क्या RJD को लगाम कसनी होगी अपनी दो महिला Spokesperson पर

बिहार चुनाव में हारने के बाद RJD कांग्रेस में दोनों ही तरफ जबरदस्त मंथन हो रहा, — बुधवार को RJD ने बिहार में अपनी बैठक की सभी जीते और हारे उम्मीदवारों को बुलाया गया, पर वैसे RJD की इतनी खराब Performance को लेकर दो बातों की खासतौर पर चर्चा , एक तो पारिवारिक कलह और दूसरा RJD की दो महिला Spokesperson ने जिस तरह टीवी पर बैठे बैठे भाषा की सारी मर्यादाएं तोड़ी वो भी माना जा रहा बिहार की जनता को पसंद नहीं आया। यही नहीं चुनाव के दौरान भोजपुरी गायकों का RJD के खिलाफ शुरू किया गया अभियान हार का एक बड़ा कारण माना गया। ढाई दर्जन से अधिक गायकों ने तेजस्वी के नाम के साथ ऐसे गाने गाए, जिससे जंगल राज की पुनरावृत्ति की आहट मिल रही थी।इस बीच जब तेजस्वी का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर सामने आ गया तो जंगलराज के दोबारर लौटने के एजेंटे को काफी बल मिल गया।
RJD के साथ दोस्ती से काफी नुकसान हुआ कांग्रेस को

बात करनी जरूरी कांग्रेस की हार की भी। बिहार चुनाव में नेशनल पार्टी का इतना बुरा हाल कि 61 में से सिर्फ 6 सीटों पर जीते । इस बारे में मंथन करने के लिए कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को लंबी बैठक की। इसमें राहुल गांधी समेत, मल्लिकार्जुन खरगे, वेणू गोपाल और साथ ही बिहार में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी समेत उन 61 उम्मीदवारों ने भाग लिया जो बिहार में हारे और जीते । वैसे समीक्षा जरूरी भी थी क्योंकि कब तक Congress अपनी हार का ठीकरा वोट चोरी, या नीतीश सरकार की 10 हजार की योजना पर थोपेगी कहीं ना कहीं तो गड़बड हुई है वैसे ये बातें बैठक में भी सामने आई। सबसे बड़ा कारण सामने आया कि RJD के साथ दोस्ती से नुकसान हुआ ना कोवल कांग्रेस के अपने वोटर्स थे वो दूर हुए, बल्कि टिकट बंटबारे में देरी, कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट के चलते ना केवल उम्मीदवार ठीक से प्रचार कर पाया बल्कि जनता भी भ्रम में रही। फिर तेजस्वी को मुखयमंत्री घोषित करना उल्टा पड़ गया, लालू यादव की संतान होने के कारण तेजस्वी को भी बिहार की जनता ने जंगलराज का प्रतीक ही माना , यानी जौ के साथ घुन की भी पिसाई हो गई।
Congress की अंदरूनी कलह नहीं रास आई जनता को

फिर कांग्रेस की अंदरूनी कलह भी कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बनी । विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे शकील अहमद खां से लेकर कांग्रेस में बाहर से आए , बीच बची में उनके बयान और नाराजगी साफ झलकी और कंहैया कुमार और पप्पू यादव का जिस तरह से कांग्रेस के नेताओं, कार्कर्ताओं ने सरेआम बेज्जत किया वो जनता ने देखा, इससे इन नेताओं के समर्थक भी नाराज हुए और कांग्रेस से अंदर ही अंदर की बगावत जनता को पसंद नहीं आई।
वोट चोरी अभियान Bihar में फुस साबित हुआ

वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने जो अभियान छेड़ रखा है, वह बिहार में फेल ही हुआ, राहुल योजना तो बना रहे थे कि SIR को वोट चोरी का टूल बता कर वे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ेंगे पर बिहार में ही पिट गए। कांग्रेस के कईं हारे हुए उम्मीदवार दबी जुबान यह कहने से बाज नहीं आते कि वोट चोरी का मुद्दा बिहार में बेअसर रहा।
नीतीश का महिलाओं के खाते में 10 हजार रूपए डालना

वैसे कई नेताओं ने साफ कहा कि नीतीश का महिलाओं के खाते में 10 हजार रूपए डालने से महागठबंधन की हार पहले ही तय कर दी थी, उसका counter ना कांग्रेस कर पाई और ना ही RJD । नीतीश की छवि महिलाओं में बहुत लोकप्रिय है और इस कारण भी उन्हें बंपर जीत मिली।
Bihar की हार इन राज्यों में Congress की स्थिति दयनीय

खैर अब कुछ तो होना नहीं चिडिया चुग गई खेत ,अब सवाल है कि Congress आने वाले समय में क्या करेगी, कर्नाटक का कलह Congress की सिरदर्दी बन चुका, कोई बड़ी बात नहीं होगी कि वहां भी Congress अपनी सरकार बचा ना पाए। फिर
अगले दो साल में पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। बंगाल में तो कांग्रेस समाप्त ही हो चुकी है। मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। ममता बनर्जी की कांग्रेस से नाराजगी जग जाहिर है। लोकसभा में टीएमसी ने अकेले भाजपा का मुकाबला किया और कांग्रेस को साथ रखने की जहमत ही नहीं उठाई। ऐसे में कांग्रेस को बंगाल में कड़ा चुनौती मिलेगी। फिर आसाम में हेमंता विश्वसरमा के होते कांग्रेस के बुरे ही आसार हैं ,राहुल से उनकी नाराजगी जग जाहिर है और वो आसाम में कांग्रेस को फैलने का मौका ही नहीं देंगे। रही बात UP की तो भई बिहार की हार के बाद अखिलेश और ज्यादा चौकेने हो गए हैं, यहां भी अब दो लडको की जोड़ी दोबारा बनने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं ।
