विपक्ष एक तीर दो शिकार-SIR  के काम में बाधा दूसरी तरफ BLO  के तनाव चिंता  

कईं ऐसी घटनाओं की अभी तक चर्चा ही होती थी जहां SIR यानी Special Intensive Revision में लगे बूथ लेवल आफिसर यानी BLO को विपक्षी दल के नेता और उनके कार्यकर्ता ही परेशान कर रहे होते हैं, उनके काम में अडचने डालते हैं, उनका तनाव बढ़ाते हैं , उनसे मार-पिटाई तक कर लेते हैं, पर अब ये बात खुलकर सामने आ गई जब   झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने खुलेआम आम जनता को उनके घर सर्वेक्षण के लिए आने वाले   बीएलओ को बांधकर रखने की अपील कर डाली ,उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी उनके घर उनका नाम पूछने आए या कोई कागजा मांगे तो मत देना, उसे बाहर भी मत  जाने दें, वरना ये  मतदाता सूची से आपका नाम काट देंगे , अंसारी ने अपनी बात को जायज ठहराने के लिए साथ में  यह आरोप भी जड़ दिया कि sir के कारण ही  बिहार में महागठबंधन की हार हुई।  मंत्री अंसारी यह भी मान रहे हैं कि अब  बंगाल और झारखंड में भी ऐसा किया जाएगा , इसलिए BLO को काम ही मत करने दो। आपको बता दें कि इरफान अंसारी जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और कांग्रेस कोटे से झारखंड की हेमंत सोरन सरकार में मंत्री हैं। वैसे इस तरह से विपक्ष का BLO की परेशानियों को लेकर दोहरा चरित्र भी सामने आ रहा है एक तरह वो अपना काम कर रहे BLO की फील्ड में परेशानियां बढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ BLO  के तनाव और उनकी मौतों को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं , लेकिन कहते हैं ना कि राजनीती में सब कुछ हो सकता है।

क्या BJP  की गद्दी छीनने का नया खेला शुरू 

महाराष्ट्र की राजनीती में इस समय दो बड़े  गठबंधन हैं और दोनों में ही लगातार खीचातानी की खबरें छन छन कर बाहर आती हैं, हाल ही में कांग्रेस के bmc चुनाव अकेले लड़ने के फैसले से गठबंधन के साथी दल उद्वव और शरद पवार नाराज चल रहे हैं और अब पता चला कि बीजेपी के महायुति गठबंधन में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा, पहले तो दबे स्वरों में इसकी चर्चा होती थी और अब फणडवीस सरकार में  डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के एक बयान से खुलकर यह सामने आ गया कि बीजेपी गठबंधन में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा है,  एकनाथ शिंदे ने कहा कि  सहयोगी दलों को महागठबंधन धर्म का पालन करने करना चाहिए,  बस ‘गठबंधन धर्म’ वाला यह   बयान तेजी से वायरल हुआ और सबको पता चला कि महायुति में दरार आ चुकी है। पता चला है कि इन दिनों शिवसेना के कॉर्पोरेटर्स और ऑन-ग्राउंड वर्कर्स लगातार बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और शिंदे  इस बात को लेकर नाराज हैं कि उस समझौते की उपेक्षा की जा रही है जिसमें कहा गया था कि दोनों पार्टियों के वर्कर्स और ऑफिस-बेयरर्स को दूसरी पार्टी अपने में  शामिल नहीं करेगी।   लेकिन ये समझौता टूट गया लगता है क्योंकि शिल्पारानी वाडकर, रूपसिंह धाल, आनंद ढोके,समेत शिवसेना के कई नेता BJP में शामिल हो चुके हैं और ये सिलसिला लगातार चल रहा है जिससे एकनाथ शिंदे काफी नाराज हैं, सुनने में यह भी आया है कि हाल ही में फडणवीस और शिंदे एक ही होटल में ठहरे थे, पर  दोनों ने एक-दूसरे से मिले नहीं। एकनाथ शिंदे खुलकर कह रहे हैं कि हम गठबंधन धर्म के सिद्धांतों को पूरी तरह फॉलो करते हैं और हमारे अलायंस पार्टनर्स को भी इसे फॉलो करना चाहिए

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।