UP – घुसपैठियों को बाहर निकालने योगी का गजब खेला
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में SIR लागू करने और तमाम घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए अलग ही रास्ता निकाला है, इसके लिए उन्होंने सीधे जनता से घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें समय रहते बाहर करने के लिए सहयोग मांगा है।पोस्ट में योगी ने बहुत ही विनमता अपनाते हुए कहा कि अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकलना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपी को आगे बढ़ाना, उसकी सुरक्षा हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है । ये पत्र काफी वायरल भी हो रहा है और योगी के इस तरीके की तारीफ भी हो रही है क्योंकि जोर जबरदस्ती की जगह योगी संयम और प्यार से जनता का सहयोग लेते हुए sir के काम को अंजाम देना चाहते हैं, यही नहीं योगी ने घुसपैठियों की सही पहचान के लिए एक और नीती अपनाई है उन्होंने SIR के काम के लिए बांग्ला भाषी लोगों का सहयोग लेने को भी कहा , योगी का मानना है कि बांग्ला भाषी लोग घुसपैठियों की बोली उनका हाव-भाव आसानी से पहचान सकते हैं , जिससे किसी देश के नागरिक पर घुसपैठि होने का दोष ना लग सके। देखना यही है कि इतनी जनसंख्या वाले यूपी में योगी का जनता से सहयोग का फार्मूला कितना सफल रहता है। वैसे हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भी घुसपैठियों के लिए एक कड़ी टिप्पणी करते विपक्ष की बोलती बंद कर दी थी, कोर्ट ने हुए कहा था कि घुसपैठियों के लिए लाल कालीन नहीं बिछाया जा सकता है।

BIHAR —तेजस्वी मिली जबरदस्त हार पर यहां नीतीश-बीजेपी दोनों को झुकाया

बिहार में नीतीश की जीत में महिलाओं का बड़ा हाथ बताया जा रहा है , माना जाता है नीतीश की बहुत सी योजनाएं केवल और केवल महिलाओं के लिए ही चल रही हैं और महिलाएं नीतीश की permanent voters ही मानी जाती है, लेकिन जब महिलाओं को power देने, विधानसभा पहुंचाने की बात आती है तो हर दल की तरह नीतीश सरकार भी उनकी उपेक्षा करती नजर आती है , जी हां इस समय देखा जाए तो नीतीश सरकार में और विधानसभा में महिलाओं की संख्या आधी तो क्या एक चौथाई भी नहीं हैं। चर्चाएं चल रही हैं कि आधी आबादी ने बिहार में एनडीए को 200 का आंकड़ा पार तो करा दिया, पर खुद के लिए विधानसभा में एक चौथाई सीटे भी नहीं पा सकी। यही हाल और दलों का भी है पर आश्चर्य की बात है कि RJD चाहे NDA से जबरदस्त हारी है पर महिलाओं का चुनाव में खड़ा करने में उसने बाजी मार ली , जी हां तेजस्वी ने 2025 के चुनाव के लिए 23 महिलाओं को टिकट दिया था और उसके सहयोगी दल कांग्रेस ने 6, वीआईपी ने एक और वाम दलों ने एक महिला को ही चुनावी जंग में उतारा था, दूसरी तरफ पार्टी बीजेपी ने 13 महिलाओं को नीतीश कुमार ने भी 13 महिलाओं को टिकट दिया था, वहीं उसके सहयोगी दल चिराग पासवान की पार्टी ने 5 महिलाओं जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने दो महिलाओं को टिकट दिया था और तमाम दलों ने जब इतनी कम संख्या में महिलाओं को मौका दिया तो जाहिर सी बात है कि विधानसभा में बहुत ही कम महिलाएं पहुंची हैं , इस बार 2357 पुरुषों ने चुनाव लड़ा जबकि 258 महलाएं ही उम्मीदवार थी। पर शर्मनाक बात यह भी है कि खुद जनता भी महिलाओं को वोट देने में कंजूस है , यही कारण है केवल 29 महिलाएं जीत कर विधानसभा पहुंची इनमें से भी 25 ने एनडीए के टिकट पर चुनाव लड़ा था, मतलब महिलाओं से ज्यादा पार्टी और दल को देखकर वोट किया गया।
