जगदीप घनखड़ कहां चाणक्य ने खोला रहस्य

पिछले कुछ समय से पूर्व राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लेकर काफी सस्पेंस बना हुआ था , विपक्ष जमकर सरकार को घेर रहा था और पूछ रहा था कि कहां हैं जगदीप घनखड़ , विपक्ष ने अपने हमलों में जगदीप घनखड को अपने आप ही गायब कर दिया और राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव और तमाम विपक्ष के वो नेता जो संसद में घनखड़ साहिब की बेज्जती करने में पीछे नहीं रहते थे आज राजनीती के चलते उनके शुभचिंतक बनकर खड़े हो गए हैं पर बीजेपी चाणक्य ने पहली बार इसको लेकर जवाब दिया और सबका मुंह बंद कर दिया। अमित शाह खुलकर जगदीप धनखड़ पर बोले और उनको लेकर उठ रही कई आलोचनाओं का जवाब भी दिया। चाणक्य ने जगदीप धनखड़ की तारीफ करते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने अपने कार्यकाल में अच्छा काम किया।लेकिन उनके इस्तीफे के पीछे सिर्फ और सिर्फ उनकी खराब health थी , घनखड़ जी ने अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ही इस्तीफा दिया था। जिसे इसी काऱण स्वीकार कर लिया गया। यहां चाणक्य ने यह बात जोर देकर भी बोल दी कि इस बात को खींचने या किसी और तरीके से देखने की जरूरत नहीं है। ऐसा कहकर देश के गृहमंत्री ने विपक्ष और खासकर राहुल को शायद इशारा कर दिया कि इस मुद्दे पर गलत बोलने से बचें , चाणक्य ने घनखड़ की health को लेकर कुछ ज्यादा emphasis दिया शायद कहना चाह रहे हों कि जैसे ही उनकी health में सुधार आएगा वो सबके सामने आ ही जाएंगे।

PM Modi क्यों ला रहे हैं अपने ही खिलाफ कानून

गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान का 130वां संशोधन विधेयक बिल 2025 पारित होने पर विश्वास जताया था पर विपक्ष ने इसको लेकर हंगामा खड़ा कर दिया है और आरोप लगा रही है कि सरकार का यह कदम गैर-बीजेपी सरकारों को अस्थिर करने के राजनीतिक मकसद है। आपको बता दें कि इस बिल में जो प्रावधान है वह खुद पीएम मोदी के खिलाफ भी काम करेगा , ऐसे में माना यही जा रहा था कि विपक्ष जो पूरा जोर लगा ही रहा है कि कब पीएम मोदी को गद्दी से हटाया जाए इस बिल को लेकर शायद ही कोई विरोध करे, पर ऐसा हुआ नहीं विपक्ष ने यह भी आरोप लगा दिया कि सरकार विपक्षी नेताओं की जमानत में देरी करने के लिए अदालतों पर दबाव बना सकती है। और 30 दिन पूरे कर सकती है अब आपको बता दें कि इस बिल की खास बात यही है कि यदि कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रि और कोई भी मंत्रि 30 दिनों तक हिरासत में रहता है तो उसे हटाया जा सकता है।विपक्ष इसी बात को लेकर सरकार को घेर रहा है। वैसे अमित शाह ने इस बिल को लेकर साफ किया कि यदि यह कानून बनता है तो इसके बाद जेल से सरकार चलाने का रिवाज खत्म ही हो जाएगा। लेकिन चाणक्य ने यह भी साफ कर दिया कि यदि दोषी को कोर्ट से जमानत मिल जाती है, आरोप मुक्त हो जाता है तो वह फिर से शपथ लेकर पद पर लौंट सकता है।उन्होंने कहा कि इसका मकसद जनता के विश्वास के साथ संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखना है। आपको बता दें यहां केजरीवाल सरकार का मामला example के तौर पर लिया जा रहा है क्योंकि जब उनका मामला हाईकोर्ट में गया था तो कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह जेल में हैं। हाईकोर्ट तक ने टिपपणी की थी कि कि हमारा मानना है कि उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए पर मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

 

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