Politics क्यों भाषा की मर्यादा सबसे निचले स्तर पर पहुंची—सांसद कर रही हैं भौं भौं
राजनीती में लग रहा है कि भाषा की कोई मर्यादा नहीं रही है जिसका जो मन वही बोल, हाल फिलहाल की तीन खबरों की बात करें तो पता चल जाएगा कि राजनीती में भाषा का स्तर कितना नीचे पहुंचा दिया गया है, इसमें जिसमें देवी देवताओं से लेकर हिंदू धर्म और संसद की मर्यादा तक को Ignore करके नेताओं ने बयान दिए हैं, और बड़ी बात है कि सब पड़े लिखे नेता हैं, कोई कम पढ़ालिखा नेता बोले तो लगता है कि शायद अशिक्षित होने के कारण ऐसा किया गया है , पर आजकल गलत शबदों का जो प्रयोग हो रहा है वो कल्पना से परे हैं क्योंकि कईं बार below the belt दूसरे पर कमेंट किए जा रहे हैं।
जया भादुडी़ को लगता है कि संसद में उनका दिमाग खराब हो सकता है

सबसे पहले जया भादुड़ी की बात करते हैं, अपने समय की अभिनेत्री रही हैं और अब लंबे समय से सांसद भी हैं पर अपने गुस्से और दूसरों के साथ बदतमीजी करने में इनका नाम सबसे पहले आता है , संसद में खडे खड़े वो किसी पर भी टिप्पणी कर देती हैं , बाहर किसी का भी अपमान करने में माहिर हैं और हाल ही में उनकी एक टिप्पणी काफी वायरल हो रही है , उन्होंने एक जगह कहा कि संसद के शोर से उन्हें सुनने में दिक्कत होने लगी है कान खराब हो गया, भगवान का शुक्र है कि दिमाग नहीं खोया! यब बात चाहे जया ने बड़े हल्के फुल्के अंदाज में कही पर साफ तौर पर संसद और उसके सदस्यों पर करारा तंज था, वैसे खुद जया भादुड़ी सांसद है और संसद की मर्यादा पर यह तंज उन्हें कहीं से शोभा नहीं देता।
Congress की रेणुका चौधरी ने सांसदों की तुलना कुते से की

एक और नेता की बात करते हैं रेणुका चौधरी , कांग्रेस की नेता है और कांग्रेस में जिस तरह से हाल फिलहाल में भाषा की मर्यादा का उल्लंघन लगातार हो रहा है और उस पर जो है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है वो चुप्पी बैठे हैं तो दिन पर दिन कांग्रेसी नेताओं के हौसलें बढ़ते जा रहे हैं, लगने तो यही लगा है कि जो मोदी या हिंदू धर्म के बारे में जितना गंदा बोलेगा, उतना ही गांधी परिवार से वाहवाही मिलेगी। एक कुत्ते को लेकर कार में संसद के अंदर प्रवेश कर लेते हैं और जब उनसे पूछा गया कि आप कुत्ते को लेकर संसद में क्यों जा रही हैं? तो उनका क्या जवाब था? उनका कहना था कि ये कुत्ता काटता नहीं है लेकिन जो अंदर लोग बैठे हैं वो काटते हैं। कंपैरिजन देखिए और यही नहीं जब बाद में उनसे इस बारे में पूछा गया तो वो मीडिया के सामने लोगों के सामने भौ भौं करती है और वहां से चली जाती है। इतनी वरिष्ठ नेता है रेणुका चौधरी और उसके बाद वो तुलना कुत्ते की किससे कर रही हैं।
कांग्रेस के महानुभव हिदू देवी-देवताओं का खुलेआम अपमान

एक और महानुभव है। कांग्रेस के नेता भी हैं और तेलंगाना के सीएम भी है रेवंता रेड्डी। यह भी अपने विवादित बयानों के कारण बहुत ज्यादा चर्चाओं में रहते हैं। उनके बयान काफी वायरल होते हैं। काफी हंगामा होता है लेकिन कुछ होता नहीं है। एक के बाद एक ये इस तरह की गंदी भाषा का प्रयोग करके बयान दे देते हैं। और ये ऐसा हो रहा है लगातार जैसा कि हम कह रहे हैं कि इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ना जनता की तरफ से होती है ना इनके अपने नेताओं की तरफ से होती है ना कोई केस फाइल होता है। बस ये लोग बोलते रहते हैं। हाल ही में रेवंता रेड्डी जी कहते हैं कि हिंदुओं के 3 करोड़ देवी देवताएं होते हैं। इतने सारे क्यों होते हैं? जो कुंवारे हैं उनका अलग देवता हैं, हनुमान जी हैं, जो शराब पीते हैं उनका अलग देवता है। जो शाकाहारी हैं उनका अलग देवता है। जो मांस खाते हैं उनका अलग देवता है। तो इस तरह की एक गंदी टिप्पणी जो है धर्म को लेकर की गई और इस पर काफी हंगामा भी हुआ लेकिन हंगामा होने का फर्क शायद इन नेताओं को पड़ता नहीं क्योंकि इससे पहले भी रेवंता रेड्डी ने बहुत ही बदतमीजी की थी
कांग्रेस ने नेता पहले भी कर चुके Below the Belt कमेंट

रेवंता ने बिहार के लोगों पर एक बहुत ही गंदा कमेंट दिया था और कमेंट कब दिया था? 2023 में जब नीतीश कुमार और लालू यादव और कांग्रेस की सरकार थी उस समय जो है रेवंता रेड्डी जो बयान देते हैं वो कहते हैं कि बिहारियों के डीएनए से बेहतर है हमारा डीएनए तो बिहारी जो है उनके अनुसार बिल्कुल नीचे नीचे कास्ट है और हम जो है अपर कास्ट है हमारा डीएनए बहुत ज्यादा बेहतर है और चर्चा ये भी हुई थी कि इसके थोड़े दिन बाद ही नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया था, वैसे रेड्डी बहुत मशहूर है अपनी गंदीमभाषा के प्रयोग से जो मर्यादा का ध्यान नहीं रखते। इससे पहले उन्होंने राहुल गांधी को लेकर ये भी कहा था कि राहुल गांधी की राजनीति में जो भी इंटरफेयर करेगा जो भी करेगा उसको हम सबक सिखा देंगे। हम मोदी की बाह मोड़ देंगे। तो इस तरह की अभद्र भाषा लगातार बढ़ रही है इस पर किसी का काबू नहीं है। कई बार जो थोड़े सभ्य लोग हैं जिनको बहुत ज्यादा पिंच होता है वो कोर्ट चले जाते हैं। कोर्ट उनको बोलता है कोर्ट जाकर कई नेता माफ़ी भी मांग लेते हैं। लेकिन ये जो प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, यह बहुत ही चिंता का विषय है कि भाषा की मर्यादा हर तरफ़ से ख़त्म हो रही है। और यहां पर किसी एक पार्टी का नाम नहीं ले रहे क्योंकि सभी दलों के नेता एक दूसरे से आगे हैं। कोई कुछ भी बोल देता है, किसी को कुछ भी कह देता है और जैसे कि हमने पहले भी कहा कि below the belt कमेंट करने का सिलसिला बन चुका है , अब यह जनता के हाथ में है कैसे इन नेताओं को सबक सिखा सकती है, क्योंकि उसके पास ही एक अचूक हथियार है, वोट देने का हथियार।
