RSS के खिलाफ विदेश में साजिश कौन है इस बार मास्टर माइंड
अमेरिका के न्यूज़ पेपर न्यूयॉर्क टाइम्स ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर एक बड़ा सा लेख लिखा है और उस लेख में जिस तरह के तर्क प्रस्तुत किए हैं वो सारे के सारे तर्क या तो बासी हैं या वो सच्चाई से कोसों दूर हैं। अब ये जो पूरा का पूरा मामला है ये एक योजनाबद्ध तरीके से RSS को, संघ के खिलाफ उसको बदनाम करने की या संघ के खिलाफ एक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश है जो लंबे समय से चल रही है वहां के विश्वविद्यालयों में एकेडमिया में मीडिया में ये किया जाता है। अब उसमें जो भी तर्क दिए गए हैं उन तर्क है वह यही कि बड़ा क्लोज ऑर्गेनाइजेशन है संघ, संघ से चीजें रेडिकल ऑर्गेनाइजेशन है एक्सट्रीम राइट है
लगातार जानबूझकर बदनाम किया जाता है महात्मा गांधी को लेकर

उसके अलावा घूम फिर करके गांधी महात्मा गांधी की हत्या के पीछे संघ को जोड़ने की कोशिश की जाती है। जो मामला लगभग छह सात दशक पहले ही सेटल हो गया। संघ से ना संघ का महात्मा गांधी की हत्या में कोई भूमिका नहीं थी। इसको लेकर के कपूर कमीशन की रिपोर्ट है। इसको लेकर के अदालतों का निर्णय आ गया है। लेकिन ये एक नया एजेंडा चलाया जाता है और ये एजेंडा भारत में के बहुत सारे राजनीतिक दल उसको हवा देते रहते हैं अपने राजनीतिक फायदे के लिए और यहीं से जो है मामला उठाया जाता है। लेकिन इन सब के बावजूद क्योंकि संघ के 100 साल पूरे हुए हैं और संघ अपना 100 साल का सेलिब्रेशन ना केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में मना रहा है और उसको इस मामले में बहुत समर्थन भी मिल रहा है। उसका विस्तार भी हुआ है। लेकिन यह जो प्रोपेगेंडा है चाहे न्यूयॉर्क टाइम्स का हो चाहे बाकी और किसी अखबार का हो यह चलता रहता है। जहां पर संघ की क्रेडिबिलिटी को क्वेश्चन किया जाता है। एक और तर्क दिया जाता है कि संघ बहुत क्लोज्ड ऑर्गेनाइजेशन है। जबकि इसका सबसे बड़ा उत्तर यह है कि कोई भी व्यक्ति संघ की शाखा में जा सकता है इरिस्पेक्टिव ऑफ उसका धर्म- जाति और वो वहां भारत की बात करते हैं। ये सारी चीजें बहुत स्पष्ट तौर पर हैं। लेकिन यह प्रोपेगेंडा ग्लोबल एजेंडा है जो हिंदुत्व को हार्म करने के लिए किया जाता है। यह जारी रहेगा।
क्या सोनिया गांधी का रणनीती पर पानी फेर रहे हैं अधीर रंजन चौधरी

अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में पिछली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। अधीर रंजन चौधरी ने एक बार टीएमसी पर फिर हमला बोला है। वो लगातार टीएमसी पर हमला बोल रहे हैं और यह कांग्रेस के लिए एक मुश्किल का विषय है। इसलिए कि टीएमसी आईएडीआई अलायंस का हिस्सा है और इस साल ही दो महीने या तीन महीने के अंदर पश्चिम बंगाल में चुनाव होने जा रहे हैं। अब उन परिस्थिति में क्या अधीर रंजन चौधरी का हमला बोलना टीएमसी पर वो कितना उचित है कितना अनुचित है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किस विषय पर हमला कर रहे हैं। अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि जो तृणमूल कांग्रेस है वह वोट चोर नहीं है। वह वोट डकैत है। मतलब ये कि उनके ही नेता राहुल गांधी ने जो अ आरोप लगाया है भारतीय जनता पार्टी के ऊपर वोट चोरी का उस वोट चोरी से आगे जाते हुए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर वोट डकैती का आरोप लगाया और यह बताया कि चाहे म्युनिसिपल इलेक्शन हो, लोकल बॉडी इलेक्शंस हो, असेंबली इलेक्शंस हो, लोकसभा इलेक्शंस हो, लोगों को वोट नहीं डालने दिया जाता है। लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। लोगों को नॉमिनेशन फाइल नहीं करने दिया जाता है और जो लोग नॉमिनेशन फाइल करने की कोशिश करते हैं उनको उन पर हमला किया जाता है। जो उनकी बात को समर्थन नहीं करते हैं। उनके राजनीतिक विचार को नहीं समर्थन करते हैं। उन पर प्री पोल ड्यूरिंग द पोल और पोस्ट पोल हमला किया जाता है। यह अपने आप में एक बड़ा वो है जिसको लेकर के कांग्रेस की जवाबदेही बनती है। कांग्रेस की हालांकि कांग्रेस के नेता अभी बड़े नेता जो है फर्स्ट फैमिली जो है वह विदेश यात्रा पर हैं। लेकिन यह जो इस तरह का हमला है तृणमूल कांग्रेस पर वो अलायंस के लिए तो वो अलायंस करेंगे नहीं। लेकिन उसका जो नुकसान है कि क्या इसके कारण जो नाराज हिंदू और मुसलमान दोनों वोटर है वह कांग्रेस की तरफ जाएगा या हिंदू वोटर मान लीजिए कांग्रेस की तरफ नहीं जाएगा। तो क्या यह इस तरह की बयानबाजी मुस्लिम वोट में बंटवारा करेगी?
