लगता है कांग्रेस आलाकमान का अपनी ही पार्टी के नेताओं पर से पूरा अंकुश खत्म हो चुका है, एक तरफ राहुल गांधी , खरगे समते कांग्रेंस पार्टी पहलगाम  हमले पर अपने को  मजबूती से सरकार के साथ खड़े रहने का बयान दे रही है और दूसरी तरफ कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया के युद्द ना करने के बयान से लेकर महाराष्ट्र कांगेस के नेता विजय साहिब का कहना कि आतंकवादियों के पास इतना समय था कि वह धर्म के बारे में पूछते, दोनों बयान देश को शर्मिंदा कर रहे हैं क्योंकि इनही बयानों को पाकिस्तान मीडिया में देश के खिलाफ , सरकार के खिलाफ बढ़ चढ़कर पेश किया जा रहा है, पर यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा , अब एक तरफ पहलगाम हमले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने  संसद का  विशेष सत्र बुलाने की मांग की, वहीं  जयराम रमेश ने भी कहा कि  हम एक हैं, यह एकता का समय है, ध्रुवीकरण का नहीं, मौजूदा हालात को देखते हुए एकता और एकजुटता जरूरी है। पर दूसरी तरफ   उसके आईटी cell ने…एक पोस्टर पोस्ट करके pm मोदी पर ही निशाना लगा दिया, पोस्टर में लिखा है कि जिम्मेदारी के समय गायब और उसमें पीएम मोदी का सिर ही गायब है, अब जाहिर है इस तरह के पोस्ट पाकिस्तान का ही हौंसला बढ़ाएगें,। बीजेपी ने भी तुरंत इसपर पलटवार करते हुए कहा कि   कांग्रेस ने ‘सर तन से जुदा’ वाली तस्वीर का इस्तेमाल किया,  यह महज एक राजनीतिक बयान नहीं केवल मुस्लिम वोट बैंक को पाने की कोशिश है। बीजेपी नेता ने कहा कि  ये प्रधानमंत्री के खिलाफ एक छिपी हुई उकसावेबाजी है। यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने इस तरह की रणनीति अपनाई है।

कर्नाटक के CM  सिद्धारमैया पूरी तरह से बेलगाम हो चुके क्या ?

लगता है  कर्नाटक  के  cm सिद्धारमैया पूरी तरह से बेलगाम हो चुक हैं, उनके बोलने, करने से पार्टा को क्या नुकान पहुंच रहा है, देश को क्या नुकसान पहुंच रहा है, लगता है उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं अभी हाल ही में पाकिस्तान के साथ युद्द ना करने की बात करके उन्होनें ना केवल congress को बैकफेट पर खड़ा कर दिया था, बलिेक देश की सुरक्षा सेना के स्वाभिमान की भी अनदेखी कर दी, और अब उन्होंने जो किया वो और भी शर्मनाक है , स्टेज पर खुलेआम उन्होनें खाकी यानी पुलिस का अपनाम कर दिया। दरअसल कर्नाटक में आयोजित  एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक पुलिस अधिकारी पर जबरदस्त गुस्सा हो गए, उन्हें इतना गुस्सा आ गया कि उन्होंन खाकी पर लगे तमाम स्टार और वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की  अनदेखी कर दी और उस पुलिस   अधिकारी को ‘हे’ कहकर डांटा और मारने के लिए हाथ भी उठाया,  सिद्धारमैया  अपना आपा खोकर चांटा मार भी देते पर मंच पर मौजूद कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और कानूनी मंत्री एच के पाटिल ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। पर इस  घटना  का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और सिद्धारमैया की मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं। केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी ने  कहा  सीएम सिद्धारमैया का अहंकार अब अपनी सीमा लांघ चुका है।  कर्नाटक में कांग्रेस का कुप्रबंधन और अहंकार चरम पर पहुंच गया है। और जनता इन्हें सबक सीखाएगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।