कितना टिक पाएगी आम आदमी पार्टी योगी के सामने
आम आदमी पार्टी पंजाब – दिल्ली हरियाणा और गोवा के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी अपनी जोर आजमाइश करने की कोशिश में है। और इसी जोर आजमाइश के तहत आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह राज्यसभा सदस्य , उत्तर प्रदेश में एक यात्रा निकालने जा रहे हैं। रोजगार दो सामाजिक न्याय दो। यह इस तरह की बात आम आदमी पार्टी काफी समय से करती रही है। लेकिन यह जो यात्रा है यह 2027 के विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर चुनावी कवायद के रूप में देखा जा सकता है जिसको आम आदमी पार्टी चाह रही है कि इस तरह का एक मूवमेंट या इस तरह की कोई रणनीति तैयार की जाए जिससे कि यूपी में थोड़ा बेस बनाया जा सके। 12 नवंबर से शुरू हो रही है यह यात्रा और अयोध्या से शुरू हो के प्रयागराज में खत्म हो जाएगी। अब इसमें इसके पीछे अयोध्या से शुरू हो के और प्रयागराज में खत्म होने के को रोजगार से जोड़ के क्या करने की मंशा है यह तो आम आदमी पार्टी ही डिफाइन कर पाएगी। लेकिन संजय सिंह जो हैं यह आम आदमी पार्टी के स्ट्रेटजी कई कई बार बड़े वियर्ड से दिखते हैं। लेकिन उनकी स्ट्रेटजी के पीछे कोई ना कोई इस तरह की मंशा होती है जो लोगों को चौंकाने वाली होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश में जहां इस तरह की परिस्थिति है जब योगी आदित्यनाथ बहुत मजबूती के साथ वहां के राजनीतिक परिदृश्य में खड़े हैं और कोई इस तरह का अल्टरनेट ग्रुप जो है वह आम आदमी पार्टी के साथ खड़ा होता हुआ नहीं दिख रहा है। दिल्ली और पंजाब की परिस्थितियां दूसरी थी। फिर भी यह अपने आप में एक नई शुरुआत करने की तैयारी है आम आदमी पार्टी की और इसको देखते हैं कि यह कहां किस दिशा में जाती है।
RSS -BJP के बीच अब दिखेंगे बेहतर तालमेल आया Super नेता

भारतीय जनता पार्टी के साथ RSS के कोऑर्डिनेशन की जो जिम्मेदारी होती है, वो काम अब अरुण कुमार की जगह अतुल निमय को जिम्मेदारी दी गई है। अतुल्यमय जिनको महाराष्ट्र के चुनाव की धमाकेदार जीत थी उसका क्रेडिट दिया जाता है और वो बहुत ग्रास रूट पर काम करने वाले स्ट्रेटजिस्ट हैं। अभी कोऑर्डिनेशन को लेकर के बहुत सारी दुश्वारियां आ रही थी भारतीय जनता पार्टी और संघ के बीच में। अरुण कुमार के पास वो जिम्मा था। अरुण कुमार के बारे में कहा जाता है कि वो पंजाब और जम्मू कश्मीर तक सीमित है। उनकी जो अंडरस्टैंडिंग है। तो अब एक ऐसे व्यक्ति को ले आया गया है। ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जा रही है जो जिसका जिसका पॉलिटिकल वाइडर पॉलिटिकल स्पेक्ट्रम पर समझ हो ,पकड़ हो । वो लंबे समय से बीजेपी के साथ कोऑर्डिनेशन में काम करते रहे। हालांकि पूरी तौर पर कोऑर्डिनेशन का जिम्मा उनके पास नहीं था। अब वह चुनाव से लेकर के जो भी बीजेपी और संघ के बीच में बातचीत होगी या जो भी निर्णय होंगे वो देखेंगे। अब जो संघ का व्यक्ति जो तालमेल करता है वो जो जनरल सेक्रेटरी ऑर्गेनाइजेशनंस होता है उसके साथ तालमेल करता है। बैठकों में जाता है। अपनी सलाह देता है। अपना मशवरा देता है। चुनाव प्रबंधन में कई-कई बार जिम्मेदारी होती है। ये सारा काम अब अतुल लिमया जी
