महाराष्ट्र -हरियाणा में जीत योगी अब दिलाएंगे Delhi की गद्दी


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता
पार्टी के नए खेवनहार के रूप में उभर रहे हैं , और इसका दो प्रमाण उन्होंने महाराष्ट्र में और हरियाणा में दे दिया है अब दिल्ली चुनाव में भी उनकी एंट्री हो गई है। बुधवार
से बृहस्पतिवार से शुरू हुई उनकी पहली रैली के बाद वह 13 और रैलियां पूरे दिल्ली में घूम घूम करके करेंगे, योगी की कुल 14 रैलियां होनी हैं और साफ है कि भारतीय जनता पार्टी उन पर बहुत भरोसा कर रही है।

केजरीवाल ने कहा था यमुना की सफाई ना करें तो चुनाव में वोट मत देना


अब जो किराड़ी में पहली रैली हुई है, बृहस्पतिवार को उसी रैली से उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरना शुरू कर दिया है और वह भी किस मसले में, यमुना की सफाई को लेकर के । जिस मामले पर केजरीवाल पहले ही यह बोल चुके हैं कि हम यह प्रॉमिस फुलफिल नहीं कर पाए। पिछले चुनाव के दौरान जब उनसे उनका इंटरव्यू किया जाता था बहुत सारे टीवी चैनल्स के लोग उनसे बात करते थे उस दौरान उन्होंने कहा था कि मैं दिल्ली की जनता से प्रॉमिस कर रहा हूं कि अगर
2025 तक यमुना साफ नहीं होती है तो अगले चुनाव में आप वोट मत देना अब यही प्रश्न जब बार-बार घूम कर के अरविंद केजरीवाल से पूछा जा रहा है तो उनके पास कोई जवाब नहीं है वह बेजुबान हो जाते हैं। लेकिन इस सबको जोड़ने का क्या मतलब है, जोड़ने का मतलब यह है कि जिस तरह से बृहस्पतिवार की रैली में योगी आदित्यनाथ ने अरविंद केजरीवाल को चैलेंज किया उन्होंने बोला कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार का पूरा कैबिनेट पूरा मंत्रालय प्रयागराज में गंगा जी में डुबकी लगाया है क्या अरविंद केजरीवाल भी यमुना में वैसी ही डुबकी लगा कर के दिखा सकते हैं और दिल्ली की जनता को बता सकते हैं कि उन्होंने थोड़ा सा भी यमुना की सफाई के लिए कुछ किया अब इसको योगी लिंक कर रहे हैं कि उन्होंने गंगा की सफाई के लिए कितना किया इतना किया कि वह अकेले नहीं पूरा का पूरा उनका 50 55 लोगों का मंत्रिमंडल जो है उसने वहां पर डुबकी लगाई और वह एक बड़ी न्यूज बनी उसी का उदाहरण देते हुए अब अरविंद केजरीवाल को घेरने की कोशिश कर रहे हैं

योगी ने गंगा साफ की केजरीवाल क्यों नहीं कर पाए यमुना साफ


इसको दो दृष्टि से देख सकते हैं। बहुत महत्त्वपूर्ण है पहला यह कि गंगा की सफाई को लेकर के पिछले जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं वह लगातार काम कर रहे हैं जहां भी जो उनको रोका जा रहा है सीवेज ट्रीटमेंट प्लान दुरुस्त किया जा रहा है जैसे पिछले पांच छह सालों में इलाहाबाद प्रयागराज में लगभग पूरे शहर में सीवेज लाइन लेकर दी गई है और वह अब काम करने लगे हैं तो व उसका ट्रीटमेंट होता है और वह सीधे पानी जो पहले गंगा में जाता था वह नहीं जा रहा है और इस तरह से बहुत सारे कानपुर में रोका गया है फतेहपुर में रोका गया है और जगहों भी रोका गया है। कानपुर में तो सीधे चमड़े टेनरी का पानी आता था उसको रोका गया है इससे गंगा के पानी में निश्चित तौर पर क्वालिटेटिव चेंज आया है और उसका प्रमाण यह था कि अभी कुछ दिन पहले जब योगी आदित्यनाथ गंगा किनारे गए थे तो उन्होंने गंगाजल का आचमन किया था अगर अगर आप उस इसको इस दृष्टि से देखें कि उनको इतना विश्वास था कि गंगा का पानी पीने से उनको कोई दिक्कत नहीं होगी

भगवंत मान पंजाब के एक नहर में पानी पिया पड़े बीमार

दूसरी तरफ इसी तरह का एक उदाहरण प्रस्तुत करने की कोशिश भगवंत मान ने की थी जब वह पंजाब के एक नहर में जाकर के उन्होंने पानी पिया था और बीमार हो गए थे उनको अस्पताल जाना पड़ा था तो यह कुल मिलाकर के जो स्थिति है अगर आप उसको देखें तो अब दिल्ली में ऐसी स्थिति बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल जमुना की सफाई के लिए लेकर के कुछ नहीं कर पा रहें।

बटेंगे तो कटेंगे नारे ने हरियाणा और महाराष्ट्र में जीत दिलाई अब दिल्ली की बारी

अब योगी आदित्यनाथ का दिल्ली में एंट्री होना कई दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है उसको एक-एक करके समझने की कोशिश करते हैं पहला यह कि योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का एक बहुत बड़ा चेहरा बन कर के उभरे हैं जिस तरह से पिछले दो चुनाव में उन्होंने बटेंगे तो कटेंगे नारा देकर के हरियाणा और महाराष्ट्र में ऐसी सफलता दिलाई जो अपने आप में अपने आप में इसके पहले कभी नहीं हुआ जिस तरह से महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी मतलब महायुति जीत के आई है या हरियाणा में अब तक की सबसे ज्यादा सीट भारतीय जनता पार्टी जीत कर उभरी है और वही
हाल महाराष्ट्र में हुआ है दिल्ली में क्यों ऐसा लग रहा है कि योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी काम कर सकती है।

पूर्वांचली मतदाताओं को लुभाने की कोशिश हैं

योगी आदित्यनाथ एक तो पूर्वांचल से आते हैं वहां से जो गोरख गोरक्ष धाम मठ है उसके पीठाधी है तो पूरा का पूरा पूर्वांचल से वह अपने आप को आइडेंटिफिकेशन
पैदाइश है व उत्तराखंड के वो पहाड़ से बिलोंग करते हैं तो उसके कारण जो दिल्ली का पहाड़ी वोटर है वो भी बीजेपी के साथ लामबंद हो सकता है अब असली लड़ाई दिल्ली में पूर्वांचली वोटर्स को लेकर के है हालांकि जो एक आंकड़ा प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है कि दिल्ली में लगभग 50 लाख या 60 लाख या 75 लाख के आसपास पूर्वांचली मतदाता हैं लेकिन वह संख्या लगभग एक से सवा करोड़ के आसपास है इसको आम आदमी पार्टी भी जानती है भारतीय जनता पार्टी भी जानती है और कांग्रेस भी जानती है उस दृष्टि से अगर आप देखें तो अरविंद तो जो आक्रमण या जो एंट्री हुई है योगी आदित्यनाथ की दिल्ली के चुनाव में वह महत्त्वपूर्ण है तीनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है हिंदुत्व उत्तराखंड और पूर्वांचली मतदाताओं के नाम नाम पर अब इसके बाद से अरविंद केजरीवाल ने भी पलटवार किया है दो विषय पर पहला यह कि उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर पर टारगेट किया है कि लॉ एंड ऑर्डर पर योगी आदित्यनाथ को होम मिनिस्ट्री मिनिस्टर अमित शाह को सलाह देनी चाहिए कि उत्तर प्रदेश की तरह
मतलब कि दिल्ली का लॉ एंड ऑर्डर दुरुस्त करें एक दूसरा जो विषय पर टारगेट किया कि क्या जिस तरह से दिल्ली में एजुकेशन की स्थिति उन्होंने कर दी है दिल्ली का एक शिक्षा का मॉडल बन कर के उभर रहा है वैसा ही शिक्षा का मॉडल उत्तर प्रदेश के पास भी है पहले वह दुरुस्त करें फिर वह आकर के दिल्ली में कोई बात करें।

गर्मियों में पानी को लेकर झुग्गी झोपड़ी वाले केजरीवाल से नाराज

इस तरह से दो मतलब दो प्रमुख उनके तर्क है जो योगी आदित्यनाथ को टारगेट करते हुए उन्होंने किया लेकिन यह जो मसले हैं चाहे व का मसला हो चाहे पोलूशन का मसला हो चाहे वह वाटर लॉगिंग का मसला हो यह यह सारे के सारे मसले जो हैं वह यो अरविंद केजरीवाल को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं और दिल्ली की जनता इसको लेकर के उनसे बहुत सारे जवाब मांग रही है इंफ्रास्ट्रक्चर की भी अगर बात करें तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश का कोई कंपैरिजन अब नहीं रह गया है उत्तरप्रदेश बहुत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है पहले जो और आपकी अगर कंपैरिजन करें तो ये ये सारे मसले हैं इसके अलावा जो जिस वोटर्स पर झुग्गी झोपड़ी को
लेकर के सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट रहते हैं अरविंद केजरीवाल वहां पर पानी को लेकर के इन गर्मियों में बड़ी समस्या रही है जिसको लेकर के झुग्गी झोपड़ी में नाराजगी
है और इस बात को लेकर के भी है कि जहां झुगगी वहीं घर वाला जो वादा था अरविंद केजरीवाल का नहीं था और अभी चुनाव के दौरान वो लगातार बहुत सारे वादे करते जा रहे हैं हालांकि बीजेपी ने भी दो चक्रों में मतलब दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने दिल्ली को लेकर के जो कार्यक्रम है उनको बताया है इस पर भी अरविंद केजरीवाल ने टिप्पणी की थी या चुटकी ली थी कि जो हम कर रहे हैं वही भारतीय जनता पार्टी करे
उसको मान लेना चाहिए कि ये फ्री बीज नहीं है यह जनकल्याण की बातें तो अभी जो योगी आदित्यनाथ की जो एंट्री हुई है अभी तो पहला साल्वो फायर हुआ है अभी
13 रैलियां और करेंगे देखते हैं किस तरह से अरविंद केजरीवाल को रते हैं चुनाव के परिणाम के बाद भी यह समझने की कोशिश करेंगे कि योगी कितने उपयोगी रहे दिल्ली के लिए

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