मुख्यमंत्री पद की दावेदारी BJP के लिए जरूरी

बिहार में ऑफिशियलीतो चुनाव का अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है लेकिन ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने चुनाव का बिगुल बजाना शुरू कर दिया है और यह चुनाव जो है वो बीजेपी के लिए कई दृष्टि से महत्वपूर्ण है ,और महत्वपूर्ण इसलिए है कि एक तो ये कि जो बीजेपी के नेता हैं उनकी साख दांव पर लगी हुई है क्योंकि जिस तरह का महाराष्ट्र का परफॉर्मेंस है जिस तरह का हरियाणा का परफॉर्मेंस है जिस तरह का दिल्ली का परफॉर्मेंस है सब बहुत उत्साहित है और बिहार में भी यही रिजल्ट देना बीजेपी के समक्ष बड़ी चुनौती है। इसके लिए बहुत मजबूती के साथ काम शुरू हो गए हैं चुनाव के, उसमें प्रधानमंत्री भी यात्राएं कर रहे हैं।

 

BJP को यंग leaders को सामने लाना होगा


यह बीजेपी के नेताओं का साख का प्रश्न है और करो और मरो जैसी स्थिति बिहार में बीजेपी के लोग महसूस कर रहे हैं उसका कारण यह है कि ये ऐसा चुनाव है जहां पर एक नई पीढ़ी के कई सारे नेता अपना जी जान लगाएंगे हालांकि पिछले चुनाव में भी ऐसा था लेकिन अगर यहां से वो कुछ बहुत बेहतर कर पाए तो एक नई लीडरशिप उभरेगी लगातार अगर आरजेडी की बात करें तो आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव को जो लालू प्रसाद यादव का तंत्र है उस तंत्र में तेजस्वी को पूरी तरह से अब सर्वमान्य नेता बना दिया गया है जिस तरह से तेज प्रताप को हटाया गया है और मीसा भारती को बहुत महत्व नहीं दिया जा रहा है एक ये फैक्टर हो गया दूसरा ये कि पिछले चुनाव में चिराग पासवान अलायंस से अलग लड़े थे लेकिन इस बार वो बहुत तरीके से एक नई दावेदारी के साथ
चुनाव मैदान में उतरने की कोशिश कर रहे हैं एक वो चिराग पासवान का बड़ा फैक्टर बिहार में नजर आ रहा है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र भी इस बार चुनावी रण राजनीति में हैं हालांकि मुख्यमंत्री पद की दावेदारी तो उनकी निश्चित तौर पर नहीं होगी लेकिन हो सकते हैं तो ये तीन लोग महत्वपूर्ण होंगे इन चुनाव में अब इनको बीजेपी को किस दृष्टि से देखने की जरूरत है ।

 

जब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं BJP कैसे करेगी विकास

बीजेपी के लिए साख और भविष्य की राजनीति दोनों पर कैसे अंतर पड़ेगा और क्यों फर्क पड़ेगा इसको क्यों महत्वपूर्ण है ये समझना है। बीजेपी लंबे समय से बिहार में सरकार में है लेकिन सरकार में दूसरे नंबर पर है बावजूद इसके कि वह सिंगल लार्जेस्ट पार्टी इमर्ज करती है अलायंस में फिर भी मुख्यमंत्री जो है वो जनता दलयू का होता है है नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनते हैं क्या बीजेपी इस बार एक गठबंधन का यह जो धर्म है या जो यह अरेंजमेंट है इस अरेंजमेंट पर कुछ बदलाव चाहती है और जो भविष्य की राजनीति के लिए ना केवल चाहना बल्कि उस पर कुछ निर्णय लेना महत्वपूर्ण है निर्णय लेना महत्वपूर्ण इसलिए है पहला कारण ये कि नीतीश कुमार का स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं है और वो कितने दिनों तक बिहार की राजनीति में सक्रिय रह के और बेहतर ढंग से
एडमिनिस्ट्रेशन चला पाएंगे इसको लेकर के भारतीय जनता पार्टी की तो बात छोड़ दीजिए जनता दल यू में भी बहुत संदेह है जिस तरह से वो व्यवहार कर रहे हैं जिस तरह से उनकी बातें उनकी खबर आ रही है उनका स्वास्थ्य बहुत बेहतर नहीं है एक तो यह फैक्टर हो गया दूसरा फैक्टर यह हो गया कि बीजेपी का नेतृत्व जो है वह मतलब बीजेपी का जो प्रदेश का नेतृत्व है उसमें बहुत सारे नेता हैं केंद्र में सब की भूमिका दिखती है रविशंकर प्रसाद हैं ,गिरिराज सिंह हैं उप मुख्यमंत्री सम्राट सिंह हैं , मंगल पांड हैं इस तरह के और बहुत सारे नेता हैं नए लोगों में विवेक ठाकुर हैं उसके अलावा राकेश सिन्हा हैं इस तरह के लंबी फहरिस्त है लेकिन ये इनको उतना महत्व नहीं मिलता है इसलिए कि ये सेकंड फेडल बीजेपी जो है वो सेकंड फेडल में होती है वो उसके नेता सारे बीजेपी के प्रभाव बीजेपी के चुनाव जीतने के बावजूद उनको उतना महत्व नहीं मिलता है नीतीश कुमार के कारण लेकिन नीतीश कुमार अब अगले चुनाव में या अगले चुनाव के परिणामों के बाद शायद इस तरह की स्थिति में नहीं होंगे कि वो मुख्यमंत्री के तौर पर कंटिन्यू कर पाए इसलिए भारतीय जनता पार्टी को अभी से उस मामले में ना केवल बारगेन करना पड़ेगा बल्कि अपने नेताओं को प्रोजेक्ट भी करना पड़ेगा अब यह कहना है कि भारत को बीजेपी को अपना मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करना चाहिए ऐसा कुछ होने जा नहीं रहा है इसलिए कि बीजेपी इस तरह से करती भी नहीं है और चुनाव जीतने के बाद आखिरी क्षण पर आखिरी समय पर यह निर्णय होता है कि कौन मुख्यमंत्री होगा और ज्यादातर केसेस में इस तरह के नाम निकल कर के आते हैं जो बड़े आश्चर्यचकित करने वाले होते हैं, अगर सही मायने में बिहार में भी वह जो कर ही है उसका फायदा मिलना चाहिए और जो जिसको गिनाती है कि हमारी डबल इंजन कि सरकार यहां है डबल इंजन की सरकार वहां है तो जब तक बिहार में बीजेपी टॉप रोल में नहीं आएगी तब तक बीजेपी को वहां पर वो फायदा मिलता हुआ नहीं दिखेगा या ये वो चीज नहीं दिख पाएगी जो बीजेपी को बाकी प्रदेशों में दिखती है चाहे महाराष्ट्र में हो, हरियाणा में हो, चाहे उत्तर प्रदेश में हो उत्तर प्रदेश में तो कोई अलायंस है लेकिन वहां पर बीजेपी सब और बाकी अलायंस के बीच में बड़ा अंतर है तो अब बीजेपी को वहां पर ऐसा करना पड़ेगा कि वो अपने लोगों को ज्यादा एनकरेज करें युवा लोगों को आगे करें लंबी फेरिस्त है

नीतीश कुमार कब तक उठाते रहेंगे फायदा

भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व है उसको यह मालूम है कि पिछला चुनाव अगर गठबंधन जीता था तो बीजेपी के कारण जीता था लेकिन जब मुख्यमंत्री नहीं मिला तो कार्यकर्ता निराश हुआ इसलिए कि मुख्यमंत्री रहने पर कुछ और बात होती है मुख्यमंत्री अब भाजपा का नहीं होने पर स्थितियां थोड़ी दूसरी होती हैं तो कार्यकर्ता लगातार निराश होता रहा है चाहे लोकसभा चुनाव के टिकट में बराबर की सीट जनता दल यू को देना चाहे विधानसभा के उसमें जनता दलों को बराबर की सीट देना और सबके बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे करना तब जब मुख्यमंत्री तब जब नीतीश कुमार गाहे बगाहे यहां से वहां पलटी मारते रहे चाहे वो आरजेडी के साथ चले जाए फिर बीजेपी के पास आ जाए फिर बीजेपी से आरजेडी में चले जाए मतलब आरजेडी के साथ अलायंस कर ले और फिर बीजेपी के साथ वापसी कर ले ये वो ये अपनी मुख्यमंत्री सीट बनाने के लिए बचाने के लिए करते रहे अब इसका भी समाधान सिर्फ इस तरह से संभव है कि वहां पर बीजेपी मजबूती के साथ आए और यह नेतृत्व को करना पड़ेगा और नेतृत्व को अपने साथ अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनता के बीच मतदाताओं के बीच करके रखने के लिए इस तरह का निर्णय रखना पड़ेगा जहां पर बीजेपी के नेताओं को प्राथमिकता दी जाए पार्टी की तरफ से प्राथमिकता दी जाए। हालांकि अमित शाह एक बार कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री के नाम पर अभी कोई फैसला नहीं है हालांकि एक आध नेताओं ने ये भी कह दिया है कि नहीं अगले मुख्यमंत्री होंगे लेकिन ऐसा लगता है कि ये फिर रिपीट होने वाला नहीं है इस बार बीजेपी को अपना मुख्यमंत्री बनाना पड़ेगा अगर वह चुनाव जीतते हैं और ऐसा लगता भी है कि वह इस बार जिद करेंगे

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