सोशल मीडिया X के नियमों में परिवर्तन क्या लगेगा आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम ?

अब जो भी Twitter यानी अब X पर रजिस्टर होगा या जो भी रजिस्टर है, उसको यह बताना होगा कि उसका लोकेशन कहां है, किस देश का है , X कहां से Twitter हैंडल कर रहा है। भारत में बहुत लंबे समय से शंका जाहिर होती रही है कि ये जो हैंडलर्स हैं ये भारत के खिलाफ या एक पर्टिकुलर नैरेटिव के लिए काम करने वाले ये भारत के नहीं है। भारत के दुश्मन देशों के हैं। और कम से कम अगर भारत के दुश्मन देश से नहीं काम कर रहे हैं तो माइंडसेट एंटी इंडिया है। और इंटरेस्टिंगली यह जितने भी Twitter हैंडल्स हैं ज्यादातर इनमें से कांग्रेस को या सपोर्ट करते हुए नजर आते हैं। अब ये हुआ है ये कि X ने अब ये कंपलसरी किया कि आप अपना लोकेशन साझा कीजिए। तो उनमें से ज्यादातर लोकेशनेशंस 80% से 90% के बीच पाकिस्तान, बांग्लादेश या गल्फ के बहुत सारे कंट्रीज कुछ लंदन और यूरोप के भी थे। ये भारत में अस्थिरता फैलाने का भरसक प्रयास कर रहे थे। उसमें हिंदू मुस्लिम के बीच खाई पैदा करना उसमें जातियों के बीच खाई करना कृषि आंदोलन को समर्थन सीएए को लेकर के वो जितने भी जो Fault लाइंस थे उसको बढ़ाने की बिखेरने की कोशिश लगातार की जा रही थी लेकिन अब वो सामने निकल करके आ गया कि कौन पाकिस्तान बैठा हुआ है कौन बांग्लादेश बैठा हुआ है कौन दुबई ओमान बैठा हुआ है लेकिन इसमें एक और बड़ा परिवर्तन हुआ है कि जैसे ही लोगों को पता लगा कि इस तरह की पॉलिसी चेंज हुई है और वो एक्सपोज होने लगे तो उन्होंने एक दूसरा तरीका खोज लिया कि वो अपने आप को अपनी आइडेंटिटी डाइल्यूट करने के लिए इसलिए कि कम रीजन बताना निश्चित हुआ है कि आप ये नहीं छिपा सकते कि आप कुछ है। तो उन लोगों ने अपनी आइडेंटिटी को साउथ एशिया बता दिया या यूरोप बता दिया य अफ्रीका बता दिया जिसके कारण जो है वो एक अड़चन तो आ रही है फिर से तो ये एक बड़ा है लेकिन इनिशियली ये एक्सपोज हुए हैं।
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बांग्लादेशी घुसपैठियों पर जिस तरह से एसआईआर का असर होना शुरू हुआ है, भगदड़ मची है, उससे तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ी है और तृणमूल लगातार इस तरह के जो एसआईआर को लेकर के बातें हैं उसको लेकर के यह बताने की कोशिश कर रही है कि किस तरह से एसआईआर जो है वो इतना ज्यादा सरकार की तरफ से सख्ती से किया जा रहा है कि जो बीएलओस हैं वो आत्महत्या कर रहे हैं।लेकिन दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस जो एसआईआर के डर से बांग्लादेश घुसपैठिए भाग रहे हैं। उसके जवाब में या उसके उसको रोकने के लिए कुछ इस तरह की योजना पर काम कर रही है जहां पर हिंदू वोटर्स जो हैं उनके वोट भी कटे हैं। विशेष रूप से मतुआ संप्रदाय के वोट जो पश्चिम बंगाल में लगभग 17 से 20% के बीच में है। उनमें उनका एक बड़ी संख्या में वोट को काटने की योजना है और यही उनके चुनाव जीतने की रणनीति का एक वो हो सकता है। अन्यथा उनके पास कोई इस तरह का अभी स्ट्रेटजी नहीं नजर आ रही है जहां पर वो चुनाव लड़ पाए और इसीलिए एक योजना के तहत हिंदू वोटर्स को काटने के
लिए तृणमूल के कार्यकर्ता तृणमूल के लोग काम करते हुए नजर आ रहे हैं। और ऐसा इस तरह की इस तरह के आरोप लग रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी के लोग वहां उन पर आरोप लगा रहे हैं।
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अरशद मदनी जो जमीयत उलेमा हिंद के सरपरा हैं उन्होंने वह अलफला यूनिवर्सिटी जो फरीदाबाद की है उसके बचाव में आ गए कि किस तरह से माइनॉरिटी इंस्टीटशंस को टारगेट करने की जो एक योजनाबद्ध योजना है उसके तहत काम किया जा रहा है और अह किसी भी संस्था को इस तरह से नहीं टारगेट किया जा सकता है। उन्होंने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय का कोई वाइस चांसलर नहीं बन सकता है। जबकि न्यूयॉर्क का मेयर ममदानी बन गया एक मुस्लिम। लेकिन यह सारे कुछ फक्चुअली करेक्ट है। इसलिए कि बिहार के उपराज्यपाल जो हैं वो ना केवल पूरे देश की पूरे प्रदेश की जो यूनिवर्सिटीज है उसके चांसलर हैं। एक बात दूसरी बात ये कि वो जब भी लोकसभा में गए हैं हिंदू मेजॉरिटी कांस्टीट्यूएंसी से गए
हैं। चाहे कानपुर से गए हो चाहे बहराज से गए हो। आरिफ मोहम्मद खान की मैं बात कर रहा हूं। उसके अलावा मुफ्ती मोहम्मद सईद मुजफ्फरनगर से चुनाव जीत करके गए हैं जो भारतीय जो मुस्लिम डोमिनेटेड कॉन्स्टिट्यूएंसी नहीं है। इसके अलावा अनगिनत ऐसी जगह हैं। अब ये जो अलफला यूनिवर्सिटी की बात है। अलफला यूनिवर्सिटी में अगर 3000 किलो एक्सप्लोसिव मिलता है तो उस पर अरशद मदनी क्यों चुप हैं? क्यों उस पर बोलने के लिए नहीं तैयार हैं? क्यों उसको डिफेंड कर रहे हैं? जो अल्फला यूनिवर्सिटी का एक डॉक्टर है। उसने अपने आप को फिदायीन बनाया, हमला किया। उसने अपने आप को उड़ा लिया। जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई। उस पर अरशद मदनी का क्या कहना है? क्यों उसको बचाना चाह रहे हैं? बाकी जो डॉक्टर अरेस्ट हुए हैं उन पर उनका क्या कहना है? जो लोग इस मामले में सबूत जिसके खिलाफ मिल रहा है उसका क्या कहना है? अलफला यूनिवर्सिटी का जो मालिक है उसके खिलाफ जिस तरह के सबूत मिल रहे हैं ईडी ने उसको गिरफ्तार किया है। वह तीन महीने तीन साल जेल पहले ही काट चुका है। उस पर अरशद मदनी साहब का क्या कहना है? तो सिर्फ इसलिए कि अल्फला यूनिवर्सिटी एक मुस्लिम शख्स के द्वारा चलाई जा रही है। उसके लिए अरशद मदनी का उस के समर्थन में खड़े होना न केवल शर्मनाक है बल्कि दुखद भी है कि धर्म के नाम पर किस तरह से ये बात की जाती है और रही बात माइनॉरिटी इंस्टिटशंस की तो भारत में मुसलमान जो है वो दूसरा सबसे बड़ा मेजॉरिटी है। वो माइनॉरिटी कहीं से नहीं है। तो ये एक विक्टिम कार्ड खेलने की जरूरत है और ये बेसिकली मैसेज देने ग्लोबल कम्युनिटी को मैसेज देने का कुत्सित प्रयास है जहां ये बताने की कोशिश की जा रही है कि भारत में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है। ये काम अरशद मदनी लंबे समय से या उनके उनका ऑर्गेनाइजेशन लंबे समय से विक्टिम कार्ड खेला है। वो उनके उनकी एक संस्था जो जमीयत उलेमा हिंद है उसके पास एक लीगल सेल है जो आतंकवादी इस तरह की गतिविधियों में इन्वॉल्व लोगों का मुकदमा लड़ता है ये ठीक नहीं है देश के हित में भी और समाज के हित में भी।
