Bihar —क्या 20 लाख मरे हुए लोग वोट डालेंगे

क्या किसी चुनाव में मरा हुआ व्यकित वोट डालने आ सकता है या फिर ऐसा व्यकित जिसका घर बार, काम के बारे में कोई पता ही ना हो और वो पूरी तरह से invisible होकर काम कर रहा है, आपको लग रहा होगा कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं , पर ये हम नहीं चुनाव आयोग के चौकाने वाले आंकड़े बता रहे हैं और इन्ही को लेकर चुनाव आयोग जमकर तेजस्वी और कांग्रेस को सुना रहा है। दरअसल बिहार में चल रहे मतदाता सूची revision list अभियान के तहत पता चला है कि वोटर लिस्ट में 20 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल हैं जो मर चुके हैं , यही नहीं मौजूदा मतदाता सूची में एक लाख ऐसे मतदाता भी पाए गए हैं जिनका कोई अता पता ही नहीं है मानों अदृश्य हो गए हैं। बस इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव और कांग्रेस के कईं नेताओं को घेरना शुरू कर दिया है, आयोग का कहना है कि क्या विपक्ष चाहता है कि बिहार में फर्जी वोटर सक्रिय होकर वोट डालें, आयोग ने यह तंज तेजस्वी के उस बयान के बाद कसा है जिसमें तेजस्वी नईं वोटर लिस्ट के विरोध में चुनाव बहिष्कार की बात कह रहे हैं। आयोग के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि लगभग 26 लाख लोग बिहार से स्थाई रूप से जा चुके हैं मतलब किसी और जगह हमेशा के लिए स्थानांतरित हो गए हैं।वोटर्स के बारे में इस तरह के सच्चाई सामने आने पर चुनाव आयोग विपक्ष पर और ज्यादा आक्रमक हो गया है आयोग ने कहा है कि भारत का संविधान भारतीय लोकतंत्र की जननी है। क्या हमें कुछ लोगों के बहकावे में आकर संविधान के खिलाफ जाकर फर्जी वोट डालने का रास्ता बनाना चाहिए?

 

Modi सरकार की क्या हो गई किरकिरी-उनके राज में यह क्या हो गया

कल तक उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के कामकाज पर सवाल करने वाली कांग्रेस पार्टी अब खुलकर धनखड़ के बचाव में सामने आ गई है और लगातार उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील कर रही है , इससे और किसी को नहीं बल्कि मोदी सरकार को परेशानी आ सकती है क्योंकि कांग्रेस के पास धनखड़ इस्तीफ के रूप में सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका मिल गया है। वैसे विपक्ष तो छोड़िए सत्ता पक्ष के कईं नेता भी धनखड़ के अचानक हुए इस्तीफ से हैरान हो गए हैं। देश में यह पहली बार हो रहा है कि जब किसी बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने अचानक इस्तीफा दे दिया है और यह बात मोदी सरकार के खिलाफ ही जा रही है क्योंकि उनके राज में ऐसा हुआ है. छन छन कर धनखड़ के इस्तीफे की कई वजह सामने आ रही हैं पहली BJP हाई कमान धनखड़ से नाराज चल रही थी और इसकी वजह थी कि धनखड़ ने हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। यह भी कह जा रहा है कि धनखड़ इसलिए नाराज थे क्योंकि BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, सदन की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में नहीं आए थे।पर बात जो भी हो यह तो साफ है कि इसके पीछे health नहीं कुछ और ही वजह है और इससे मोदी सरकार की किरकिरी तो हुई है।

UP अखिलेश यादव – डिंपल की जोड़ी क्या भेद पाएगी योगी आदित्यनाथ का अभेद किला

हमेशा यह बात चर्चा में रहती है कि pm Modi को तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनाने में देश की आधा आबादी यानी महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है और शायद यही काऱण है आजकल जो भी चुनाव होते हैं उसमें हर दल महिलाओं को रूझाने का पूरा दमखम लगा देता है, अब बात करें उत्तर प्रदेश की तो आजकल सरकार के साथ साथ विपक्षी दल भी अभी से महिलाओं को रूझाने का प्लान बना रहे हैं, जीं हां यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसके लिए सता में बैठी बीजेपी के साथ राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी यानी समाजवादी पार्टी ने भी महिला वोटर्स को अपने पाले में करने की कवायद शुरू कर दी है। पर सवाल यही उठ रहे हैं कि योगी के राज में क्या अखिलेश महिलाओं को अपने पाले में कर पाएंगे क्या उनके लिए ये राहे इतनी आसान होंगी। अखिलेश के साथ अच्छी बात यही है कि उनकी पत्तनी और सांसद डिंपल यादव महिला वोटर्स को समाजवादी पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं पर क्या दोनों की जुगलबंदी योगी की महिलाओं को दी जाने वाली तमाम सुविधाओं को बेध कर महिला वोटर्स तक पहुंच पाएगी आपको बता दें कि इस समय योगी सरकार महिलाओं के लिए करीब 8 ऐसी योजनाएं चला रही है जो यूपी की सुरक्षा देती हैं, काम देती हैं और उनका विकास करती हैं। जैसे की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मिशन शक्ति योजना, 181 महिला हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, महिला समृद्धि योजना हैं और अब इसी क्रम में योगी सरकार ने महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर विशेष छूट का एलान करके अपनी महिला वोटर्स को और ज्यादा मजबूत कर लिया है। योगी सरकार ने फैसला लिया है कि 1 करोड़ रुपये तक का मकान, जमीन यदि किसी महिला के नाम खरीदी जाती है, तो उस पर स्टाम्प शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट मिलेगी। अब तक यह छूट केवल 10 लाख रुपये तक की संपत्ति पर ही लागू थी. वैसे यह तो माना जाता है कि एनडीए की महाराष्ट्र में जीत का बड़ा कारण लाडली बहिण योजना रही, वहीं इससे पहले मध्य प्रदेश में भी बीजेपी की जीत में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं ने बड़ा रोल निभाया था।अब यूपी में यही देखना है कि अखिलेश और डिंपल की जोडी क्या योगी का महिला वोटर्स का बनाया गया एक पूरा किला तोड़ने में सफल हो पाते हैं या नहीं ।

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