किस नेता के पत्र ने Rahul Gandhi को कटघरे में खड़ा कर दिया

राहुल गांधी की भारत यात्रा को लेकर लगातार बीजेपी और उनके कईं साथी दल सवाल उठा ही चुके थे और अब खुद कांग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठ नेता ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा एवं उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर कांग्रेस को बड़ा embarrass कर दिया है। जी हां आपको बता दें कि कांग्रेस के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकीम ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा और इस यात्रा पर सवाल उठाए हैं, यहीं नहीं उन्होंने उन्होंने हाल ही में राहुल गांधी के ओडिशा दौरे पर भी सवाल किए हैं, उन्होंने कहा कि राहुल अपनी तीन दिन की यात्रा में अगर जमीनी  कार्यकर्ताओं से मिलते, तो इससे कांग्रेस को काफी फायदा होता पर राहुल केवल औपचारिकता निभाकर चले गए। ऐसे में कांग्रेस का जमीनी जुड़ाव कैसे मजबूत हो सकता है। अपने पत्र में मोहम्मद मोकीम ने जमकर और भी भड़ास निकाली और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष भक्‍त दास के नेतृत्व पर भी खुलकर हमला बोला, उन्होंने कहा कि लगातार हार झेलने वाले नेता को प्रदेश की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि दास का ओडिशा कांग्रेस को मजबूत करना संभव नहीं है क्योंकि उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस नुआपड़ा उपचुनाव 83 हजार वोटों से हार गई, जबकि यह इलाका खुद दास के संसदीय क्षेत्र में आता है।मोकीम ने यह भी लिखा है कि उनका परिवार पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा है और लेकिन हार का सिलसिला जो थम नहीं रहा इससे हमे काफी निराशा है। उन्होंने 2023 में नियुक्त पूर्व पीसीसी प्रमुख सरत पटनायक पर भी सवाल खड़े किए। और कहा कि पटनायक लगातार छह लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। और उनके कार्यकाल में 2024 में कांग्रेस को मात्र 13 प्रतिशत वोट मिले—जो अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था—और पटनायक खुद अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। इस पत्र के सामने आऩे पर पार्टी के भीतर काफी उथल-पुथल मची हुई है।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।