लालू परिवार में बिखराव की कहानी अकेली नहीं, बहुत से राजनीतिक परिवारों में गद्दी के लिए हुआ बंटवारा

बिहार चुनाव से पहले ही लालू यादव के परिवार में चल रही लडाई सामने आ चुकी थी, लालू का कौन बनेगा वारिस, बस इसी के चलते पहले बड़े भाई तेजप्रताप को बाहर का रास्ता दिखाया और चुनाव के बाद जिस तरह से बहन रोहिणी आचार्य खुलकर तेजस्वी पर बरसी और सियासी कलह इस तरह बढ़ गई कि बहन रोहिणी ने राजनीति छोड़ने का फैसला कर डाला और इस पूरी पारिविरिक कलह में एक बाद दोबारा साबित हो गई कि राजनीति में , गद्दी के लिए ना कोई बहन है ना भाई, ना बाप ना बेटा।गद्दी पाने के लिए परिवारों में आपसी जंग का यादव फैमिली कोई अकेली नहीं हैं इससे पहले भी बड़े बड़े परिवारों में राजनीती के कारण फूट हुई, भाई-भाई एक दूसरे के दुश्मन बने,

Up में मुलायम परिवार बंटा

सबसे पहले यूपी के मुलायाम परिवार की बात करते हैं, मुलायम सिंह की आंखे जैसे ही बंद हुई उनके बेटे अखलेश और भाई शिवपाल में सियासी संग्राम खुलकर सामने आ गया। बाद में शिवपाल ने अलग पार्टी बना ली थी। और वहीं अखिलेश का छोटा भाई भी अलग हुआ उनकी पत्नी यानी मुलायम परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने 2022 में बीजेपी का दामन थाम लिया था।

Haryana ——चौटला परिवार में पावर को लेकर बंटवारा

यूपी से हरियाणा की ओर चले तो ओपी चौटाला के बेटों ने विरासत के लिए अपनी राहें बदल ली। ओम प्रकाश चौटाला के बाद बेटे अभय और अजय चौटाला की राहें अलग हो गईं थीं। 2018 में अजय चौटाला ने अपने बेटों के साथ मिलकर जननायक जनता पार्टी बनाई थी।

Maharashtra —ठाकरे और पवार दोनों बडे दलों में भी कलह और विखराव

वहीं महाराष्ट्र में भी बाल ठाकरे की विरासत को उनके बेट और भतीजे में जबरदस्त मतभेद हुए , राज ठाकरे ने अलग होकर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना बनाई और उद्धव ठाकरे ने भी अपना गुट बनाया। महाराष्ट्र की एक और ताकतवार पार्टी के मुखिया शरद पवार को भी झटका मिला जब वो पार्टी की कमान अपनी बेटी सुप्रिया को सौंपना चाहते थे पर भतीजे को यह बिल्कल नागावार गुजरा और 2023 में उनके भतीजे अजीत पवार ने अलग होकर एनसीपी को तोड़ दिया था।

 

Jharkand शिबू सोरेन के दो बेटे अलग

वहीं झारखंड में सिबू सोरेन के परिवार में में भी हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं।

Tamilnadu में dmk में गद्दी की लडाई और बंटवारा

साउथ की राजनीती भी कोई अलग नहीं है तमिलनाडु में डीएमके के संस्थापक एम करुणानिधि की विरासत को लेकर भी एमके स्टालिन और अलागिरी में टकराव देखने को मिला। बाद में अलागिरी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

Andhrapradesh —-आंध्र प्रदेश में भी वाईएसआर की फैमिली में भी सियासी जंग देखने को मिला। वाईएस राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद पार्टी में भाई जगनमोहन रेड्डी और बहन वाईएस शर्मिला में भी टकराव हुआ। 2021 में बहन शर्मिला ने अपनी अलग पार्टी बनाई। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया।

 

Telangana में के सी आर परिवार में भाई बहन अलग

तेलांगना में एक और परिवार केसीआर परिवार भी अंदरूनी कलह का शिकार हुआ । तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की विरासत को लेकर बेटे केटी रामाराव ने अपनी बहन के. कविता को पार्टी से अलग कर दिया। कविता ने अपनी अलग पार्टी बना ली है।

Gandhi परिवार में भी हुआ कलह

और इन सब के बीच गांधी परिवार में कलह की बात ना करे तो यह चर्चा अधूरी ही लगेगी। गांधी परिवार से अलग होकर संजय गांधी की मौत के बाद मेनका गांधी ने भी अलग राह पकड़ ली थी। जो आज तक कायम है जहां उनकी जेठानी राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी कांग्रेस के सर्वसर्वा है वहीं मेनका और वरुण गांधी बीजेपी से जुड़े हुए हैं ।

Bihar जनता को पसंद नहीं आया लालू फैमिली का कलह

लेकिन कुछ विखराव को छोड़ दिया जाए तो आपसी कलह के चलते अलग अलग बंटे इन नेताओं ने राजनीती में कुछ ऐसा तीर नहीं मारा है। जनता ने इस बिखराव को हमेशा ही नकारा है . उनको लगता है कि जो अपने परिवार को नहीं संभाल पाए, अपने परिवार के लिए ही प्यार नहीं है तो जनता के लिए क्या करेंगे। और इसी थ्योरी पर चले तो बिहार में rjd के बहुत खराब प्रदर्शन का कारण पता चल जाता है, जनता को लालू परिवार की कलह, बिखराव पसंद ही नहीं आया और जमकर उसके खिलाफ वोट दिया।

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