प्रशांत किशोर को लगा करारा झटका 

बिहार में बनी नई पार्टी जनसुराज के मुखिया प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा झटका दिया है कि वो लंबे समय तक इसे याद रखेंगें, कोर्ट की प्रशांत किशोर को लेकर की गई टिप्पणी जैसे जैसे लोगों तक पहुंच रही है उनके खिलाफ कईं तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, ज्यादातर का यही मानना है कि राजनीति में कईं नेताओं का भविष्य चमकाने के बाद प्रशांत किशोर कुछ ज्यादा ही आत्मविश्वास से भर गए थे, बड़ी बडी बाते करते थे, नेताओं का खुलेआम अपमान कर देते थे औक इसके चलते बिहार में ना केवल लोगों ने जनसुराज को नाकार दिया बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इसपर तीखी टिप्पणी कर डाली, दरअसल प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने 2025 में  बिहार में हुए विधानसभा चुनाव को  चुनौती दी  थी और नए चुनाव कराने की मांग की गई थी पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ना केवल इस  याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया,।बल्कि इसको लेकर कड़ी फटकार भी लगा  डाली, कोर्ट ने कहा कि बिहार की जनता ने जनसुराज को नकार दिया, आपको बस पब्लिसिटी चाहिए , Cheif Justice Of India  ने कहा कि आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? अगर लोग आपको नकार देते हैं तो आप पॉपुलरिटी पाने के लिए अदालत के पास जाते हैं। पर सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ा नरम रूख अपनाते हुए यह भी कह दिया कि यह पूरे भारत का मुद्दा नहीं इसलिए हाई कोर्ट निश्चित रूप से इस पर विचार कर सकता है,

कमल हासन क्यों बनते जा रहे हैं विलेन

वैसे तो फिल्म अभिनेता कमल हासन ने अपने अभिनय से लोगों के दिलों पर राज किया है पर जिस तरह से वो हिंदू विरोधी बयान देते रहते हैं, सरकार पर बेतुके आरोप लगाते हैं,  उसके चलते उनके चाहने वाले बहुत से लोग उनसे दूर होते जा रहे हैं, पर कमल हासन को शायद कोई फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें पता है कि उम्र के इस पड़ाव में उन्हें क्या फिल्मे करनी हैं जो जनता की परवाह करें, वैसे एक बार फिर कमल हासन का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और संसद में दिए गए इस बयान से जबरदस्त हंगामा हो रहा है। कमल हासन ने देश के Election और Voting Process  पर हमला करते हुए संसद में सरकार को घेरने की कोशिश की और  बिहार को लेकर कुछ ऐसा बोल दिया जो उनके सरकार विरोधी रवैए को सामने लाता है,  उन्होंने राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी  हमला किया और  लोकतंत्र  को  खतरा यह भी इशारा कर रहे हैं,  अब कमल हासन को बिहार की चिंता सताने लगी और संसद में बोले वहीं SIR के चलते बहुत से मतदाताओं ने वोट ही नहीं दिया, यही नहीं उनका यह भी मानना है कि बिहार में जीवित Voters  को मृत बताकर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिेए गए, साफ लग रहा है कि कमल हासन को भी राहुल गांधी का आइडिया भा गया कि पास में कोई मुद्दा ना हो तो बस sir को लेकर ही खड़े हो जाओ वैसे कमल हासन के लिए इस तरह के बोल या बेतुके आरोप लगाना , हिंदूओं का , सनातन धर्म का अपामन करना कोई नई बात नहीं है।  इससे पहले  अगस्त 2025  में उन्होंने चेन्नई में कहा था कि शिक्षा के जरिए ही तानाशाही और सनातन विचारधारा की जंजीरों को तोड़ सकते  है। अपने हाथ में  सिर्फ शिक्षा लो।  वैसे अगर ये विचार शिक्षा को बढावा देने के लिए होते तो बड़ी बात थी पर कमल हासन को शिक्षा से ज्यादा सनातन का अपमान करना था, वैसे इससे पहले भी एक चुनाव सभा में उन्होंने कहा था कि आजाद भारत का पहला आतंकी एक हिंदू था। उसका नाम नाथूराम गोडसे था और  यहीं से आतंक की शुरुआत हुई थी। वैसे ये विवाद का विषय बना था पर कमल हासन अपना वोट बैक खुश करने में कामयाब हो गए, कमल हासन लगातार इस तरह की हरकते कर रहे हैं , इससे पहले 2 नवंबर 2017 को उन्होंने एक तमिल पत्रिका में लिखा था, ये नहीं कह सकते कि हिंदू आतंकवाद नहीं है. पहले हिंदू कट्टरपंथी बातचीत करते थे, अब वे हिंसा करते हैं.।अब कमल हासन जो  नेता बन चुके हैं। और अभी भी जिस तरह की वह बयानबाजी वह लगातार कर रहे हैं, तो लोग यही सोच रहे हैं कि उनकी सोच इतनी क्यों बदलती जा रही है क्या ये राजनीति में सफलता पाने के लिए शार्ट कट है या मीडिया की सुर्खियों में रहने की लत ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।