मध्यप्रदेश के CM दिग्विजय सिंह ने किया था पुलिस मदद देने से इंकार

 गुजरात दंगों को अब तक जीवित रखा गया है

भारत में दंगों का लंबा इतिहास रहा है, और उत्तर प्रदेश बिहार, मध्य प्रदेश ,राजस्थान, झारखंड,छत्तीसगढ़ आसाम पश्चिम बंगाल, केरल ये ऐसे प्रदेश हैं , जहां दंगे गाहे बगाहे होते रहे और गुजरात में तो 2002 से पहले लंबी फेहरिस्त थी दंगों की, और अगर उन्हीं दंगों की बात करेंतो 69 में लगभग छ महीने तक कम्युनल दंगा चला था लेकिन जब भी दंगों की बात होती है विशेषरूप से किसी भाजपा शासित प्रदेश की तो वो घूम फिर करके 2002 के दंगों पर केंद्रित हो जाती है और इस 2002 के दंगों को गुजरात दंगों को अब तक जीवित रखा गया है और हर व्यक्ति व्यक्ति जीवित रखने की कोशिश करता है प्रधानमंत्री जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे उन्होंने इस पर किसी भी प्रश्न का जवाब देना बंद कर दिया था उन्होंने बोल दिया था कि उस पर बोल हमेशा उनका एक ही जवाब होता था कि इस पर वो काफी कुछ बोल चुके हैं लेकिन अभी जब लेक्स फ्रीडमैन के साथ जो अमेरिकी पाडकास्टर हैं और सॉफ्टवेयर के विशेषज्ञ हैं उनसे जब बातचीत कर रहे थे तो उन्होंने भी 2002 के दंगों की बात की लेकिन इस बार मोदी जी ने वो जवाब नहीं दिया और दंगों पर वो बोले और उन्होंने बताया कि किस तरह से उनके मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद यह घटना हुई थी और बाकी डिटेल उन्होंने बताई।

जर्नलिस्ट और सोशल वर्कर जैसे तीस्ता शीतलवाड़ ने भुनाया इन दंगों को

किस तरह से गुजरात दंगों को 2002 के दंगों को एक अब तक जीवित रखा गया है दो दंगों का कारण छिपाया जाता है इस पर प्रोपगेंडा चलाया जाता है इस पर बहुत सारे लोगों को बहुत सारे लोग इसका इस्तेमाल करते हैं अपना करियर बनाने के लिए उनकी विशेष रूप से जर्नलिस्ट और सोशल वर्कर जैसे तीस्ता शीतलवाड़ जैसे लोग हैं जिन्होंने दंगों में लोगों को गलत सूचनाएं बताने के लिए ना केवल उनको फीड किया बल्कि दंगों पर पैसा लेकर के उसको व्यक्तिगत इस्तेमाल किया है और उसको उसके कारण वह जमानत पर सुप्रीम कोर्ट से खैर तो यह एक बाकायदा बड़ा बड़ी योजना का हिस्सा है और उसको बरकरार रखा जाता है

गुजरात दंगों की बात होती पर जिनको जिंदा जलाया उन पर कोई बात नहीं होती

अब जो गुजरात दंगों की बात होती है जो जो लेक्स फ्रीडमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की हालांकि लेक्स फ्रीडमैन ने प्रधानमंत्री से बहुत सारे विषयों पर बात की उन्होंने गुजरात पर बात की उन्होंने आरएसएस पर बात की उन्होंने इस तरह के और भी गवर्नेंस पर बात की कांग्रेस पर बात की, सारी चीजों पर बात की उन्होंने अब अगर गुजरात दंगों की भी बात करें तो गुजरात दंगों की शुरुआत जो है वो साबर अयोध्या से साबरमती आने वाली एक ट्रेन पर आग लगा दिया गया था जिसमें 59 कार सेवक की जलकर मौत हो गई थी इसके बाद ही गुजरात दंगे भड़के थे और ये जो 59 लोग मर गए थे इन इनको जलाने वाले जो कुछ कांग्रेस से जुड़े हुए थे और एक धर्म विशेष के लोग थे तो उन पर लोअर कोर्ट ने 31 लोगों को कन्विक्ट किया था जिसको बाद में हाई कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट ने कम करके 11 लोगों को कन्विक्ट किया है उस मामले में लेकिन गुजरात दंगों की बात होती है लेकिन जिन लोगों को जिंदा जला दिया गया था उन लोगों पर कोई बात नहीं होती है उन पर कोई चर्चा नहीं की जाती है अब गुजरात दंगों पर आते हैं जो इस घटना के बाद से घटित हुए उस घटना में लगभग 780 -790 लोग मुस्लिम मारे गए थे और 300 और 256 हिंदू मारे गए थे तो ये कहना कि ये दंगे हुए थे एक तरफा दंगे हुए थे ये भी ठीक नहीं है इसमें लगभग 250 से ज्यादा हिंदू मारे गए थे इसमें जो 250 से ज्यादा हिंदू मारे गए थे वो कुछ पुलिस की गोली से मारे गए थे और कुछ मुसलमानों द्वारा रिटेलिएशन में मारे गए मारे गए थे तो दो चीजें हुई पहला ये जो लोग ये बोलते हैं कि ये प्रोग्राम था एक तरफ़ा हिंसा थी , इथनिक क्लींजिंग थी वो झूठ बोलते हैं प्रोपगेंडा करते हैं , दूसरा यह कि पुलिस ने इसमें कोई कार्यवाही नहीं की थी अगर पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही होती तो पुलिस की गोलियों से कैसे लोग मारे जाते अब ये ऑफिशियल रिकॉर्ड है जो ये बताता है कि इसमें इतने सारे लोग मारे गए थे। अब अगर भारत में दंगों की बात करें तो गुजरात के 2002 के दंगों से बड़े दंगे हुए हुए हैं अगर सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात करें तो मुजफ्फरनगर ,मलियाना मेरठ ये इस तरह की बात है फिर बिहार में भागलपुर आसाम में नेली इस तरह की लंबी फेहरिस्त है आप उसको गिनाते जाइएगा अनगिनत है मतलब अब तक अगर स्वतंत्रता की बात पार्टीशन के बाद की बात करें तो लाखों लोग इन दंगों का शिकार हुए हैं और मतलब हजारों दंगे हो चुके हैं पूरे देश में लेकिन घूम फिर करके मामला आता है 2002 के दंगे पर चूंकि वो एक इको सिस्टम है वो इको सिस्टम किसी भी तरह से जो हिंद मतलब नरेंद्र मोदी को हिंदुत्व को और हिंदुओं को कटघरे में खड़ा करने के लिए है । उस लेफ्ट लेफ्ट लिबरल गैंग का अपना एक एजेंडा है उस एजेंडे के तहत किया जाता है।

अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे मुजफ्फरनगर दंगा हुआ पर सबने चुप्पी साध ली

इसलिए कि यही सारे लोग 2002 के बाद जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे तो अह मुजफ्फरनगर का दंगा हुआ था उस दंगे पर सब लोगों ने चुप्पी साध ली थी जबकि उस दंगे के मामले में हाई कोर्ट ने अह अखिलेश यादव की सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकार की निष्क्रियता के कारण सरकार के एक्शन ना लेने के कारण इतना बड़ा दंगा भड़का था खैर अब इस मामले में जो बातें मैंने बताई कि किस तरह से कितने लोग मारे गए थे और इस मामले में किस तरह से सरकार ने कार्यवाही की थी सरकार ने मिलिट्री को बुला लिया था और सरकार ने अपने अड़ोस पड़ोस के सरकार को यह ऑफिशियल स्टेटमेंट है प्रधानमंत्री अभी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का और तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का

मोदी ने कहा कि दंगा रोकने कांग्रेस मुख्यमंत्री से मदद मांगी नहीं मिली

जब उन्होंने कहा था कि जब दंगे भड़के थे तो उन्होंने अड़ोस पड़ोस के जो प्रदेश हैं उनसे भी पुलिस की मदद मांगी थी लेकिन तब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कोई पुलिस मदद करने से देने से इंकार कर दिया था तो ये ये एक बहुत बड़ा वो है लेकिन इन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबे समय के बाद प्रधानमंत्री ने इस मामले पर चुप्पी साधते हुए सारे पक्ष को गुजरात दंगों को लेकर के एक्सप्लेन किया कि किस तरह से उन्होंने दंगों को कंट्रोल करने के लिए कार्यवाही की इसलिए कि गुजरात में ही दंगों का लंबा इतिहास है और उनके मतलब ये उनका कहना है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद वहां पर दंगे नहीं हुए 2002 को अगर छोड़ दिया जाए तो।

 

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