बिहार चुनाव प्रचार -प्रसार में जब से pm Modi ने सिवान में रैली की है, यह तो Clear हो गया कि इस बार NDA यानी मेन रूप से मोदी नीतीश की जोड़ी किन बातों पर अपना ध्यान फोकस करके एक अच्छी जीत की ओर बढ़ सकती है। जी हां सबसे पहले तो रैली में जिस तरह से पी एम मोदी ने एक बार फिर बाबासाहेब अम्बेड़कर के अपमान का मुद्दा गर्मा दिया उससे साफ हो गया कि NDA इस बात को एक बह्राअस्त्र की तरह RJD के खिलाफ इस्तेमाल करती रहेगी, आपको बता दें कि हाल ही में लालू के जन्मदिन पर RJD इतनी मदहोश हुई कि अंबेडकर की तस्वीर उनके पैरों के पास रख दी और यह फोटो जबरदस्त वायरल हो गई, बस तभी से BJP ने यह मुद्दा उठा लिया और इसे दलितों के सम्मान से जोड़ दिया। मोदी ने इस मुद्दे को हवा देते हुए यह तक कह दिया कि उन्हें पता है कि rjd इस पर माफी नहीं मांगेगी क्योंकि उनके मन में दलितों और पिछड़ों के लिए कोई सम्मान नहीं है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में सबसे पहले कराई गई जाती जनगणना का श्रेय भी NDA अपनी झोली में डाल रहा है और इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दलितों, गरीबों का मसीहा पेश किया जा रहा है, दूसरी तरफ बीजेपी यह बात एक अभियान की तरह पूरे बिहार में फैला रही है कि आरक्षण पर RJD का रवैया पाखंडी है। लालू 1990 से 2005 तक सत्ता में रहे थे पर उन्होंने किसी भी जाति या समुदाय को आरक्षण देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। अब सभी को पता है कि बिहार में हार जीत काफी हद तक पिछडी जाती के वोटों पर ही आधारित है और ऐसे में बिहार की पिछड़ी जातियों पर फोकस करके उनके वोट पाने की NDA की यह रणनीती कितनी कामयाब हो पाती है वो तो समय बताएगा

क्या अटल सरकार के समय पिछड़ों, दलितों के विकास पर नहीं हुआ काम

बिहार में चुनाव प्रचार जोरों पर हैं और इन सब के बीच एक नेता का यह बयान काफी वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने indirectly यह कह दिया कि ‘अटल सरकार के समय पिछड़ों, दलितों के विकास पर इतना ध्यान नहीं था, जितना मोदी सरकार के समय ध्यान दिया जा रहा है। दरअसल हाल ही में JDU नेता केसी त्यागी से जब बिहार में NDA की मजबूती के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि बिहार में nda बहुत मजबूत है और पूरी तरह से सामाजिक न्याय के मुद्दे पर काम कर रहा है, के सी त्यागी ने यह भी कहा कि अब वाजपेयी-आडवाणी का युग नहीं है, जहां सामाजिक न्याय के मुद्दे केंद्र में नहीं थे, अटल दौर से अलग है आज की बीजेपी मतलब मोदी सरकार। के सी त्यागी ने बाकायदा नाम लेकर कहा कि मोदी सरकार की ओर से समाजवादी नेताओं जैसे कर्पूरी ठाकुर, जॉर्ज फर्नांडीस, मधु लिमये और जेपी नारायण को वह सम्मान दिया गया जिसके वो सभी हकदार थे, साथ ही उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी इतने सालों की सरकार में कभी भी इन महान नेताओं का सम्मान नहीं किया गया, उन्होंने कहा कि ‘नीतीश कुमार समाजवादी आंदोलन का चेहरा हैं, महादलितों के लिए जगह बनाई और साथ में BJP ने भी समाजवादी नेताओं की विरासत को अपनाया है।

Bihar -दो कद्दावर नेता फिर शुरू हुआ टकराव—NDA में खतरे की घंटी

बिहार में कुछ समय पहले तक चिराग पासवान और नीतीश कुमार के बीच जबरदस्त मनमुटाव था दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे लेकिन राजनीती ऐसी चीज है कि हर कोई सिर्फ फायदे का सौदा देखता है और मतलब के लिए दुश्मन को भी तुरंत दोस्त बना लेता है। जब चिराग और नीतीश की पार्टी दोबारा एनडीए का हिस्सा बनी तो दोनों ने तमाम तनाव भुलाकर एक दूसरे से दोस्ती कर ली, पर आजकल बिहार में लग रहा है कि वही पुरानी कहानी फिर शुरू हो रही है, जी हां पता चला है कि चिराग पासवान के ‘बिहार फर्स्ट’ चुनावी एंट्री जैसे नारे के लेकर नीतीश कुमार तो क्या jdu के और कईं नेता काफी नाराज है, यही नहीं कहने को तो बीजेपी ने घोषणा कर दी है कि उनके मुख्यमंत्री नीतीश ही होंगे पर अंदर ही अंदर कुछ और ही खिचड़ी पक रही है और चिराग पासवान के चाहने वाले उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर रहे हैं ,शुरूआत हो चुकी है, चिराग की पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है और इसे एक तरह से एनडीए पर अधिक सीटें देने के लिए ‘दबाव बनाने वाली रणनीति’ के रूप में देखा जा रहा है। -चिराग पासवान का नारा कि ‘बिहार पहले, बिहारी पहले’ को बिहार की जनता भी पसंद कर रही है और यह नीतीश के लिए बड़ी खतरे की घंटी है , यही नहीं बीजेपी के अंदर भी कईं नेता चिराग के नाम पर हामी भर रहे हैं क्योंकि उनहें लग रहा है कि इससे एक तरफ नीतीश के लिए एंटी इनकंबेंसी का खतरा खत्म हो जाएगा और एक युवा मुख्यमंत्री के रूप में चिराग, तेजस्वी का भी बढिया तोड़ साबित होंगे। लेकिन ये राजनीती है कल उंट किस करवट बैठेदगा कोई नहीं कह सकता ।

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