योगी का डंडा चल गया कहां जाएंगे संभल के दोषी

यूपी के संभल में जबरदस्त हिंसा और उपद्रव करने वालों की अब बिल्कुल खैर नहीं है क्योंकि योगी ने इनको लेकर अपने तेवर काफी कड़े कर लिए हैं और जल्द ही इन्हें पहचान कर, पोस्टर लगाकर ना केवल उन्हें जेल भेजने की तैयारी है बल्कि उपद्रवी लोगों ने जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था उसका पूरा खर्चा इन्हीं लोगों से वसूल करने की शुरूआत हो चुकी है। योगी ने बिल्कुल साफ कह दिया है कि किसी को अराजकता फैलाने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में योगी ने उन्हें पूरी खुली छूट दे दी है कि अपराघियों से पूरी सख्ती से निपटे। आपको बता दें कि हाल ही में मस्जिद में कराए जा रहे सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी और बहुत से लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। बाद में माहौल और बिगड़ गया। खैर योगी के इस कदम से उन लोगों में तो डर बैठेगा जो ना केवल हिंसा करते हैं बल्कि देश की प्रापर्टी का बड़ा नुकसान करने से भी बाज नहीं आते ।

क्या महाराष्ट्र में योगी को डाउन साइज करने की कोशिश

महाराष्ट्र में बीजेपी जीत का बहुत योगदान यूपी के मुख्ममंत्री योगी का माना जाता है। यहां जीत के लिए योगी आदित्यनाथ ने चार दिन में 11 जनसभाओं को संबोधित किया, 18 विधानसभा क्षेत्रों में उनकी रैलियां हुईं और पूरे 17 क्षेत्रों में जीत मिली। तो योगी का जीत स्ट्राइक रेट 95 प्रतिशत रहा। योगी ने इन रैलियां में उन्होंने कुल 23 उम्मीदवारों को जिताने की अपील की थी जिसमें 20 जीत गए और इस दौरान योगी का ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ स्लोगन पूरे चुनाव में छाया रहा। पर अब लगता है कि महाराष्ट्र के नए बने सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस नारे से अपनी दूरी बना ली है। उन्होंने जीत का क्रेडिट पीएम मोदी के एक हैं तो सेफ हैं के स्लोगन को दिया और कहीं भी अभी तक बंटेंगे तो कटेंगे का जिक्र नहीं किया । उन्होनें अपने बयान में भी साफ कहा की सरकार दलित, ओबीसी के साथ अल्पसंख्यकों का भी ख्याल रखेगी। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई कि क्या फडणवीस ने क्या जानबूझकर योगी आदित्यानाथ का जिक्र नहीं किया। जिसने महाराष्ट्र जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई है। जानकारों का मानना है कि यह नारा निगेटिव है जबकि पीएम मोदी का एक हैं तो सेफ हैं नारा पॉजिटिव मैसेज देता है और फडणवीस अपने कार्यकाल में किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं। यह भी माना जा रहा की फडणवीस ने योगी के नारे को क्रेडिट देकर न सिर्फ केंद्रीय नेताओं को खुश किया बल्कि योगी को भी डाउन साइज करने की कोशिश की है।

दो जाट नेताओं ने बीजेपी आलाकमान की नींद उड़ाई

जिस तरह से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं उससे चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या अब धनखड़ भी जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक की राह चल रहे हैं । सत्यपाल मलिक ने कृषि कानूनों को लेकर पीएम मोदी को अहंकारी तक बता दिया था। मलिक ने यह तक कह दिया था कि वह किसानों के मुद्दे पर पीएम मोदी से मिलने गए थे पर उनकी पीएम मोदी से लड़ाई हो गई।और अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी कृषि मंत्री शिवराज चौहान से किसानों को लेकर तीखे सवाल कर लिए हैं। उन्होंने कह दिया कि किसान आंदोलन करते जा रहे हैं आखिरकार उनसे सरकार की बात क्यों नहीं हो पा रही। धनखड़ ने कहा कि किसान संकट में हैं और आंदोलन कर रहे हैं। यह स्थिति देश के समग्र कल्याण के लिए अच्छी नहीं है। वैसे अभी कुछ समय पहले जब धनखड़ का झुक झुक कर पीएम मोदी को नमस्कार कर रहे थे तो उनका यह वीडियो बहुत वायरल हुआ था और विपक्ष ने इसका मजाक उड़ाते हुए इसे संवैधानिक पद का अपमान बताया. इसपर धनखड़ ने विपक्ष को आड़े हाथों लेकर कहा था कि यह उनके जाट और किसान संस्कार हैं । अब यही जाट नेता किसानों के हित के लिए बेध़डक होकर मोदी सरकार से भी भिड़ गया है। इसलिए चर्चा यही है कि सत्यमलिक और अब धनखड़ का ये दोनों जाट नेता बीजेपी को मुश्किल में डाल सकते हैं।

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