सम्राट चौधरी-शहनवाज हुसैन -कद्दावर नेताओं के साथ बिहार चुनाव की तैयारी

बिहार चुनावों को लेकर बीजेपी ने अपने पते अभी से बिछाने शुरू कर दिए हैं, बीजेपी को पता है कि इस बार बिहार में जीत की राह इतनी आसान नहीं होगी। एक तरफ कांग्रेस यहां अपनी वापसी के लिए हर संभव कोशिश कर रही है दूसरी तरफ तेजस्वी यादव भी बिहार का मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोय इस बार चुनावों में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रहे हैं और इन सब के बीच प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज से सभी दलों को खतरा बन गया है, क्योंकि सब जानते हैं कि चाहे प्रशात किशोर जीते नहीं लेकिन वोट काट कर सभी का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। और यही कारण है कि बीजेपी इस बार चुनावों में अपने भारी भरकम नेताओं को उतारने की तैयारी कर रही है। इनमें दिलीप कुमार जायसवाल, सम्राट चौधरी, शाहनवाज हुसैन, मंगल पांडेय नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इसके अलावा विधान परिषद के सदस्य, लोकसभा चुनाव में हारे उम्मीदवारों और भाजपा के कई पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा में उतारने की चर्चा चल रही है। दूसरी तरफ बीजेपी आलाकमान ने 19 जनवरी को प्रस्तावित अपनी राज्य परिषद की बैठक भी स्थागित की है जिसमें नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जानी थी। माना जा रहा है दो वैश्य समुदाय के नेताओं का रहना चुनावी नजरिए से सही नहीं होगा। इसलिए बिहार का प्रदेश अध्यक्ष बदलने की कवायद की जा रही है और पूरी रणनीती तैयार करने में देरी हो रही है जिसके तहत पिछड़ा समाज से कोई नया प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश भाजपा को मिल सकता है। चर्चा यह है कि रघुवर दास को बिहार का प्रभारी बनाया जा सकता है।

तेजस्वी- अखिलेश, उद्वव ठाकरे क्यों खोला राहुल के खिलाफ मोर्चा

दिल्ली चुनाव प्रचार में राहुल गांधी की एंट्री और उसके बाद आप के खिलाफ जमकर मोर्चा खोलने से राजनतीतिक दलों में काफी हलचल मच गई है, दिल्ली के कांग्र्सी नेता राहुल के इन तेवरों से काफी खुश दिख रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले तक राहुल केजरीवाल के खिलाफ कुछ भी बोलने से कतरा रहे थे और यहां तक की दिल्ली में केजरीवाल के खिलाफ शूरू किए गए जनसंपर्क अभियान में भी राहुल ने शिरक्त करने से मना कर दिया, पर अब राहुल बदले बदले नजर आ रहे हैं और दिल्ली चुनाव में इंडी गठबंधन के साथी दलों के दबाव को धता बताते हुए राहुल खुल कर केजरीवाल सरकार पर निशाना लगा रहे हैं।पर छन छन कर खबरें आ रही हैं कि राहुल के इन तेवरों से इंडी गठबंधन के कईं दलों में नाराजगी है। खुले रूप से केजरीवाल को चुनौती देना समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, लालू यादव की पार्टी और उद्वव ठाकरे की पार्टी , शिवसेना यूबीटी को पसंद नहीं आ रहा है। इन सभी की यही कोशिश रही थी कि कांग्रेंस भाजपा को हराने के नाम पर आप के साथ गठबंधन करे। पर ऐसा हो नहीं पाया आपको बता दें कि दिल्ली से पहले हरियाणा चुनाव में भी इन दलों ने कांग्रेस पर आप के साथ गठबंधन के लिए दबाव बनाया। इस दबाव में कांग्रेस ने आप के साथ सीटों के तालमेल को लेकर कई दौर की बैठकें भी कीं पर सफल नहीं हो पाई। और अब जिस तरह से राहुल की पहल के साथ ही कांग्रेस के और नेता भी आप को खरी -खरी सुनाने में पीछे नहीं हट रहे ,लगने लगा है दिल्ली की गद्दी पाने की चाह विपक्षी गठबंधन के ही टुकड़े ना कर दे। वैसे राहुल राहुल हैं उन्होंने अपने एक्शन से यह भी स्पष्ट कर दिया की राष्ट्रीय गठबंधन की दुहाई देकर राज्यों में कांग्रेस को हाशिए पर रखने की सहयोगी दलों की दबाव की रणनीति अब नहीं चलेगी।

अब तेजस्वी के खिलाफ मीसा भारती भी

बिहार में आजकल चल क्या रहा है किसी को समझ में नहीं आ रहा है, एक ही परिवार के लोग अलग अलग तरह के बयान देकर जनता को ही आसमंजस में डाल रहे हैं। अभी कुछ समय पहले ही लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती ने नीतीश कुमार को लेकर यह बयान दिया कि वह हमारे अभिभावक हैं उनके लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं, इससे नीतीश के वापस लालू खेमें में लौटने की चर्चाओं को फिर से हवा मिल गई। पर ये हवा अभी इतनी फैली भी नहीं थी कि लेकिन तेजस्वी यादव ने इस तरह की सभी अटकलों पर पानी फेर दिया। उन्होंने बिल्कुल साफ कह दिया कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है, अब कोई खेल नहीं, सिर्फ चुनाव होगा। वहीं दूसरी तरफ तेज प्रताप यादव ने भी तेजस्वी के सुर में सुर मिलाते हुए नीतीश के खिलाफ कड़ा रूख दिखा दिया। और कह दिया कि नीतीश कुमार मकर संक्रांति पर घर में एंट्री कराने का मन नहीं है। इन बयानों से लालू की फैमिली में अंदरूनी कलह की बात भी सामने आ रही है। और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल निकली की क्या लालू यादव की सहमति के बाद ही मीसा ने यह बयान दिया? और क्या अब नीतीश को लेकर तेजस्वी और लालू में ही फूट पड़ गई है। और इन सब के बीच नीतीश कुमार चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में शामिल तो हुए पर चिराग पासवान के मौजूद ना होने पर उनसे मिले बिना चले गए और इससे नीतीश कुमार की चिराग पासवान से बढ़ती तल्खियों को भी हवा मिल रही है।

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