राहुल गांधी के खिलाफ जो भी बोलेगा उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर लगातार एक के बाद एक हमले हो रहे हैं। अभी मणिशंकर अय्यर ने खुलकर कांग्रेस की पोल खोली है, और अब राहुल गांधी पर कांग्रेस सरकार के पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहीं नवजोत कौर सिद्धू जो नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। उन्होंने हमला बोल है और सीधे तौर पर यह बोला है कि जो गांधी नेहरू परिवार के उत्तराधिकारी हैं राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं वो नेतृत्व करने में अक्षम है। वो किसी तरह से नेतृत्व नहीं कर पा रहे हैं। यही मिलती जुलती बात जो है वो बहुत सारे लोगों ने कही थी। चाहे आप मनशंकर अय्यर की बात करें या बात करें गुलाम नबी आजाद की या कपिल सिब्बल की। इस तरह की बहुत सारी लंबी फहरिस्त है। उसको गिनाने का कोई मतलब नहीं है। सबसे बड़ी समस्या है कि राहुल गांधी से अगर कोई नेता पार्टी के बारे में कुछ चर्चा करने के लिए मिलना चाहे तो उसको समय नहीं मिलता है। उसके बहुत सारे कारण हैं। उनके आसपास कोठरी से घिरे हुए हैं। ज्यादातर समय विदेशों में गुजरता है और गिने चुने लोगों की बात सुनते हैं। अब नवजोत सिंह सिद्ध नवजोत कौर सिद्धू को एक्सपेल कर दिया गया है पार्टी से और ऐसा ही मामला था मणिशंकर अय्यर को लेकर के कि वो पार्टी में है या नहीं है। इसलिए कि नवजोत कौर ने एक बार ये बात बयान दिया था। उसके बाद ही उनको पार्टी से निकाला गया था कि जो कांग्रेस है वहां मुख्यमंत्री का पद जो है वो बिकाऊ है और मुख्यमंत्री अगर आप किसी नेता को भी बनना है तो उसको 500 सौ करोड़ चाहिए। 500 करोड़ के बिना कोई आदमी मुख्यमंत्री नहीं बन सकता है। इसके कारण बहुत विवाद उठा था। उसके बाद उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी थी।
Bjp इस बार नहीं तो कभी नहीं की स्थिति में है बंगाल में

पश्चिम बंगाल में बहुत सारे डेवलपमेंट हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल के डेवलपमेंट में भारतीय जनता पार्टी इस बार कुछ इस तरह से अपनी तैयारियां कर रही है कि वह एक-एक सीट पर जो भी नाम आ रहे हैं उनको लेकर के और उन सीटों पर जो कौन दावेदार हो सकता है? दो तरह के। एक जो तीन चार पांच नाम पहले राउंड में आएंगे। फिर उसके बाद उनसे तीन नाम सिलेलेक्ट किए जाएंगे। एक तो इस तरह से कि यह नाम कितना उचित है? कितना कारगर होगा? जीतने में इसकी कितनी भूमिका होगी? कितना संभावना जीत के रखता है? एक दूसरा ये कि खुला मैदान कौन सा ऐसा व्यक्ति है जो वहां पर चुनाव बेहतर कर सके। इसको लेकर के सर्वे कर रहा है। हालांकि बीजेपी का कई राष्ट्र राज्यों में किया जा रहा है। जहां-जहां भी चुनाव हैं और यह कई राउंड होगा। लेकिन अभी पश्चिम बंगाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, पश्चिम बंगाल की उन सीटों पर जहां पर संभावनाएं हैं मतलब वो कैटेगराइज करते हैं ए बी सी और डी तो डी पर तो वो फोकस ही नहीं करेंगे उनको चुनाव में हो सकता है कैंडिडेट खड़ा कर दें सिर्फ उसके लिए लेकिन जो ए जो बी कैटेगरी और सी कैटेगरी की सीटें हैं उनमें ज्यादा फोकस होता है और वहां पर नाम को लेकर के कौन व्यक्ति मजबूत दावेदार हो सकता है? कौन ऐसा है जो छुपा रुस्तम निकल सकता है? सरप्राइज कर सकता है। बहुत सारे कैंडिडेट्स या बहुत सारे नेता ऐसे होते हैं जिनका अपना व्यक्तिगत भी समर्थन का बड़ा एक दायरा होता है। क्या इस दायरे में इस तरह के दायरे वाले कितने नेता हैं? उन सबको वो कर रही है और यह सारे जो सर्वे होंगे चुनाव डिक्लेअ के बाद और चुनाव डिक्लेअ होने तक और टिकट की घोषणा तक उन सारे सर्वेज़ को मैच किया जाएगा। इस तरह की भी बात कही जा रही है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी मदद लेकर के मैच किया जाएगा कि कौन मोस्ट एप्रोप्रियट जो है वो अह कैंडिडेट हो सकता है किसी भी विधानसभा सीट के लिए। इसलिए कि इस बार का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए ना केवल महत्वपूर्ण है बल्कि करो या मरो जैसी स्थिति है। इस बार नहीं तो कभी नहीं वाला स्थिति है और वैसा ही हाल कमोबेश ममता बनर्जी का है। अब बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बाद सीधे ममता बनर्जी पर फोकस करते हैं। और इस बार बंगाल की नहीं बात करेंगे इस ममता बनर्जी को लेकर के। ममता बनर्जी के बड़े प्रभाव क्षेत्र या प्रभाव या दायरे की बात करेंगे।
इंडी गठबंधन का मुखिया बनाया जाए ममता बनर्जी को किसका है यह सुझाव

अभी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने एक बयान दिया कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जो आईएडीएआईए है उस अलायंस को लीड करना चाहिए। वो राहुल गांधी से बेहतर नेता हैं। अब इसके इसके इसके पीछे बहुत सारे कारण है , उसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीजेपी को कोई भी राजनीतिक दल अगर डिसाइसिवली चैलेंज कर पा रहा है और कोई भी दल और नेता डिसाइसिवली चैलेंज कर पा रहा है और जो ये कहावत कही जाती है तू डाल डाल में पातपात तो वो ममता बनर्जी हैं। एसआईआर को लेकर के चाहे मामला रहा हो चाहे वह वक्फ को लेकरके मामला रहा हो चाहे वो पश्चिम बंगाल की किसी और कोई और इशू हां चाहे वो सीबीआई के रेड का मामला रहा हो, करप्शन का मामला रहा हो चाहे अभी जो आईपैक का जो मामला था उस सब मामले में जिस तरह से ममता बनर्जी पूरी जुझारू तरीके से भारतीय जनता पार्टी के साथ लड़ती हैं। वह ही बताता है कि वो अगर भाजपा से कोई भी राजनीतिक दल लीड कर वो कर सकता है तो ममता बनर्जी एक बात तो हुआ। दूसरा महत्वपूर्ण बात यह है कि संसाधनों को लेकर के उनके चाहने वाले उनके प्रवक्ताओं का भी यह मानना है कि संसाधनों के स्तर पर भी अगर भारतीय जनता पार्टी से कोई डील कर सकता है तो वो ममता बनर्जी डील कर सकती हैं। मतलब ये कि अब सबको मालूम है कि जो कॉरपोरेट बॉन्ड्स थे उसमें भारतीय जनता पार्टी के बाद ममता बनर्जी को दूसरे नंबर पर फंडिंग मिली थी। तीसरा जो बात कही जा रही है वो ये कि ममता बनर्जी की एक ऐसी छवि है कि वो ईमानदार हैं। उनके पास मतलब बहुत लैविश लाइफ नहीं जीती हैं। अब ये कुछ लोगों के लिए विवादित हो सकता है। लेकिन ऐसा जो चौथी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह एक महिला हैं और उनको महिला प्रधानमंत्री के तौर पर अगर प्रोजेक्ट किया जाएगा तोइसका बेनिफिट आईएडीआई को हो सकता है। इस तरह की बातें निकल कर के आ रही हैं। तो ये जो विषय है उसको लेकर के ही बात सामने आ रही है। अब इस पर कितना आईएडीआई यानी इंडी गठबंधन के नेता अपनी हां भरते हैं , इसपर प्रश्न है, इसलिए कि आईएडीआईए में बहुत विरोधाभास है। बहुत सारे लोग राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर के असंतुष्ट हैं। मतलब अगर आप उसकी बात करें तो जम्मू कश्मीर से लेकर के केरल और तमिलनाडु तक जो राहुल का नेतृत्व और कांग्रेस की नीतियां जो हैं वो बहुत असंतुष्ट करने वाली है। उस पर बहुत सारे लोग बयान भी दे रहे हैं। चाहे वो शिवसेना हो, चाहे वो उमर अब्दुल्ला हो, चाहे वो तमिलनाडु या केरल के नेता हों, यह सारी चीजें निकल कर के आ रही हैं।
