क्या प्रियंका चतुर्वेदी, जहाज बदल सकती हैं बन रही NDA का हिस्सा

 

प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस की पूर्व नेता और अब उद्वव ठाकरे पार्टी की नेता लगता है जहां भी जाती हैं वहीं उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं ।अब वो कांग्रेस में जब तक थी और कांग्रेस में जिस तरह से उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया उसके बाद वो कांग्रेस छोड़कर उन्होंने शिवसेना ज्वाइन कर ली, अब शिवसेना जाइन करने के बाद उनको राज्यसभा तो मिल गई लेकिन पार्टी की दुर्दशा हो गई। वो दो में बंट गई और एक कहावत कही जाती है सर मुड़ाते ही ओले पड़े वो मुहावरा जो है वो प्रियंका चतुर्वेदी के साथ सही साबित हुआ इसलिए कि कांग्रेस छोड़ के वो शिवसेना में गई थी कि कांग्रेस के ब्रांड की राजनीति या जिस तरह से कांग्रेस की राजनीति चलती है उससे मुक्ति मिलेगी, लेकिन जैसे ही वह शिवसेना में आई शिवसेना का अलायंस कांग्रेस के साथ हो गया और मजबूरन उन्हें डिफेंड करना पड़ रहा पूरा उसमें डिफेंड करना पड़ा कांग्रेस को।

Congress को छोड़ा पर Congress ने पीछा नहीं छोड़ा

प्रियंका चतुर्वेदी की बात इसलिए हो रही है कि वह एक बार फिर अपनी जो उनकी राजनीतिक पार्टी है उससे दूर जाकर के किसी और राजनीतिक दल का हाथ पकड़ सकती हैं और इस तरह की चर्चा जोरों पर है कांग्रेस से शिवसेना आई और अब शिवसेना से उनके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जो अजीत पवार वाला खेमा है उसको जॉइ करने की खबरें बहुत जोर से चल रही हैं। प्रियंका चतुर्वेदी ने हाल फिलहाल में जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अजीत पवार है उसके दो बड़े महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात की वो कौन से नेता हैं वो हैं पार्थ पवार और प्रफुल्ल पटेल यह दोनों महत्वपूर्ण मजबूत नेता हैं इनसे मुलाकात की और इस तरह की संभावनाएं बताई जा रही हैं कि वो अगले मानसून सेशन से पहले जो
पार्लियामेंट का मानसून सेशन होने वाला है उससे पहले वो अपनी साइड है वो बदल सकती हैं मतलब वो महा युति में आ सकती हैं ,महागठबंधन से

 

राज्यसभा उनको एक बार फिर मिल जाए इस बात की कवायद

प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा का कार्यकाल भी लगभग एक साल से कम का 11 महीने का 10 11 महीने का कार्यकाल बचा हुआ है तो उसके पहले वो फिर कहीं ऐसी जगह जाना चाहती हैं जहां वो सुरक्षित रहे और कम से कम उनकी
राज्यसभा उनको एक बार फिर मिल जाए , इसमें एक और महत्वपूर्ण बात है जो प्रियंका चतुर्वेदी के मन की बात बताती है वह इसलिए कि आजकल वो अक्सर बहुत सारे प्लेटफॉर्म्स पर प्राइम मिनिस्टर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करती हुई नजर आती है बहुत सारी योजनाओं की तारीफ करती हुई नजर आती है, इन सब बातों को देख के ऐसा लगता है कि वो अपनी पार्टी है वो बदल सकती हैं अब चूंकि 17- 18 सीट्स उद्धव ठाकरे के पास ह , असेंबली में तो उस नाते वो कहीं से भी वह प्रियंका चतुर्वेदी को राज्यसभा नहीं भेज सकते हैं और सब मिलाकर के भी बहुत ज्यादा कुछ फायदा नहीं होना है एक आध सीट ही आनी आनी है महागठबंधन के हाथ में जबकि महायुवती के पास को इस बार राज्यसभा में बहुत फायदा होगा तो इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी महायुवती का जो एनडीए है उसका दामन पकड़ सकती हैं । वो इस शर्त पर ही जा रही हैं कि उनका राज्यसभा
कंटिन्यू रखा जाएगा उनको राज्यसभा में उनकी राज्यसभा की सदस्यता आगे बढ़ा दी जाएगी मतलब उनको राज्यसभा के लिए नामित
किया जाएगा तो ये ये इस शर्त के साथ जा रही है

प्रिंयका अच्छी प्रवक्ता इसलिए बात बन सकती है

 

प्रिंयका अच्छी प्रवक्ता हैं, बेहतर अच्छा बोलती हैं तो राष्ट्रीय स्तर पर समाजवादी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक ऐसे नेता की जरूरत हो सकती है जो बातों को बहुत मुखरता से रख पाए रख सके तो इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी की उपयोगिता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी है, अजीत खेमे में है और दोनों तरफ से मतलब इनिशिएटिव वह हो गया है उनकी मुलाकात हो गई और एनसीपी जो अजीत पवार वाला खेमा है उस खेमे से प्रियंका चतुर्वेदी को पॉजिटिव वाइब्स मिली हैं मतलब वहां से भी उनको पॉजिटिव रिस्पांस मिला है कि हां ठीक है आप पार्टी जॉइ कीजिए और उसका वो होगा अब इसमें महत्वपूर्ण बात ये है एक तो अभी बीएमसी के चुनाव होने हैं उस समय बीएमसी के चुनाव के समयकि प्रियंका चतुर्वेदी की आइडेंटिटी नॉर्थ इंडियन की है पूर्वी मतलब उत्तर भारतीय की है अह मतलब उत्तर प्रदेश से संबंध उनका है तो इस कारण से उत्तर भारतीयों के वोट को अपनी तरफ खींचने में उनकी भूमिका हो सकती है और ये एक कारण है जिसके कारण उनको राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने एनसीपी अजीत पवार जो धड़ा है उसने उनको इस तरह का रिस्पांस दिया है इसलिए कि महागठबंधन और महायुवती बहुत मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहे हैं । प्रियंका चतुर्वेदी की राजनीतिक पहचान पहले कांग्रेस से थी उसके बाद वो शिवसेना से आईअब वो एनसीपी अजीत पवार के खेमे में जा
रही हैं जो कुल मिलाकर के एनडीए का एक घटक दल है तो ये एक स्थिति है जिस तरह से मैंने बताया कि जानकारी ये है कि मानसून सेशन के बाद कभी भी वो अपनी जहाज बदल सकती हैं और वो एनडीए में शामिल हो सकती हैं

 

 

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