मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरे सामने कौन लड़ रहा है। मैं युवा हूं और क्षेत्र की जनता मेरे साथ

बेशक भारत को युवाओं का देश माना जाता है क्योंकि भारतीय युवा वर्ग लगभग हर क्षेत्र में बढ़चढ़ कर भाग लेकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसे में राजनीति का क्षेत्र कैसे अछूता रह सकता है। उत्तर प्रदेश के कौशांबी संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत कर आए युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज इसका ताजा उदाहरण हैं जो अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पुष्पेंद्र के आत्मविश्वास का अंदाजा उनके इस बयान से लगाया जा सकता है कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरे सामने कौन लड़ रहा है। मैं युवा हूं और क्षेत्र की जनता मेरे साथ है।हाल ही में 25 साल के हुए पुष्पेंद्र ने साल के आरंभ में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई और चुनावी सफलता भी हासिल की। पुष्पेंद्र सरोज ने इंग्लैंड से लौटने के बाद अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। उस मुलाकात के दौरान अखिलेश ने उन्हें, उनके पिता की जगह चुनाव लड़ने की सलाह दी जिसे मानते हुए वे चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत के बेटे पुष्पेंद्र को चुनावी मैदान में उतरना इतना आसान नहीं था क्योंकि खांटी सपाइयों ने विरोध करना शुरू कर दिया था। विरोधियों का कहना था कि पुष्पेंद्र को टिकट दिया गया तो सपा दो धड़ों में बंट जाएगी और पार्टी को इसका सीधा नुकसान होगा। क्योंकि, जो सपाई विरोध में हैं, उनका अपना अच्छा खासा वोट बैंक है।पर अखिलेश ने विरोध के स्वरों को की तरजीह नहीं दी और पुष्पेंद्र को यह कहकर चुनावी मैदान में उतार दिया कि वह ही कौशांबी से सपा के अधिकारिक उम्मीदवार हैं और उनको जीता कर लेना हर कार्यकर्ता का फर्ज है।

 बीजेपी के वरिष्ठ नेता दो बार से लगातार सांसद विनोद सोनकर को हराया


पुष्पेंद्र सरोज का कौशांबी लोक सभा सीट पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और दो बार से लगातार सांसद विनोद सोनकर से मुकाबला था। युवा सांसद का कहना है कि वह जनता के मुद्दों को लेकर ही उनके बीच जा रहे हैं।पुष्पेंद्र कहते हैं कि भले ही वह राजनीति में नया हैं और पहला चुनाव लड़ रहा हैं, लेकिन परिवार में शुरू से सियासी माहौल देखा है ।उन्होंने कहा कि वह जनता के मुद्दों को लेकर ही उनके बीच जा रहे हैं और जनता कौशांबी सीट पर बदलाव का मन बना चुकी है। पुष्पेंद्र सरोज का दावा है कि दस साल में बीजेपी सांसद विनोद सोनकर ने कोई काम नहीं किया है और यही वजह है कि जनता उन्हें हटाने का पूरा मन बना चुकी थी।

 प्रधान मंत्री और स्थानीय भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ सीधा हमला बोला था

पुष्पेंद्र सरोज ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं में व्याप्त बेरोजगारी प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लेकर प्रधान मंत्री और स्थानीय भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ सीधा हमला बोला। जिसका युवाओं पर खासा प्रभाव पड़ा जो मतदान के दिन स्पष्टता से दिखा भी।
भारत युवाओं का देश है। यहां की आबादी में अधिकतर युवा हैं। 18 वीं लोकसभा में कई युवा जनता के प्रतिनिधि बनकर आए हैं। सन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद चन्द्राणी मुर्मू देश की सबसे युवा सांसद थी। पुष्पेंद्र सरोज के पिता इंद्रजीत सरोज पांच बार के विधायक रहे हैं। सपा की सरकार में वे मंत्री भी रहे हैं। साल 2019 में वे कौशांबी से विनोद कुमार के खिलाफ खड़े हुए थे। उस समय वे कुछ 38 हजार वोट से हर गए थे लेकिन उनकी हार का बदला उनके बेटे ने ले लिया।

बाहुबलि विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और सांसद पुष्पेंद्र सरोज साथ साथ क्या

क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से एकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई कर लौटे पुष्पेंद्र ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत सीधे लोक सभा संसद के रूप में की है। पुष्पेंद्र सरोज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज के बेटे हैं।एक अनौपचारिक बातचीत में पुष्पेंद्र ने स्थानीय मीडिया को अपने प्रचार के दौरान बताया था कि कौशांबी लोकसभा में सपा का कैडर बहुत मजबूत है। यहां कोई जाति और धर्म का समीकरण नहीं था। लोग हमारे साथ थे। मुद्दे की राजनीति की गई। चुनाव के पहले दिन से लेकर प्रचार के अंतिम दिन तक मैं मुद्दों के साथ जनता के बीच गया। मैंने मंच से भी यही बात कही। मुद्दों पर लड़ा और उसी से जीत दर्ज की।
लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद यूपी के कुंडा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था। इस तस्वीर में बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद पुष्पेंद्र सरोज नजर आ रहे थे।
इस तस्वीर को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि इसलिए पुष्पेंद्र उन्हें धन्यवाद देने कुंडा के बेंती महल आए थे क्योंकि राजा भैया ने समाजवादी पार्टी को खुलकर समर्थन दिया था।

 

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