By Ruby Kumari

 

किसानों के लिए क्यों जरूरी उल्लूओं का जिंदा रहना

सोचिए जरा अगर उल्लू ना हों तो हमारे खेत, फसले, हमारे अनाज चूहों, छछंदरों और कईं तरह के जहरीले, हानिकारक कीड़े मकोड़ों का शिकार बन जाएं और यही कारण हैं उल्लू को प्रकृति का सफाईकर्मी भी कह जाता है क्योंकि यह चूहे, छछूंदर, सांप और रात को उड़ने वाले कीट पतंगे खाता है और यही वजह है किसानों के लिए उल्लू बहुत ही फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उल्लू ही उनकी फसलों को इन सभी जानवरों से बचाता है । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक उल्लू एक साल में एक हजार के आसपास चूहे खा जाता है और शायद यही वजह है कि कि कईं देशों में अपनी फसलों को बचाने के लिए तो किसान बाकायदा उल्लू पालते हैं, इनमें मलेशिया का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। यहां पर फसलों पर कीटनाशक डालने की बजाय उसको बचाने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। उनमें उल्लू पालना एक बड़ा तरीका है, मलयेशिया के पाम उत्पादकों किसानों ने उल्लू को पालना शुरू किया है। उन्हें पाम पेड़ों का रक्षक मानकर उनके पास ही उल्लू के रहने के लिए हजारों लकड़ी के घर बनाए गए हैं।

उल्लू फसलों का नाश करने वाले जानवरों का शिकार करते

उल्लू फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले छोटे जानवरों की जनसंख्या रोकने में भी मदद करता है, माना जाता है कि यदि उल्लू ना हों तो हर जगह बस चूहों का ही वास हो जाएगा, यही नहीं इन जानवरों को मारकर उल्लू कईं ऐसी बीमारियों की रोकथाम में मदद करता है जिसकों फैलाने में इन छोटे जानवरों का विशेष हाथ होता है। उल्लू की कुछ खास बातें इसे कुछ अलग ही बनाती हैं जैसे कि इंसानों के मुकाबले उल्लू 10 गुना धीमी आवाज सुन सकता है और इसी तेज सुनने की अपनी शक्ति के दम पर उल्लू अपना शिकार करते हैं , उल्लू अपने सिर को दोनों तरफ 135 डिग्री तक घुमा सकता है और – पलकें नहीं होने के कारण इनकी आंखे हरदम खुली रहती हैं और दिन के उल्लूओं को रात में साफ दिखाई देता है। इसीलिए ये रात को ही शिकार करता है।

उल्लूओं का खात्मा पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा

लेकिन चिंता की बात है कि उल्लूओं की तमाम प्रजातियां लगातार कम हो रही हैं जो फसलों के संरक्षण के लिए भी बड़ा खतरा है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण आवास ना मिलना दूसरा , तेजी से बदलता मौसम और शिकार की वजह से उल्लू कम होते जा रहे हैं जो पर्यावरण के लिए बड़े खतरे का संकेत हैं

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