Table of Contents

साल 2026 War ही War – 92 देश आपस में लड़ने को तैयार बैठे

2025 का साल चला गया और बीते साल में कई देशों में युद्ध शुरू हुए और चल भी रहे हैं। जैसे भारत और पाकिस्तान का युद्ध 2025 का बहुत ही अहम युद्ध माना गया। इसके अलावा जो रशिया और यूक्रेन में युद्ध था वो लगातार चल रहा है। इजराइल- हमास में जो युद्ध था
वो लगातार चल रहा है। और भी छोटे-छोटे युद्ध कोल्ड वार कई देशों में चल रही है, इसलिए ये कहा जा रहा है कि 2026 का जो साल है इसमें बहुत से ऐसे देश हैं जो ऑलमोस्ट युद्द के एज पर खड़े हैं और जरा सी चिंगारी पड़ने की देर है युद्ध हो सकता है, इसमें अमेरिका -ईरान के बीच, चीन ताइवान, भारत पाकिस्तान या बांग्लादेश इजरायल -सीरिया तमाम नाम शामिल हैं , जानकारों का कहना है कि विश्व की 193 देशों में 92 देश ऐसे हैं जिनमें या तो युद्घ चल रहा है या गृहयुद्घ और या दूसरे देशों के साथ कोल्ड वार या तमाम तरह की आपसी पाबंदियां चल रही हैं, ऐसे में ये कॉन्फ्लिक्ट 2026 में युद्ध में तबदील हो सकते हैं। इसी बात पर चर्चा करी है Former Major General P.K Sehigal से

Ques— जो युद्ध चल रहे हैं, वह तो चल ही रहे हैं। लेकिन 2026 में आपको क्या लगता है किन देशों में कॉन्फ्लिक्ट हैं ? किन-किन देशों में आपस में इस साल युद्ध हो सकता है?

Ans — सबसे पहले हम मिडिल ईस्ट की बात करेंगे। मिडिल ईस्ट में इस समय ऑलरेडी काफी देश है जो आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं।इजराइल और हमास, इजराइल और हिजबुल्ला साथ ही साथ ही ईरान भी इन्वॉल्वड है। इजराइल भी इन्वॉल्व है। इराक भी इन्वोल्वड है। सीरिया भी इन्वॉल्व है। यमन भी इन्वॉल्वड है। लेबनान भी इन्वॉल्वड है। इसके अलावा बहुत बड़े पैमाने पर युद्ध हो सकता है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच में जिसमें पूरा का पूरा मिडिल ईस्ट जो है एक किस्म से भस्म हो सकता है और पूरी दुनिया के ऊपर इसका बहुत बड़ा भयंकर असर हो सकता है। इसके अलावा अगर एशिया देशों की की तरफ आ जाए तो एशिया में अफगानिस्तान पाकिस्तान के बीच में युद्ध हो सकता है। जहां तक हिंदुस्तान और पाकिस्तान का ताल्लुक है हिंदुस्तान साफ तौर पे कह रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ। हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच में भी युद्ध हो सकता है। साथ ही साथ कंबोडिया और थाईलैंड के बीच में युद्ध हो सकता है। और जहां तक म्यांमार का ताल्लुक है म्यांमार में ऑलरेडी सिविल वॉर चल रही है और वो और भड़क सकती है। और हो सकता है कि हिंदुस्तान किसी ना किसी तरीके से बांग्लादेश के साथ भी इन्वॉल्व हो जाए क्योंकि बांग्लादेश बड़े पैमाने पर चाइना की मदद के साथ में पाकिस्तान की मदद के साथ में चिकन नेक जो हमारा बनाया एरिया है उसको लेकर के लगातार थ्रेट पोस्ट कर रहा है। फिर अगर आप अफ्रीका में देखो तो अफ्रीका में बड़े पैमाने पर पांच देश है जो युद्ध में इनवॉल्व है। सबसे पहले कोगो, सोमालिया, सुडान, टाइगर, माली और बरकना फासा। फिर अगर लैटिन अमेरिका की तरफ की तरफ देखो तो लैटिन अमेरिका में भी अनेकों देशों में युद्ध हो। हो सकता है। अमेरिका जो है पनामा के ऊपर हमला कर सकता है। अमेरिका क्यूबा के ऊपर हमला कर सकता है। अमेरिका मेक्सिको के ऊपर हमला कर सकता है। और अमेरिका जो है कोलंबिया के ऊपर हमला कर सकता है वेनेएजुला के ऊपर तो पहले ही कर चुका है। अब ईस्ट में देखें तो चाइना और ताइवान की आपस में झड़प हो सकती है। चाइना और फिलीपींस की हो सकती है। चाइना और जापान की हो सकती है। चाइना और वियतनाम की हो सकती है। चाइना मलेशिया की हो सकती है। थाईलैंड की हो सकती है। और साथ ही साथ जो है नॉर्थ कोरिया जो है साउथ कोरिया के ऊपर हमला कर सकता है। नर्थ कोरिया जापान के बीच में हो सकता है। यानी दूसरे लफ्जों में बहुत बड़े पैमाने पर दुनिया जो है बड़े अजीबोगरीब माहौल में है

Ques—जब इतने देश एक दूसरे से युद्ध करने पर आतुर हैं तो इन सबका कोई ना कोई तो कॉमन इंटरेस्ट जरूर होगा?

Ans — कॉमन इंटरेस्ट दो तरह से है एक तो एक्सपिज्म मतलब विस्तारवाद , जैसे की रशिया जो यूक्रेन के ऊपर हमला कर रहा है उसका मकसद विस्तारवाद ही है। रशिया मोलदाविया के ऊपर के भी हमला करके उनको भी अपने देश में मिला सकता है, चाइना का ताल्लुक है, चाइना भी विस्तारवादी नीतिओं में बिलीव करता है ,जहां तक फिलीपींस का ताल्लुक है वहां पे वो फिशरीज को लेकर ऑयल को लेकर, गैस को लेकर और रेयर अर्थ को लेकर और मिनरल्स को लेकर उसपर हमला करना चाहता है, मतलब एक तरफ विस्तारवाद और दूसरी तरफ एनर्जी को हथियाने के लिए तमाम देश आपस में भिड़ रहे हैं या भिड़ने को तैयार बैठे हैं, अगर आप देखो वेनेजुएला में ड्रग्स तो एक किस्म से बहाना था,असली कारण था वेनेजुएला का ऑयल , जी जी ईरान के ऊपर भी हमला होता है तो ईरान इज़ द थर्ड लार्जेस्ट ऑइल प्रोड्यूसर इन द वर्ल्ड और उसके उसकी एनर्जी के ऊपर क्रिटिकली डिपेंड करते हैं ,सो सबसे बड़े कारण यही दो है। वन इज एनर्जी, सेकंड इस एक्सपेंशनिज्म यानी विस्तारवादी नीतियां।

Ques — अब जो रिपोर्ट्स सामने आ रही है उसमें कहा जा रहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर आक्रमण किया और उसके एक भी सैनिक नहीं मारा गया जबकि वहां वेनजुएला के 100 के करीब सैनिक मर गए। क्योंकि कहा जा रहा है कि अमेरिका ने बिल्कुल लेटेस्ट टेक्नोलॉजी यूज़ की थी, क्या थी वो ?

Ans— उन्होंने हाई एनर्जी इस्तेमाल किया जिससे वेनजूएला के सैनिकों के कान के पर्दे फट गए, उनके कानों से खून निकलना शुरू हो गया। वोमिटिंग करना शुरू कर दिया। एंड विद इन सेकंड्स वो टेंपरेरी पैरालाइज हो गए। और उसी उनहीं तीन मिनट के अंदर अमेरिकी सैनिकों ने वहां के president को बंधक बनाया और अमेरिका ले गए। साथ ही अमेरिकी सेना ने बड़े हाईटेक इंटीग्रेटेड इस्तेमाल किया। साइबर सिक्योरिटी का, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का, इन वॉरफेयर का और ये तमाम लेटेस्ट टेक्नोलॉजीस का, स्पेस वेपन सिस्टम्स का चार्ज पार्टिकल वेपन्स का यह सारी की सारी टेक्नोलाजी का इंटीग्रेटेड किया जिसने दुनिया के जितने भी रेडार्स थे उनको ब्लॉक कर दिया जितने भी उनके काउंटर मेजर्स थे उनको इलेक्ट्रॉनिकली जाम कर दिया और माना यही जा रहा है कि अमेरिका इसी तरह की हाईटेक वॉर छेड़ेंगे ईरान के खिलाफ क्योंकि ईरान के पास काफी ज्यादा ताकत है ईरान, वेनेजुला नहीं है। ईरान 12 दिन की लड़ाई के बावजूद बड़े पैमाने पर अपने लॉसेस को रिकूप कर चुका है। चाइना और रशिया ने उनको हाइपरसोनिक मिसाइल दी है और कुछ और सीक्रेटली सहायता की है। अमेरिका तभी हमला करेगा जब उसको 100% कन्विक्शन हो जाएगा कि ईरान की तरफ से कोई भी बड़ी कारवाई उनके खिलाफ नहीं हो सकती। ना तो उनके बेसिस के खिलाफ ना उनके जवाब के साथ ना ही स्टेट ऑफ़ आर्मस के साथ।

Ques — अमेरिका के पास कहा जाता है कि इसी के कुछ सीक्रेट वेपन्स है। कुछ सीक्रेट हथियार है जिनके बारे में दुनिया के पास अभी जिक्र नहीं किया। रिपोर्ट यही कह रही है कि अमेरिका डिस्क्लोज़ नहीं करना चाह रहा कि कभी उसकी कोई कॉपी ना कर ले जो उसके पास सीक्रेट हथियार है, जो भी आपने युद्ध बताए 2026 में अगर वो होते हैं तो लेटेस्ट जो वेपन आएंगे उससे आपको लगता है कि जान माल का कम नुकसान होगा। बहुत जल्दी-जल्दी ये युद्ध जो है खत्म हो जाएंगे और बहुत जल्दी फैसला होगा?

ANS — रशिया के पास थी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी , इजराइल के पास भी थी लेकिन इजराइल और हमास का युद्ध दो साल हो गए खत्म नहीं हुआ उसी माफी की टेक्नोलॉजी रशिया के पास थी लेकिन उसके बावजूद युद्ध चार साल हो गए खत्म नहीं हुआ , दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि हाईटेक वॉर करे जो कम से कम चार पांच छ दिन में खत्म हो जाए और अमेरिका बड़े पैमाने पर इन्वॉल्व ना हो।

Ques — आपने कहा कि अमेरिका चाहता है कि हाईटेक युद्ध करे, और लंबे समय तक किसी के साथ इनवॉल्व ना हो, तो क्या और देश ये नहीं चाहते कि हाईटैक युद्ध करें क्योंकि आधुनिक हथियार सबके पास हैं, आपने बताया कि चाइना के पास भी रशिया के पास भी इंडिया के पास भी इस तरह के हाईटेक हथियार है तो और देश की स्ट्रेटजी ऐसी नहीं रहती है जो अमेरिका की है कि जल्दी से खत्म हो जिससे ज्यादा नुकसान ना हो देश का?

Ans — अमेरिका का इस साल का डिफेंस बजट जो है 66% मोर देन द प्रीवियस इयर्स और बाकी जो अमेरिका को छोड़ के बाकी जो नेक्स्ट 10 देश है इंक्लूडिंग रशिया चाइना इंडिया वगैरह इजिप्ट वगैरह उन सबका डिफेंस बजट मिला के अमेरिका का अकेले का ज्यादा है। तो अमेरिका इतने बड़े पैमाने पर पैसा खर्च करता है अपने डिफेंस को मॉडर्नाइज करने के लिए अपने डिफेंस में ऐसी नई टेक्नोलॉजी टेक्निक्स लाने के लिए लेकिन दूसरे देशों की इक्नामी हथियारों के निर्माण पर इतनी अफोर्ड नहीं कर सकती।अमेरिका की हमेशा कोशिश है कि किसी प्रकार से इनवॉल्व ना हो लड़ाई में। वो अपने ट्रुप्स को किसी प्रकार से नहीं उतारेगा। क्योंकि अगर आप देखो उसने वियतना में ट्रुप्स उतारे हार गया। इराक में बहुत बड़े पैमाने पर बॉडी बैग्स गए और बाद में अपनी इज्जत बचा के भागा। 16 साल अफगानिस्तान में, उनके देशवासी एक्सेप्ट ही नहीं करेंगे अगर अब ऐसा होता है। इसलिए वो जितनी भी युद्ध करेंगे हवाई जहाजों के माध्यम से मिसाइल्स के माध्यम से और आधुनिक हथियारों से करेंगे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *