पी चिदंबरम क्यों Congress के खिलाफ बयान दिया
लंबे समय से कांग्रेस का जो कैंपेन चल रहा था उसको पी चिदंबरम ने एक बयान देकर गड़बड़ कर दिया और जो यह कहा जाता है कि किसी खाने में बालू डाल देना वो काम कर दिया है। वो ऐसा इसलिए कि जो मुंबई हमला 2008 का 261 हुआ था उसके बाद इस तरह के आरोप लगे थे। फौज के लोगों ने बताया था कि हम पाकिस्तान पर आक्रमण करने के लिए तैयार थे। लेकिन सरकार ने परमिशन नहीं दिया। उसी बात को पूर्व गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने बोला कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में हमने पाकिस्तान पर हमला नहीं किया और उस समय की जो यूएस सेक्रेटरी स्टेट हैं कंडोलिजा राइस उन्होंने विजिट के दौरान प्राइम मिनिस्टर से मुलाकात की और गृह मंत्री से मुलाकात की और यह कहा कि प्लीज डोंट रिएक्ट। मतलब यह जो कांग्रेस लगातार यह दबाव बनाती रही है, यह आरोप लगाती रही है कि जो भारत ने फायरिंग रुकवाई, सीज फायर तो नहीं हुआ है और उसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि वो डोनाल्ड ट्रंप के कहने पर सीज फायर जैसी स्थिति आई। उसको बट्टा लगा दिया है। वो इसलिए है कि पूरा का पूरा कैंपेन जो है वो कांग्रेस का अब क्वेश्चन हो गया है। जब यह बात निकल कर के आई और कांग्रेस के बड़े नेता गृह मंत्री वित्त मंत्री रहे हैं। और उससे महत्वपूर्ण बात है कि मोदी और भारतीय जनता पार्टी के बड़े आलोचकों में से तीखे आलोचकों में से रहे। पी चिदंबरम ने ऐसी बात कही है। तो कुल मिलाकर के जो सुप्रिया श्रीनेत्र या बाकी पूरी की पूरी टीम जो यह गिनाती थी कि आज 20 हो गया, 25 हो गया, 30 हो गया, 40 हो गया वो अपने आप में उसकी हवा निकल गई और उन्होंने सीधे बोला कि यूएस यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका ने ऐसा करने के लिए उनसे कहा था।
वसुंधरा राजे की वापसी क्या Modi मान गए

वसुंधरा राजे लंबे समय से जो बहुत लो प्रोफाइल बना के चल रही थी उन्होंने संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व से मुलाकात की। अब उस इस मुलाकात के पीछे जो कयास है वो यह है कि वसुंधरा राजे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है और जो रिसफल होना है उसमें वसुंधरा राजे को जगह देने की बात है और उसमें उनको जगह मिल सकती है। तो यह एक बड़ा डेवलपमेंट है और इसमें इसको लेकर के उनके ना केवल सरकार में और बाकी राजस्थान में भी कुछ लोगों को नाराजगी थी कि इतनी बड़ी नेता हैं उनको नजरअंदाज किया जा रहा है। तो अब जो स्थिति है वो उसमें यह लग रहा है कि उनको मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। उनकी जगह पर भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया गया है राजस्थान का। जबकि वह यह उम्मीद कर रही थी कि उनको मुख्यमंत्री पद की दावेदार दी जाएगी और ये उनकी राजनीतिक वापसी पॉलिटिकल कमबैक है। उसका फर्क भी दिखेगा ना केवल राजस्थान में बल्कि और भी मध्य प्रदेश में उनके प्रभाव दिखेगा। हालांकि सिंधिया परिवार का एक बड़ा नेता वो मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में है। तो माधवराव सिंधिया के लड़के ज्योतिरादित्य सिंधिया। तो यह जो है अब वसुंधरा के केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी से ना केवल मध्य प्रदेश में बल्कि राजस्थान में बीजेपी को फायदा होगा और प्लस जो एक नाराजगी का बार-बार लोग प्रश्न उठा रहे थे कि वसुंधरा जी नाराज हैं या क्या है वो उस पर भी एक विराम लगेगा और ऐसा होता दिख रहा है
NDA ने तय की बिहार में सीटें

एनडीए की सीटों का फैसला दशहरे के बाद हो सकता है कि किस राजनीतिक दल को कितनी सीटें मिलेगी। हालांकि औपचारिक तौर पर इसकी कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कह दिया है साहब कि हम दशहरे के बाद इस पर फैसला मतलब हमारी सीटों का हो जाएगा। कमोबेश सीटों पर चर्चा हो चुकी है। दिल्ली में कई राउंड बैठक हो चुकी है। पटना में कई राउंड बैठक हो चुकी है। और ये लगभग डिसाइडेड है कि कम ज्यादा एक दो सीट कम ज्यादा जनता दल यू और भारतीय जनता पार्टी लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ेंग। 20 के चिराग पासवान को मिलेगा। बाकी 202 सीटें जो बचती है उसमें हम उसके अलावा जो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी है उसको इस तरह से बंटवारे होंगे।और इन सब के बीच जो लगातार यह दबाव था कि नहीं चिराग पासवान को ज्यादा सीटें वो भी नहीं होने जा रहा है। तो कुल मिलाकर के जो सीटों का बंटवारा है वो लगभग हो गया है। दो चार सीटों पर जो भी मामला फंसा होगा
Pakistaan में बढता विरोध POK में जबरदस्त तनाव

पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू कश्मीर जो है वहां पर अह बवाल शुरू हो गया है। हालांकि वहां बवाल गाहे बगाहे अक्सर होता रहता है। लेकिन ये बवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। कम से कम तब जब पाकिस्तान के लगभग हर इलाके में विरोध चल रहा है। चाहे वो बलूचिस्तान हो, चाहे वो सिंध हो, चाहे खैबर पख्तून ख्वा हो, चाहे जो भी इलाका हो। अब इस इस पूरे डिस्टरबेंस के पीछे सबसे बड़ा कारण है एक तो ये कि जो कश्मीररियों को रिप्रेजेंटेशन नॉमिनेशन मिलता है असेंबली में उसको 12 सीटों का उसका विरोध है। बिजली के टेरिफ को लेकर के विरोध है। पानी के बंटवारे को लेकर के विरोध है। इंफ्रास्ट्रक्चर खराब होने को लेकर के विरोध है। फौज के अट्रोसिटी के खिलाफ विरोध है। इस तरह के लगभग 11 12 मसले हैं जिन पर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से एक बड़ा सेक्शन मतलब 80 90% से ज्यादा है जो अब कंपैरिजन करने लगा है जो भारत में जो कश्मीर है वो और जो पाकिस्तान के कब्जे में जम्मू और कश्मीर का इलाका है वो और उस कंपैरिजन में जो पाकिस्तान कब्जे वाला जम्मू कश्मीर कश्मीर है वो और जो जम्मू कश्मीर है उससे बहुत अंतर है। बहुत इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर के एंप्लॉयमेंट से लेकर के एमावरमेंट तक में बहुत अंतर है। और यही कारण है कि वहां पर विरोध प्रदर्शन जाना ज्यादा होने लगा है और लोग कह रहे हैं कि हमको वो सुविधाएं क्यों नहीं मिल सकती हैं जो कश्मीर के निवासियों को मिल रही है और भारत में भारत के हिस्से में जो कश्मीर है वहां के लोग ज्यादा सुखी, समृद्ध और संपन्न नजर आते हैं। उनके यहां सुविधाओं बेशुमार है। लेकिन यहां के लोग लगातार मुफसी और बेचारगी की जिंदगी जी रहे हैं। ये भी एक बड़ा मसला है। ये है और भारत का वो हिस्सा है। इसलिए भारत की हमेशा दावेदारी रही है। भारत का ये कहना है कि वो आज नहीं तो कल हमारे हिस्से में होगा। हम उस पर नजर बटाकर रखेंगे। लेकिन वहां पर विरोध प्रदर्शन बहुत तेज हो गए हैं
