आकाश आनंद के यह बोल बहनजी का गुस्सा सातवें आसमान पर

बुआ मायावती ने अपने वारिस, अपने चाहते आकाश आनंद को पार्टी से निकाल दिया यह न्यूज चर्चा का विषय बनी हुई है पर इससे भी ज्यादा एक और बात निकल कर सामने आ रही है कि आकाश आनंद के एक भाषण से मायावती इतनी नाराज हो गई कि उन्होंने एक ही क्षण में आकाश को पार्टी से निकालने का फैसला कर डाला. जी हां और यही भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें आकाश ने किसी का नाम लिए बिना कह दिया था कि कईं नेताओं के चलते पार्टी में काम करना मुश्किल हो गया है, बस माना यही जा रहा है कि बहुजन समाजवादी के कद्दावर नेताओं पर किया गया तंज आकाश को भारी पड़ गया क्योंकि बहनजी अब पार्टी में गिने चुने बचे नेताओं को नाराज नहीं करना चाहती थी इसलिए आकाश को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। वैसे आपको बता दें कि आकाश ने साफ कहा था कि हमारे कार्यकर्ता पार्टी के करंट स्‍ट्रक्‍चर को लेकर थोड़े परेशान हैं।उन्होंने कहा था कि अभी पार्टी का स्‍ट्रक्‍चर ऐसा बना हुआ है कि कुछ गलत लोग ऐसे बैठे हुए हैं कि उनको अभी हम छेड़ नहीं सकते। उनको हम हिला नहीं सकते। पर वे हमसे बड़े हैं और कई जगह गलत हैं पर हम उनको नहीं छेड़ेंगे, आकाश आनंद ने साफ कहा कि कुछ पदाधिकारी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं और माना यही जा रहा है कि बस यही सब बातें मायावती को अखर गई

 

लालू तेजस्वी क्या अब नहीं चाहते यादव-मुसलमानों का साथ

जनता बिहार में चुनाव से पहले क्या लालू यादव की पार्टी मुस्लिम- यादव के अपने उपर लगे ठप्पे से दूर जाने की फिराक में है, यह बात आजकल बिहार की राजनीती में तेजी से फैल रही है क्योंकि जिस तरह से तेजस्वी और लालू आने वाले चुनाव को लेकर रणनीती बना रहे हैं , उससे यह बात उभर कर सामने आ रही है कि RJD ना केवल सोशल इंजीनियरिंग पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर हो रही है, बल्कि अपनी छवि बदलने की भी पूरी कोशिश कर रही है , पता चला है कि लालू अब अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और दलितों वोटरों को लुभाने की कोशिशों में लगे है। क्योंकि पिछले कुछ सालों से मुस्लिम-यादव का Combination RJD को जीत दिलवाने में सफल नहीं हो पा रहा है, इसलिए एक बार फिर तेजस्वी और लालू अपने खोए वोट बैंक को वापस लाने की पूरी कोशिश में हैं। दूसरी तरफ यह भी पता चला है कि इस बार RJD जाती वोट बैंक के साथ साथ बिहार के विकास की बात भी कर रही है और बाकायदा और बिहार के विकास के लिए रोडमैप बनाया जा रहा है और तेजस्वी यादव लगातार कल्याणकारी योजना की घोषणा कर रहे हैं।

 

राहुल के दो सितारे बदल देंग बिहार का गणित

बिहार में कांग्रेस के कृष्णा और कन्हैया दोनों नेताओं ने ना केवल यहां चुनाव से पहले ढीली पड़ी कांग्रेस में जाने डाल दी है पर साथ ही बीजेपी के साथ लालू और तेजस्वी की नींदे भी गायब कर दी हैं, वैसे साफ है कि कांग्रेस के बिहार में इतना ज्यादा एक्टिव होने से सबसे ज्यादा नुकसान उसके पाटनर RJD को ही हो रहा है क्योंकि अब सीटों को लेकर कांग्रेस किसी भी तरह से compromise करने के मूड में नहीं हैं, अब सोच ही रहे होंगे कि कौन हैं ये कृष्णा और कन्हैया जो बिहार में होने वाले चुनाव की रणनीती ही बदलने में लगे हैं। कृष्णा यानी कृष्णा अल्लावरू को हाल ही में कांग्रेस ने चुनाव प्रभारी बनाया है और आते के साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि वह RJD के किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे और कांग्रेस RJD की ‘बी’ टीम नहीं है। उन्होंने यह तक कह दिया कि अगर बात नहीं बनी तो वो अकेले चुनाव में उतर जाएंगे। दूसरी तरफ एनएसयूआइ के राष्ट्रीय प्रभारी और कांग्रेस के युवा कांग्रेस नेता डॉ. कन्हैया कुमार ने भी कह दिया की अगर RJD सम्मान के साथ शर्त मानेगी, तभी कांग्रेस RJD के साथ गठबंधन करेगी, नहीं तो कांग्रेस बिहार की 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी इस बार बिहार को लेकर काफी सजग हैं और बार बार बिहार का दौरा कर रहे हैं , और ये दोनों नेता राहुल की सोच और उनके नक्शे कदम पर ही चल रहे हैं।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।