राजीव गांधी से लेकर Rahul Gandhi तक ने मनमोहन सिंह की बेज्जती की-पर निष्ठावान नेता Congress में ही रहे

कांग्रेस के वरिष्ठ , ईमानदार, पढ़ाई में टापर, जाने माने economist और 10 साल तक देश के प्रधानंत्री रहे डा मनमोहन सिंह का निधन देश के लिए बड़ी loss है, लेकिन कम ही लोग ये जानते होंगे कि इतने विद्वान नेता को भी कांग्रेस के अंदर कई बार बेज्ज्त किया गया उऩकी क्षमताओं पर सवाल उठाए गए थे, साल 1986 में जब late राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री थे और मनमोहन सिंह योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे उसी दौरान मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री राजीव गांधी को विकास को लेकर एक प्रजेंटेशन दे रहे थे तभी राजीव ने उन्हें फटकार लगा दी थी और योजना आयोग एक जोकर आयोग कहकर मनमोहन सिंह की सरेआम बेज्जती की थी। कहा जाता है कि राजीव गांधी के इस व्यवहार से मनमोहम सिंह बहुत नाराज हो गए और इस्तीफा देने की भी ठान ली थी पर लोगों के समझाने पर अपमान का घूंट पी कर काम करते रहे। यही नहीं राहुल गांधी मनमोहन सिंह की बेज्जती करने में अपने पिता से दो कदम आगे निकल गए , वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को पलटने के लिए मनमोहन सिंह अध्यादेश लाए का कैबिनेट से इस संबंध में अध्यादेश भी पास करा लिया पर राहुल गांधी ने इस अध्यादेश को भरी सभा में फाड़ दिया और यह तक कह दिया की यह अध्यादेश सड़क पर फाड़ने लायक है , उस समय भी मनमोहन सिंह इस बात से बहुत आहत हुए थे । ऐसी बहुत सी धटनाएं हैं जब गांधी परिवार के हर सदस्य ने मनमोहन सिंह की अलग अलग समय पर बेज्जती की पर पार्टी के प्रति मनमोहन सिंह की निष्ठा ने उन्हें कांग्रेस छोडने नहीं दी। ऐसे थे ये महान नेता।

 

लालू की पार्टी तीन Power Center नेता हैं परेशान

चर्चाएं चल रही हैं कि क्या बिहार में लालू यादव की पार्टी RJD में अंदर ही अंदर विद्रोह के हालात पैदा हो रहे हैं, वैसे लंबे समय से छन छन कर बाते सामने आ रही हैं कि rjd में तीन तीन powe center काम कर रहे हैं, पहली power खुद लालू के हाथ में हैं दूसरी तेजस्वी हैं और तीसरी power लालू के दूसरे पुत्र तेजप्रताप के पास हैं जो अपना वर्चस्व साबित करने के लिए कुछ ना कुछ हरकतें करते रहते हैं। ऐसे में हाल ही में जब मंत्री केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल यानी RJD के करीब 12 नेता एनडीए के संपर्क में हैं और जल्दी ही एनडीए के साथ आ सकते हैं तो इसपर विश्वास किया जा सकता है क्योंकि बिहार में rRJD का जनाधार धीरे-धीरे खिसक रहा है, एक तरफ कांग्रेस यहां अपने आप को
बड़ा भाई साबित करने की होड़ में अपने सहयोगी RJD को भी डाउन करने से नहीं चूक रही और दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की नई पार्टी के नेता लालू पर लगातार हमवा कर रहे हैं और उनके शासन को खुलेआम जंगल राज बता रहे हैं, बीच में यह भी खबरें आई थी कि RJD के बहुत से छोटे नेता और कार्यकर्ताओं ने प्रशांत किशोर का दामन थाम लिया है, ये वो नेता हैं जो बीजेपी जाना नहीं चाहते , कांग्रेस को पसंद नहीं करते और एक नई पार्टी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। मांझी ने तेजस्वी यादव को नीतीश के नेतृत्व पर सवाल करने के लिए भी सुनाया और कहा की उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए कुछ भी बयानबाजी करते रहते हैं। बिहार की जनता उन्हें सीरियस लेती ही नहीं । तेजस्वी यादव ने कहा था कि 2025 का विधानसभा चुनाव सीएम नीतीश कुमार के लिए आखिरी चुनाव होगा।

 

बिल्ली -बंदर की लड़ाई BJP उठाएगी फायदा

कहते हैं ना की राजनीति में कोई किसी का कभी दोस्त नहीं सिर्फ मतलब की दोस्ती है, अब कांग्रेस और आप के बीच छिड़ी जबरदस्त बयानबाजी को लेकर आम जनता हैरान परेशान ही है कि कल तक लोकसभा चुनाव में दिल्ली में साथ लड़ने वाले, हरियाणा में भी साथ लड़ने को तैयार आखिर अब आप और कांग्रेस के बीच कुत्ते -बिल्ली जैसी लड़ाई क्यों हो रही है, अभी हाल ही में कांग्रेस ने अरविद केजरीवाल को मु्फत की योजनाओं की शुरूआत करने पर दिल्ली को कंगाल करने का तंज कसा था और अब आप ने सीधे तौर पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करके आरोप लगा दिया कि वह बीजेपी से मिलीभगत कर AAP को हर संभव नुकसान पहुंचाने की कोशिशों में लगी है। AAP नेताओं का कहना है कि हरियाणा चुनाव के दौरान उन्होनें कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला था पर दिल्ली के चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता बढ़ चढ़कर आप की बुराई कर रहे हैं और लगता है कि जैसे उन्होनें बीजेपी की ही लाइन पकड़ ली है। आप का आरोप है कि कांग्रेस नेता अजय माकन और संदीप दीक्षित दिल्ली चुनाव के लिए बीजेपी पर ध्यान देने, उनकी बुराई करने की बजाय लगातार आम आदमी पार्टी को निशाना बना रहे हैं।दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की हरकतों की वजह से ही इंडी गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंच रहा है और कईं पार्टीयां इससे दूरी बनाने पर मजबूर हो रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में आप और कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खियों का असर विपक्षी विपक्षी गठबंधन पर भी पड़ेग जिससे दिल्ली और बिहार के चुनाव में बीजेपी को फायदा ही पहुंचेगा

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