बिहार में चुनाव आने वाले हैं और ऐसे में सरकार हो या विपक्ष एक दूसरे को डाउन करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है, हाल ये है कि अब त्यौहार में नाचने गाने और ठुमके लगाने पर सियासत हो रही है, पर जब होली के जश्न में लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने पुलिस कर्मी को वर्दी में डांस करने के लिए force किया तो जाहिर सी बात है यह मामला तो तूल पकड़ना ही था। दरअसल शनिवार को तेजप्रताप यादव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया जिसमें वो सामने आया जिसमें वह पुलिस कर्मी को नाचने के लिए कह रहे थे और यही नहीं ऐसा नना करने पर मतलब अगर नहीं नाचे तो तेजप्रताप उन्हें खुलेआम सस्पेंड करने की भी धमकी दे रहे थे, बस वीडियो वायरल हुआ और बिहार में राजनीति गरमा गई। विपक्ष ने rjd पर जमकर निशाना साधना शुरू कर दिया, वहीं चिराग पासवान के इस वीडियो को शेयर करते हुए लिख दिया की नाचने वाले इन अंगरक्षकों को प्रमोशन दे दिया गया है। बस इसको लेकर rjd नेता भी गुस्से में भर गए और लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने मोर्चा संभालते हुए तुरंत एक वीडियो शेयर कर डाला उसमें खुद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सुरक्षा बल के जवानों के साथ डांस कर रहे थे साथ ही रोहिणी ने तंज कसते हुए लिख दिया कि खुद को मोदी जी का हनुमान बताने वाले इस शख्स के साथ जम कर ठुमके लगा रहे सुरक्षा – कर्मियों को भी सस्पेंड किया जाएगा क्या ? .. अजब दस्तूर, खुद करें तो रासलीला और दूसरों के करने पर लाल – पीला पर रोहिणी को कौन समझाए जबरदस्ती डांस करने का आदेश देने और साथ मिलकर डांस करने में बहुत फर्क है।

लेडी सिंघम की बहादुरी कुछ को पसंद नहीं

यूपी में आजकल महिला सिंधम के बहुत ज्यादा चर्चे हो रहे हैं, ये वो हैं जिन्हें गलत काम करने वाले बिल्कुल पसंद नहीं है और खुद ही उतर जाती हैं मौके पर लोगों को सबक सीखाने के लिए। जी हां यहां हम बात कर रहे हैं देवरिया जिले की महिला एसडीएम दिशा श्रीवास्तव । जिन्होंने 26 गांवों में अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाकर सबको सकते में डाल दिया। इस दौरान उन्हें बिना खौफ 44 स्थलों से अवैध कब्जे हटवाए और यही नहीं खुद ट्रैक्टर चलाकर जुताई की और फसल को कटवाया भी। आपको बता दें कि करौता में चक मार्ग पर काफी दिनों से अतिक्रमण किया गया था। अवैध कब्जा मुक्ति अभियान के तहत अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध हो रही कार्रवाई के तहत खेत की जोताई करने के लिए ट्रैक्टर चालक हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इसपर सड़क बननी थी बस एसडीएम दिशा श्रीवास्तव को यह बात पसंद नहीं आई इसलिए उन्होंने पहले जमीन की पैमाइश करवाई और उसके बाद बाद चकरोड पर बोई गई गेहूं की फसल को कटवाकर अतिक्रमण मुक्त कराया। यह घटना चर्चा का विषय बन गई है बहुत से लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं कियोंकि अब खाली जगह पर सड़क बन सकेगी और उन्हें आराम मिलेगा। पर कईं लोगों को एक महिला की यह बहादुरी पसंद नहीं आ रही।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।