविधाएं दी थीं, ————गोपनीय ढंग से पाकिस्तान किया दौरा अब मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है तो बीजेपी के कई नेता गौरव गौगई से सवाल पूछ रहे हैं, कि क्या वो बता सकते हैं कि उनकी पतनी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पाकिस्तान योजना आयोग के सलाहकार अली तौकीर शेख के साथ काम कर रही थी। बीजेपी यह भी आरोप लगा रही है कि अली तौकीर शेख पर्यावरणविद नहीं था, बल्कि सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान के क्षेत्रीय विवादों से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की तरफ से काम कर रहे थे। असम के मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी दावा किया है कि शेख नियमित रूप से सोशल मीडिया पर एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई को टैग करता था, लेकिन जांच शुरू होने के बाद उसने अपने पोस्ट डिलीट कर दिए और अपना अकाउंट बंद कर दिया। आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी आरोप लगाया है कि गौरव गोगई ने 2013 में पाकिस्तान का बहुत ही गोपनीय दौरा किया था। गौरव गौगई का आरोप जमीन घोटाला छुपाने के लिए पूरा कांड वैसे इस जांच और आरोपों के सामने आने के बाद गौरव गौगई कुछ बताने की बजाय बेतुके जवाब दे रहे हैं कि अगर मेरी पत्नी पाकिस्तान की ISI एजेंट है, तो मैं भारत का R&AW एजेंट हूं, गौरव यह भी कह रहे हैं कि असम के मुख्यमंत्री ये आरोप अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, आपको बता दें हाल ही गौरव गौगई ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने 12000 बीघा जमीन पर कबजा कर रखा है और जब ये बातें हम सामने ला रहे हैं तो हमें ही देशदोही साबित किया जा रहा है। पर जो भी हो जिस तरह से जांच कमिटी की रिपोर्ट गौरव गौगई और उनकी पत्नी के पाकिस्तीनी लिंक साबित कर चुकी है उससे आने वाले समय में देश के साथ आसाम में ये मुद्दा कांग्रेस के लिए भारी पड़ने वाला है।