Maharashtra-शरद पवार का खेला क्या BJP को फायदा

महाराष्ट्र में जल्द ही स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले तमाम तरह की राजनीतिक हचलच तेज हो गई है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा चाचा शरद पवार और अजीत पवार के हाथ मिलाने को लेकर हो रही है, जी हां पता चला है कि डिप्टी सीएम अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवड में अपने चाचा शरद पवार की पार्टी NCP(SP) से गठबंधन करने की घोषणा कर डाली है, आपको बता दें कि NCP के विभाजन के 2 साल बाद चाचा भतीजा एक साथ चुनाव लडने की तैयारी कर रहे हैं और इसके पीछे दोनों का ही मतलब छुपा हुआ है। जहां पुणे को पवार परिवार का गढ़ कहा जाता है वहीं, बृह्नमुंबई नगर निगम के बाद पिंपरी चिंचवड नगर निगम की सबसे समृद्ध सीट मानी जाती है और 2017 से यहां NCP का कब्जा है। ऐसे में ना शरद पवार और ना ही अजीत पवार चाहते हैं कि यह सीट विपक्ष तो क्या उनके साथी दलों के पास चली जाए यही बड़ी वजह है कि पार्टी टूटने के बाद भी इस सीट पर दोनों ने अजि एक-साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया, पर इस गठबंधन को बीजेपी और एकनाथ शिंदे की पार्टी बिल्कुल अलग ढंग से देख रही है , जहां भाजपा नेता नवनीत राणा कहते हैं कि शरद पवार के ही कहने पर अजीत पवार भाजपा में शामिल हुए थे और अब जब वो एकजुट हो गए हैं तो उम्मीद है कि शरद पवार भी जल्द हमारे गठबंधन में शामिल हो जाएंगे, वहीं एकनाथ शिंदे की पार्टी ने इसकी आलोचना की और साफ कहा कि बेशक वो साथ लड़ें पर अब महाराष्ट्र में नाम की राजनीति नहीं चलेगी और लोग पवार नाम पर मतदान नहीं करेंगे।

UP—पहले पूरे नौकरशाह पर राज आज सूपड़ा है साफ


कहते हैं ना राजनीती में कोई किसी का सगा नहीं होता और गद्दी कभी किसी एक की होकर नहीं रहती, देखें तो मायावती के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है, किसी समय यूपी में किसी महारानी की तरह राज करने वाली मायावती का राजनीती से बिल्कुल सुपड़ा साफ हो रहा है , हाल ये है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती का केवल एक नेता चुन कर आया था, उमा शंकर सिंह एकमात्र BSP के विधायक हैं और उससे भी ज्यादा BSP की बुरी गत बनने वाली है और 36 साल बाद पहला ऐसा मौका आने वाला है जब BSP का कोई भी प्रतिनिधि संसद के किसी भी सदन में नहीं होगा। जी हां वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश के 10 राज्यसभा सांसद रिटायर हो जाएंगे। और इसका सबसे बड़ा असर बहुजन समाज पार्टी पर पड़ने वाला है। जो समीकरण चल रहे हैं इससे साफ है कि अभी है कि BSP को अगले साल होने वाले राज्यसभा चुनाव में किसी तरह की सीट नहीं मिलेगी, इससे पहले 2024 में भी लोकसभा चुनाव में BSP को कोई सीट नहीं मिली थी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद ही BSP ने रामजी गौतम वर्ष को राज्यसभा भेजा था जो 2026 में रिटायर हो जाएंगे इसके बाद संसद के दोनों सदन मायावती और उसकी पार्टी के लिए बंद ही लगते हैं।

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