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वेनेजुएला में जो अटैक हुआ है अमेरिका का , और जिस तरह से वहां के राष्ट्रपति को बंधक बना लिया गया है। इस के पीछे अमेरिका का क्या मकसद है और इससे पहले भी अमेरिका कई ऐसे देशों पर अपनी दादागिरी दिखा चुका है और वहां पर अटैक करके सरकारें गिरा चुका है , अमेरिका के लिए कोई नई बात नहीं है और ये पूरे विश्व के लिए भी कोई नई बात नहीं है, आज इसी पर चर्चा कर रहे हैं Former Major General P. K Sehigal से

 

 

 

Ques वेनजुएला से पहले भी अमेरिका कईं देशों की सरकार गिरा चुका है, ऐसे कौन से वो देश हैं और उनके पीछे अमेरिका का क्या मकसद है

Ans——वेनेजुएला को मिलाकर अमेरिका ने इस तरह कीदखल अंदाजी 10 देशों में की है। 10 देश 10 देशों में से छह देश जो है वो लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में है और चार जो है मिडिल ईस्ट में है। तो सबसे पहले जो है उन्होंने गोटेमाला में 1954 में गोटेमाला में जेकब नाम के एक जेकब इन एवरेज प्रेसिडेंट थे। वो लेफ्टिस्ट थे। रशिया के नजदीक जा रहे थे और लैंड रिफॉर्म्स कर रहे थे जिससे अमेरिका को साफ तौर पे नजर आया कि अमेरिका के इंटरेस्ट जो है उस इलाके में कॉम्प्रोमाइज हो जाएंगे तो उन्होंने उसको रिजीम चेंज किया उसको हटाया ,फिर साल 1960 से लेकर अभी तक क्यूबा , जब पहले प्रेसिडेंट जॉन कैन थे तो उन्होंने क्यूबा को इनवेड करने की कोशिश की थ्रू ऑपरेशन ऑन ए डे ऑफ़ पिग्स लेकिन उसमें अमेरिका हार गया एक छोटे से रेस्क्यू बाद से और उसी की वजह से सीआई ने असिनेट किया जॉन एफ केडी को 1960 से लेके अभी तक है अनेकों प्रकार की सेंशन क्यूबा पर लगी हुई है वहां के ऊपर इकोनमिक ब्लॉके ब्लॉकेड है जिसकी बदौलत वहां किसी प्रकार का कोई ना तो इंफ्रास्ट्रक्चर कायम हुआ है ना ही क्वालिटी ऑफ़ लाइफ में तब्दीली आई है उसके बाद लैटिन अमेरिका में , लैटिन अमेरिका में उन्होंने सबसे पहले दखलअंदाजी की चिली के अंदर. वहां के प्रेसिडेंट भी अमेरिका से दूर हो रहे थे, लेफ्टिस्ट थे और रशिया के नजदीक जा रहे थे और अमेरिका ने इसको एक्सेप्ट नहीं किया और उनके खिलाफ भी इस बात की कारवाई की गई उनको भी हटाया गया । उसके बाद में 1980 में अमेरिका ने निकारा गुआ, जो लैटिन अमेरिका में है वहां भी जो थे प्रेसिडेंट थे वो भी लेफ्टनिस्ट थे वो भी रशिया के करीबी थे और लैटिन अमेरिका के देशों में अपना अपना दबदबा नहीं खोने के कारण अमेरिका ने एक मिलिट्री कु के माध्यम से प्रेसिडेंट को हटाया गया उसके बाद में 1989 में मैनुअल लोरेगा थे जो पलामा के प्रेसिडेंट थे और पलामा ने एक तो ड्रग ट्रैफिकिंग कर रहा था दूसरा मनी लॉन्डिंग कर रहे थे। तीसरा वो भी जो है रशिया के नजदीक जा रहा था। कॉमन लीडिंग थी और पनामा कैनाल के यूजेस के ऊपर दखलंदाजी कर रहा था। यहां यह कहना भी जरूरी है कि Second World War के बाद एक कोल्ड वॉर में एक तरफ सोवियत ब्लॉक था और दूसरी तरफ अमेरिका था। अमेरिका किसी प्रकार से नहीं चाहता था। कि जो उसका इलाका है जो करबियन है और लैटिन अमेरिका है उसमें रशिया की किसी भी तरह की दखल अंदाजी हो।तो जो देश थे उनके करीब जाने की कोशिश कर रहे थे उन्हे अमेरिका ने सजा दी।

Middle East के देशों को भी Invade किया

उसके बाद चार देश मिडिल ईस्ट में।सबसे पहले अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में इनवॉल्वमेंट ईरान में , 1979 में शाह ऑफ ईरान का तख्ता पढ़ दिया था और आयतुल्लास जो है आयतुल्ला खुनी की रिजीम हो गई थी और वो अमेरिका के अगेंस्ट हो गए थे। रशिया के नजदीक हो रहे थे और और वहां पे ईरान जो है दुनिया का थर्ड लार्जेस्ट ऑयल प्रोड्यूसर है। अमेरिका की नजर मिडिल ईस्ट में हमेशा ऑयल के ऊपर रही है। उनका मिडिल ईस्ट का मेन इंटरेस्ट है ऑयल है और ऑयल को निगाह में रखते हुए उन्होंने तब से लेके अभी तक ईरान के ऊपर सेंशन लगाई हुई है। रिजीम चेंज की बड़ी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक सक्सेस सक्सेस नहीं है। इसके बाद उन्होंने 2003 में इराक पर हमला किया। जो भी फोर्थ लार्जेस्ट ऑयल प्रोड्यूसर है।वहां भी ऑइल के ऊपर नजर थी। ये कहकर कि सदाम हुसैन जो है वेपन्स ऑफ़ मास कंस्ट्रक्शन बढ़ा रहे हैं और ब्रिटिश के एमआई सिक्स ने भी ये भी कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका ने मिलके सदाम हुसैन के ऊपर कारवाई की। इन्वज़ किया इराक का और सदाम हुसैन के साथ क्या किया? सारी दुनिया की। उसके बाद में उन्होंने जो कारवाई की वो दो देश हैंसबसे पहले 2011 में उन्होंने गिलाफी के साथ में लिबिया में लिबिया भी ऑयल प्रोड्यूसिंग कंट्री हैउसमें भी काफी बड़े पैमाने पर ऑयल रिजर्व हैवहां भी उनकी नजर थी और वो प्रो चाइना जा रहा था या प्रो रशिया जा रहा हैएक कम्युनिस्ट लीविंग है और वो भी न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और खास करके न्यूक्लियर मटेरियल देना चाह रहा था पाकिस्तान वगैरह को। ये तमाम बहाने बनाकर उसके ऊपर हमला किया और गदाफी को भी मार दिया और तब से वहां पर इनस्टेबिलिटी है। इसके बाद सीरिया वो भी रशिया के नजदीक जा रहा था और वो नहीं किसी प्रकार से चाहते थे कि मिडिल ईस्ट में रशिया की किसी प्रकार की इनफ्लुएंस हो। अगर आप देखो तो मिडिल ईस्ट में रशिया की इनफ्लुएंस केवल ईरान में है जर्मन में और सीरिया में बड़े पैमाने पर थे। सीरिया में उसने अपने एयर बेससेस और मिलिट्री बेससेस बना रखे थे और हमेशा और वो जो है अमेरिकन इंटरेस्ट अमेरिका के तकरीबन नौ या 10 बेससेस है पूरे मिडिल ईस्ट में उनके लिए खतरा था उसको निगाह में रखते हुए उन्होंने कोशिश की एम स्प्रिंग के बाद में एरम स्प्रिंग जब हुई उस समय बहुत बड़ा प्रेशर आया वहां के प्रेसिडेंट के ऊपर असाद के ऊपर और असाद जो थे अपने ही लोगों के ऊपर हवानियत दर्शा रहे थे अमेरिका उसके अगेंस्ट था उन्होंने बड़ी जबरदस्त कोशिश कोशिश की रिजीम चेंज करने की और 2011 से लेकर अभी तक अमेरिका अनेको बारी सेना के ऊपर कई प्रकार के हमले कर चुका है

 

Ques——क्या ज्यादातर देशों में अमेरिका ने ख्ता इसलिए पलटा कि वो रशिया के करीब जा रहे थे और बहाना जो बनाया गया वो ये बनाया गया कि किसी के पास न्यूक्लियर वेपन है। जनता को वो तंग कर रहा है , किसी के बारे में ड्रग्स की बात की गई। लेकिन मेन मकसद कुछ और था अमेरिका का। अब वेनेजुएला में अटैक के पीछे असली कारण क्या है

Ans——इसके पीछे चार मुख्य रीजन है। सबसे पहले दुनिया के लार्जेस्ट ऑयल रिजर्व जो ऑयल रिजर्व है 33 बिलियन बैरल्स 34 बिलियन बैरल्स वो वेनेजुला में और ट्रंप की नजर उसके ऊपर है। दूसरा जो वेनेजुला है उसके रिलेशन भी चाइना और रशिया के साथ इंप्रूव हो रहे थे और वो आहिस्तेआहिस्ते लेफ्ट क्लीनिंग हो रहा था और अमेरिका को साफ तौर पे नजर आता था कि वो उनके लिए खतरा खतरा बन सकता है। तीसरा जो वेनेजुला है ब्रिक्स का मेंबर बनना चाहता था और वो कंप्लीटली उनके पास 303 बिलियन बैरल ऑयल तो है लेकिन वो साल में केवल एक्सट्रैक्ट कर पा रहा था और बेच रहा था ओनली 1.2 मिलियन मिलियन बैरल्स क्योंकि अमेरिका ने ऑइल की सेंशन लगा रखे थे और दूसरे देशों को खरीदने नहीं दे रहे थे लेकिन वो जो अपना ऑयल बेच रहा था वो सारी करेंसीज में डॉलर के बिना, उसने कह दिया था कि , मैं उन्हीं देशों को बेचूंगा ऑयल जो डॉलर के अलावा दूसरी करेंसी में बातचीत करेंगे तो डीपुलराइजेशन और डी डोलराइजेशन और अमेरिका को बड़ी जबरदस्त चिंता थी कि अगर डॉलर गिर जाता है , और दूसरी तरफ बड़े देश, ब्रिक्स देश थे वो भी डी डॉलराइजेशन की बात कर रहे हैं। चाइना भी उसकी बात कर रहा है। रशिया भी बात कर रहा है। ईरान भी उसकी बात कर रहा है। हिंदुस्तान भी यूपीआई के माध्यम से कई देशों के साथ कर रहा है। अगर डॉलर तो अमेरिका की इकॉनमी बहुत बुरी तरह प्रभावित होगी और ये अमेरिका को बर्दाश नहीं तो असली मुद्दा डालर को लेकर ही है। फिर अमेरिका को लगा कि इससे पहले चाइना वहां पर वेपन्स वगैरह भेज दे या हाइप वाली मिसाइल भेज दे इससे पहले ही अमेरिका ने खेल कर दिया।

 

 

 

Quesइंडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का क्या इंपैक्ट होगा? जिस तरह से शेयर बाजार भी डाउन हो रहे हैं।

Ans——इसका इमैक्ट है पूरे ग्लोबल ग्लोबल है। जहां तक इंडिया का तालुका है डायरेक्ट इंडिया जो है ऑलमोस्ट नील के बराबर ओनली 1% ऑइल इंपोर्ट करता था और 99% इंपोर्ट कर रहा था ऑइल रशिया से अमेरिका से और दूसरे देशों से सऊदी अरेबिया से इराक से और कुछ हद तक वेनेजुएला से नाइजीरिया से जी अनेको बास्केट से हिंदुस्तान को जहां तक ऑयल का ताल्लुक है या एनर्जी सिक्योरिटी का तालुक है कोई फर्क नहीं पड़ेगा

 

 

 

Ques——इस अटैक को लेकर चाइना भी थ्रेट कर रहा है बराबर और पुतिन भी आगे बढ़कर कह रहे हैं कि जो हुआ है गलत हुआ है। पूरा जो सिनेरियो बन रहा है उसमें क्या लग रहा है आपको कि चाइना और रशिया दोनों इस जो जंग चल रही है जो वेनेजुएला और अमेरिका के बीच में शुरू हो गया है। क्या ये बीच में इंटरफेयर करेंगे? क्या ये बीच में कूदेंगे? क्योंकि दोनों खुद ही इनवॉल्व है। चाइना जो है ताइवान की तरफ है और जो रशियाहै वो ऑलरेडी इनवॉल्व है यूक्रेन पे। तो आपको लगता है कि ये इस वेनेजुएला के मामले में आगे आएंगे?

Ans——देखो रशिया ने भी वार्निंग की है। चाइना ने भी वार्निंग की है लेकिन उनकी वार्निंग की बड़ी लिमिटेशन है। वो सिर्फ कह रहे हैं कि president मधुराओ को छोड़ दिया जाए। उसको उसकी वाइफ को रिहा किया जाए। इसके अलावा उनकी कोई मांग नहीं है। जहां तक नॉर्थ कोरिया है, नर्थ कोरिया ने साफ तौर पे कहा कि अगर उनको रिहा नहीं करते तो इसके कॉन्सक्वेंससेस बारे बड़े खतरनाक होंगे। कुछ असर तो हुआ है और देखा गया कि ट्रंप ने विद इन 24 आवर्स एक बड़ा बहुत बड़ा बदलाव कर दिया जब उन्होंने पहले उसको कैप्चर किया साथ में कहा कि हमने वेनेजुला को कैप्चर कर लिया और हम ही वेनेजुला को चढ़ाएंगे। विद इन 24 आवर्स उसने कह दिया कि हम वेनेजुला को नहीं चढ़ाएंगे। जो वहां की सरकार है वही उसको वेनेजुला को चलाएगी। कोशिश करेंगे कि हमारी रिक्वायरमेंट जो है उसको नजरअंदाज ना करें। नहीं तो उन्होंने कहा कि जो डेलसी है जो प्रेसिडेंट बनी है जी उनके खिलाफ इससे भी भयंकर कारवाई की जा सकती है। लेकिन साफ तौर पे ये कह दिया कि मैं उसको कैप्चर नहीं करना चाहता। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि चाइना और रशिया कोई बड़ी दखल अंदाजी कर सकती है।

नए साल में एक खतरनाक Trend शुरू कर दिया Trump ने

लेकिन दुनिया के लिए बहुत बड़ा एंड बैड प्रेसिडेंट सेटकिया है। क्योंकि चाइना इसी का फायदा उठा के ताइवान के ऊपर हमला कर सकता है। नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया के खिलाफ कोई कारवाई कर सकता है। या जापान के साथ में चाइना जो है अरुणाचल के खिलाफ या चिकन ने एरिया के हिंदुस्तान के कर सकता है। और हिंदुस्तान भी इसी एग्जांपल का फायदा उठा के बांग्लादेश के खिलाफ या पाकिस्तान पीओ के खिलाफ कर सकता है। लेकिन हिंदुस्तान इस बात नहीं करेगा। लेकिन चाइना अवश्य कर सकता है, तो ट्रंप ने जो एग्जांपल पेश किया है नए साल में वो बहुत ही गलत पेश किया है और इसका फायदा और देश बिल्कुल उठा सकते हैं।

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