Punjab — BJP चाहती बिहार की तरह जीत का रथ
बिहार में बीजेपी की जबरदस्त जीत के बीच पंजाब में बीजेपी को करारा झटका मिला और वह ना केवल तरन तारन सीट पर हुए उपचुनाव हार गई पर साथ ही चौथे नंबर पर भी नहीं पहुंच गई। आपको बता दें कि पंजाब में BJP की हालत दिन प्रतिदिन बदतर ही हो रही है, जब नवंबर 2024 में पंजाब में उपचुनाव हुए थे तब भी बीजेपी को बड़ी हार मिली थी, चारों सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर भी नहीं पहंच पाए और तीसरे नंबर पर रहे , फिर जून 2025 में जब लुधियाना पश्चिम सीट पर हुए उपचुनाव हुए तो भी BJP को हार मिली। पर हां बिहार की जीत ने बीजेपी में एक बार फिर जरूरत से ज्यादा उत्साह भर दिया है और पता लगा है कि पंजाब में 2027 में होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी अभी से तैयारी में लग गई है और इन सब के बीच एक बड़ी चर्चा फिर खड़ी हो गई है कि क्या बीजेपी फिर से अकाली दल का हाथ थाम सकती है। इसके पीछे की बड़ी वजह यही है कि जब से अकाली और बीजेपी अलग अलग हुए हैं, दोनों ही पंजाब में अपनी जगह नहीं बना पाए हैं। दोस्ती टूटने के बाद दोनों को ही राज्य के चुनावों में लगातार हार मिल रही है।
अकाली दल और BJP दोनों ही चाहते मिलन पर कुछ अड़चन

आपको बता दें कि पंजाब में 2007 से 2017 तक बीजेपी और अकाली दल ने सफलतापूर्वक सरकार चलाई पर 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने NDA से मुंह मोड़ लिया था और इसी के साथ दोनों का पंजाब में राजनीतिक भविष्य भी हाशिये पर ही पहुंच गया। पर अब बिहार की जीत के बाद बीजेपी पंजाब में भी जीत हासिल करने का आतुर है और फिर से अपने पुराने सहयोगी अकाली दल के साथ रिश्ता जोड़ने की सोच रही है, पर ये राह भी आसान नहीं है क्योंकि BJP के अंदर ही इसपर नेताओं की अलग-अलग राय है। कुछ अकाली दल के साथ गठबंधन को जरूरी बता रहे हैं और कुछ इसके बिल्कुल खिलाफ है, भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ हमेशा ही गठबंधन की बात करते हैं वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी गठबंधन की जरूरत नहीं समझते। और इन सब के बीच हाल ही में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी साफ कह दिया कि BJP पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कह दिया कि BJP अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है, वहीं अकाली दल के कुछ नेताओं को भी यह डर सता रहा है कि BJP के साथ गठबंधन होने पर कहीं उसके वोटर किसान नाराज न हो जाएं।उनका मानना है कि किसान आंदोलन के दौरान BJP का जो कड़ा रुख था, उसकी वजह से कहीं सिख जाट वोटर अकाली दल से ही ना किनारा कर लें। पर जानकार साफ मान रहे हैं कि अगर पंजाब में अकाली दल और BJP एक बार फिर साथ आते हैं तो आने वाले चुनाव में AAP और कांग्रेस दोनों को हरा सकते हैं। अब चर्चा यही है कि जीत के घोडे पर सवार बीजेपी को पंजाब में जीत पाने के लिए अगर ये करना पड़ेगा तो क्या वो इसे करेगी क्योंकि कोई भी पार्टी अपने जीत के रथ को रोकना नहीं चाहेगी।
