क्या Congress के लिए राहुल Embarrassment प्रियंका Victory

विपक्ष के साथ कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी की leadership

विपक्षी गठबंधन तो क्या कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी की लीडरशिप को लेकर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई है। कईं वरिष्ठ नेताओं का साफ कहना है कि राहुल की जगह राजनीती में नहीं है , वह अपने मन की चलाते हैं ना ही किसी की सलाह लेते ना किसी की बात मनाते हैं और इसके चलते कांग्रेस को बहुत बार embarrassment का सामना करना पड़ जाता है। और इन सब के बीच फिर एक बार प्रियंका गांधी को लीडरशिप सौंपने की मांग जोर पकड़ रही है।

राहुल गांधी की नासममझी, जिदपन से कईं दल नाराज

वैसे राहुल को लेकर विपक्ष और कांग्रेस के ही कई नेताओं की बात पर गौर करे तो यह ठी़क सी भी लगती है, पीछे की बात छोड़े हाल फिलहाल की कुछ घटनाओं को देखें तो साफ लग रहा है कि कईं दलों ने सीधे तौर पर राहुल गांधी की नासममझी, जिदपन के चलते कांग्रेस से और राहुल गांधी से किनारा करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले संसद के अंदर की बात करें , जिस तरह से राहुल गांधी अड़ानी मुद्दे पर बहस कराने के लिए अड़ गए उससे कांग्रेस के अन्य दलों के साथ मतभेद साफ दिखाई दिए। टीएमसी की नेता ममता बनर्जी ने साफ कह दिया की अडानी को लेकर समय बरबाद किया जा रहा है और उनकी कही गई बात के बाद कई नेताओं को लगने लगा है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की जिद ठीक नहीं है।

किसने किया राहुल पर तंज –ये नहीं सुधरेंगे

कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन साथ ही यह भी दिख रहा है कि संसद के अंदर और बाहर दोनों ही जगहों पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच जबरदस्त टसल चल रही है। माना यही जा रहा है कि कांग्रेस की हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में करारी हार के बाद से ही कईं दलों ने अपने को कांग्रेस से बड़ा मानने की होड़ शुरू कर दी थी। जैसे ममता बनर्जी का इंडिया गठबंधन को नेतृत्व करने के प्रस्ताव को शऱद पवार से लेकर उद्वव ठाकरे और अखिलेश की सहमित मिल गई , अखिलेश ने महाराष्ट्र में उद्वव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए महाविकास अघाड़ी से नाता तोड़ लिया और दूसरी तरफ राहुल गांधी की ओर से अकेले संभल जाने के प्रयास पर उन्हें भी आड़े हाथों ले लिया। सपा के एक नेता आईपी सिंह ने तो राहुल गांधी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इन्होंने जिद कर ली है कि ये नहीं सुधरेंगे। सपा सांसद रामगोपाल यादव पहले ही ने राहुल गांधी पर बयान दे चुके हैं कि वह I.N.D.I.A. गठबंधन के नेता नहीं हैं।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।