ललन सिंह ने कर दिया ‘खेला’ नीतीश सरकार को बचाने वाले दिग्गज का टिकट कटा  

एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया तो पहली समस्या तो खत्म  हो गई पर अब दलों के अंदर ही उम्मीदवारों को सीट देने के जबरदस्त राजनीती शुरू हो गई है, जिस नेता का दांव चल रहा है वो अपने मनपसंद लोगों को टिकट दिलवा रहा है, एनडीए के सहयोगी दल jdu को लडने के लिए 101 सीटे मिली हैं और यहां सबसे पहले सीटे देने का काम शुरू हो गया लेकिन इसके चलते राजनीती भी बहुत हो रही है, सबसे पहले इस राजनीती का शिकार बन गए हैं सूर्यगढ़ा के विधायक प्रहलाद यादव, जी हां आपको बता दें कि यादव जी ने  2023 में नीतीश सरकार का समर्थन किया था पर अब इन्हें एनडीए ने टिकट नहीं दिया। है, वैसे इनको टिकट दिलवाने लिए लखीसराय के विधायक और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लगातार जोर लगा रहे थे पर  मुंगेर के jdu सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह इसका  विरोध कर  रहे थे और आखिरकार में जीत ललन सिंह की ही हुई , पता चला है कि ललन सिंह किसी भी सूरत में यह सीट jdu  से छोड़ने को तैयार नहीं थे और यही कारण रहा लंबी खीचातानी के बीच  बेचारे प्रहलाद यादव को टिकट नहीं मिला। आपको बता दें कि यादव सूर्यगढ़ा से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं , टिकट कटने से  प्रहलाद यादव काफी आहत महसूस कर रहे हैं , क्योंकि एक तरफ  23 सितंबर को उनके जवान बेटे की मौत हुई और उसके बाद उनका टिकट कटना उनकी ही राजनीतिक हत्या के समान है।

तेजस्वी भागे दिल्ली से पटना-लालू के दिए सिंबल वापस लिए

बिहार में जबरदस्त चर्चा चल निकली है कि क्या राहुल ने  तेजस्वी को ऐसा क्या कह दिया कि वह दिल्ली से जल्दी जल्दी में निकले और बिहार पहुंचते ही उन उम्मीदवारों से चुनाव सिंबल वापस ले लिए जो लालू यादव उन्हें सौंप चुके थे और इऩ सबकी फोटो भी खूब वायरल हो चुकी थी, अब सवाल यही है जब महागठबंधन में सीट शेयरिंग हुई ही नहीं उससे पहले ही लालू ने उम्मीदवारों को संबल बांटने शुरू कर दिए और शायद यही बात कांग्रेस आलाकमान खासतौर पर राहुल को नागवार गुजरी, चर्चा यह भी है कि राहुल तो क्या मल्लिकाअर्जुन खरगे ने भी तेजस्वी से मुलाकात नहीं की और तेजस्वी को वेणूगोपल से मिलकर ही संतोष करना पड़ा। लेकिन दिल्ली पहुंचे तेजस्वी के साथ कुछ तो ऐसा हुआ कि उन्हें rjd सुप्रीमो लालू यादव के बांट सिंबल वापस लेने पड़े और एक तरह से लालू का अपमान कर डाला। वैसे नामांकन दाखिल करने में सिर्फ तीन दिन का समय बचा है एनडीए ने जो जैसे-तैसे सीटों की सूची जारी कर दी पर महागठबंधन में अभी तक जबरदस्त मारामारी चल रही है ना कांग्रेस अपनी मनपसंद सीटे छोड़ने को तैयार है ना ही मुकेश साहनी की depty cm बनने की जिद खत्म हुए है ,क्या rjd और congress एकला चलो की राह पर बढ़ रहे हैं समय बताएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।