बढ़ती गुटबाजी कैसे परेशान कर रही Priyanka Gandhi को

हाल ही में प्रिंयका गांधी को असम में सीट बंटवारे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी पर जिस तरह से असम में कांग्रेस पार्टी के भीतर भयंकर गुटबाजी चल रही है उससे लगने लगा है कि प्रियंका के लिए सीटों का बंटवारा करना आसान काम नहीं होगा, कांगेस की पूरी कोशिश है कि 10 साल बाद सत्ता में वापस कर लें, पर जिस तरह से नाराज होकर उसके कईं कद्दावर नेता सीट छोड़ चुके हैं और कईं छोड़ने को तैयार बैठे हैं उससे लगने लगा है कि जीत तो छोडिए असम में ठीकठीक सीटे लाना भी कांग्रेस के लिए जबरदस्त चुनौती होगा। जिस तरह से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के हाथ में कमान देकर प्रदेश असम में संगठन में गुटबाजी खत्म करने की कोशिश की थी वो नीती कांग्रेस पर ही उल्टी पड़ गई है, पहले इसके विरोध में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया और अब गुटबाजी से परेशान सांसद प्रद्युत बारदोलाई व प्रदेश उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार के इस्तीफे ने असम कांग्रेस में चल रहे टकराव को सामने ला दिया है। इन सब के बीच कांग्रेस के समक्ष परिसीमन के कारण मुस्लिम बहुल सीटों की कमी भी परेशान कर रही है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती है मुस्लिम वोटों को बंटने से रोकने के साथ ही हिंदू वोटों को लुभाने की , 2021 में मुस्लिम वोटों को बंटने से रोकने के लिए कांग्रेस ने एआइयूडीएफ के साथ गठबंधन किया था, पर उसका खामियाजा यही मिला की हिंदू वोट पूरी तरह से कांग्रेस से अलग हो गया। अब देखना यही है कि क्या कांग्रेस के टकराव को प्रियंका गांधी रोकने में कामयाब हो पाती हैं या नहीं

UP — मायावती को क्यों गुस्सा आया राहुल गांधी पर

अभी तक राहुल गांधी अपने उल्टे सीधे बयानों के कारण बीजेपी के कईं नेताओं के निशाने पर रहते थे, पर अब मायावती ने भी राहुल गांधी को लताड़ना शुरू कर दिया है, पर यहां अलग बात ये है कि मायावती राहुल से उनके बयानों के कारण नाराज नहीं हैं बल्कि जिस तरह से राहुल कांशीराम का नाम लेकर दलितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं, उससे मायावती काफी नाराज दिख रही हैं वैसे-ये राजनीति का कायदा ही है कि जैसे ही चुनावों की आहट आती है हर दल अपने वोट साधने के लिए हर तरह के प्रयत्न शुरू कर देता है, अब यूपी में कांग्रेस भी यही कर रही है , जिससे मायावती नाराज हैं, जी हां यूपी में अपनी पैठ फिर बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने कांशीराम के नाम को जपना शुरू कर दिया जाहिर सी बात है कांग्रेस एक बार फिर दलित वोटर्स को लुभाना चाह रही है, अब कांशीराम और दलित वोटर्स को कोई भुनाना चाहे तो मायावती कैसे चुप बैठ सकती हैं , कांशीराम जयंती के अवसर पर राहुल गांधी ने बढ़चढ़कर कांशीराम के कसीदे पढे तो मायावती ने तंज कसते हुे सोशल मीडिया पर लिखा ,कांग्रेस पार्टी ने बरसों केंद्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा संविधान के निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का कभी आदर-सम्मान नहीं किया। ना ही उनको भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित किया। फिर वो कैसे कांशीराम जी को इस उपाधि से सम्मानित करने की बात कर रही है। मायावती रूकी नहीं और कहा कि कांशीराम के देहांत पर कांग्रेस ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया और आज वही कांग्रेस उन्हे भारत रत्न दिलवाने की बात कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था कि अगर कांशीराम जी पं. नेहरू के दौर में होते, तो यूपी के मुख्यमंत्री होते, और उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।

 

अखिलेश ने फिर लपका योगी पर हमला करने का मौका

आजकल समाजवादी पार्टी ने जगह-जगह पोस्टर लगाए हुए हैं। मैं हूंअफसरवादी। अब आम आदमी की समझ में तो नहीं आ रहा कि यह माजरा क्या है पर इसका मतलब गहरा है, जी हां आपको बताते हैं कि हाल ही में यूपी में पुलिस भर्ती में एक सवाल पूछा गया कि अवसरवादी कौन जो समय देखकर बदले और इसके विकल्प के तौर पर पंडित, अवसरपवादी और दो नाम और दिए थे बस अखिलेश यादव कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ते जहां पर योगी सरकार पर अटैक का मौका मिले बस अखिलेश यादव ने ये लपक लिया और तंज कसते हुए यह पोस्टर छपवाए कि मैं हूं अवसरवादी , इसके जरिए वो कहना चाह रहे थे कि योगी सरकार पंडित यानी ब्राहणों के खिलाफ हैं, वैसे पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि यूपी में ब्राह्मण योगी सरकार से कहीं ना कहीं खफा नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों योगी के बहुत से विधायकों और मंत्रियों ने जो ब्राह्मण हैं उन्होंने अलग से एक बैठक की थी और बाद में बहुत मुद्दा गरमाया था। हालांकि योगी ने बाद में इसको रफादफा कर दिया था बातचीत के
जरिए। लेकिन अखिलेश पूरी तरह से ब्राह्मण वोटर्स को तोड़ना चाह रहे हैं और इनको एक मौका मिल गया है। हालांकि योगी ने इस तरह के सवाल पर कड़ी कार्रवाई करते हुए निर्देश भी दिया है कि इस तरह से प्रश्न पत्र में जाति वर्ग या धर्म की बात ना की जाए।

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