क्या कारण जो नीतीश चाह कर भी नहीं बदल सकते अब पाला

दिल्ली के बाद बिहार के विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं लेकिन उसके पहले बिहार में सभी राजनीतिक दल या जो भी संगठन है , चुनाव में जिनकी सक्रिय भूमिका होती है, वह अपने अपने समीकरण दुरुस्त कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी से लेकर के राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, जेडीयू और बाकी छोटे छोटे दल सक्रिय हो गए हैं। इन सभी इन सबके बीच एक नया फोर्स आया है, नए नेता के रूप में वो हैं प्रशांत किशोर। पर इन सब के बीच एक बड़ी खबर जो बार बार सुर्खियां बटोर रही हैं वो है क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पाला बदल सकते हैं और उसके लिए बहुत सारे कारण दिए जा रहे हैं। नए साल की बधाई या लालू प्रसाद यादव का इन्विटेशन। लेकिन क्या लालू के साथ एक बार फिर नितीश जाएंगे । नीतीश कुमार कहीं नहीं जा रहे हैं वह इसी अलायंस के साथ चुनाव लड़ने वाले हैं इसलिए कि उनको मालूम है कि वहां जाने पर उनको उनका वोट जो है वो ट्रांसफर यादव वोट इधर नहीं होता है तो उनके लिए मुश्किल वाली स्थिति है दूसरा यह कि कि अगर वो अभी सरकार से दूरी अभी वो एनडीए का साथ छोड़ते हैं तो उनके पास बहुत कुछ प्रॉमिस करने के लिए है चुनाव के लिए, वह बिना केंद्र सरकार की मदद से वह कुछ नहीं कर पाएंगे और चुनाव लड़ना उनके लिए मुश्किल होगा दूसरा फैक्टर तीसरा फैक्टर यह कि एक बार फिर जाने पर पाला बदलने पर इमेज का नुकसान होगा और शायद इस बार इमेज का नुकसान उनको बड़ा हो । एक फैक्टर यह भी है कि नीतीश कुमार एनडीए के साथ एक कंफर्टेबल स्थिति है और अगर ऐसी स्थिति आती है जब मुख्यमंत्री में भी अगर बदलाव करने की जरूरत होती है तो नीतीश कुमार को एक इस तरह का असाइनमेंट गवर्नर के तौर पर मिल सकता है कि वो एक कंफर्टेबल स्थिति में रहेंगे । तो कुल मिलाकर के ये जो अभी स्थिति है सब अपने अपने दांव खेल रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार अब पलटी मारेंगे ऐसा लगता नहीं है।

केजरीवाल का शीशमहल क्या मोदी के महल से भी महंगा

चुनाव आयोग ने जैसे ही दिल्ली में चुनाव की तारीख घोषित की सभी चुनावी दल दिल्ली में प्रचार प्रसार करने के लिए जबरदस्त सक्रिय हो गए हैं, जहां बीजेपी इस बार हर हाल में चुनाव जीतकर अपना 27 साल का वनवास खत्म करना चाहती है वहीं केजरीवाल भी चौथी बार दिल्ली की गद्दी पाने और एक रिकार्ड बनाने के लिए बेताब हैं। वहीं कांग्रेस भी अपनी राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। और ऐसे में तीनों पार्टियां ही अपने उपर लगे आरोपों को defend करने का पूरा प्रयास कर रही हैं जिससे जनता के बीच अपनी छवि को सुधार सकें । इसमें आम आदमी पार्टी सबसे आगे है क्योंकि पिछले कुछ सालों में उसकी छवि corruption मामलों में सबसे ज्यादा खराब हुई है खासतौर पर केजरीवाल को उनके शीशमहल जैसा घर बनाने के लिए लोगों ने काफी criticise किया है। अब आप के तमाम नेता केजरीवाल को deिाल् करने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रहे हैं। अभी आप के एक नेता ने यहकर केजरीवाल के शीशमहल का बचाव किया कि राष्ट्रपति भवन में भी तो बहुत पैसा लगा हुआ है और अब आप सांसद संजय सिंह ने खुलकर चुनौती दी है कि प्रधानंत्री आवास बनाने में 2700 करोड़ रुपये लगे हैं तो उसके सामने केजरीवाल का महल क्या है। उन्होंने कहा की वह मीडिया के साथ पहले मुख्यमंत्री आवास शीशमहल जाएंगे उसके बाद प्रधानमंत्री का आवास देखने जाएंगे और उसके बात जनता ही फैसला करेगी। साफ है कि इस बार दिल्ली चुनावों में केजरीवाल के ‘शीशमहल’ को लेकर ना केवल बीजेपी उसपर हमलावर रहेगी बल्कि कांग्रेस के नेता भी इस बात को लेकर घर घर जा रहे हैं कि केजरीवाल आम नहीं खास आदमी हैं, जनता को असलियत समझनी चाहिएं।

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