RAJASTHAN – कांग्रेस सांसद बहाने चले उल्टी गंगा बुरे फंसे

अभी तक तो सुनने में आता है कि राज्य के सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्य के लिए मिलने वाले एमपीएलएडी फंड कम मिलने से परेशान रहते हैं और इसे बढ़ाने की बात करते रहते हैं पर खबर है कि कुछ सांसद अपने फंड को अपने राज्य में इस्तेमाल ना करके किसी दूसरे राज्य के विकास में लगा रहे हैं और चर्चा यही चल रही है कि क्या इन्हें कुछ ज्यादा ही फंड मिल गया है पर ऐसा कुछ हुआ नहीं है और गजब यही है कि राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसदों ने अपने क्षेत्र के विकास कार्य को साइड में करके जिसमें सार्वजनिक पुस्तकालय, सड़कें, स्कूलों और कॉलेजों में कक्षाओं का निर्माण तक शामिल था, अपने विकास फंड का एक बड़ा भाग हरियाणा के एक क्षेत्र के विकास में खर्च कर दिया । अब ये उल्टी गंगा बहाएगी तो राजनीतिक गलियारों में विवाद तो उठेगा ही, और इसी पर बीजेपी ने कांग्रेस को घेर लिया है। इससे भी ज्यादा विवाद इस बात पर हो गया कि हरियाणा का ये क्षेत्र कैथल है और यहां पर कांग्रेस के कद्दावर नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य विधायक हैं।अब राजस्थान के तीन कांग्रेसी सांसदों की कैथल पर मेहरबानी को बीजेपी ने आड़ों हाथों ले लिया है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे राजनीतिक मिलीभगत और परिवारवाद से जुड़ा बताया है। वैसे दूसरी तरफ कांग्रेस का अपनी सफाई में यही कहना है कि एमपीएलएडी फंड सांसद देश में कहीं भी विकास कार्यों के लिए खर्च कर सकते हैं इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं है।अब जनता खुद बहुत समझदार है पूरे खेल को वो अपने आप समझ जाएगी।

Maharashtra- BMC चुनाव अपने ही पैदा कर रहे हैं BJP के लिए समस्या

माना जाता है कि मुंबई का नगर निगम सबसे धनी एजेंसी में से एक है और यही कारण है इसपर कब्जा पाने के लिए हरेक दल कईं बार बिधानसभा चुनावों से भी ज्यादा कोशिश करता है, अब मुंबई में 15 जनवरी को BMC चुनाव हैं और बीजेपी गठबंधन से लेकर शरद पवार, उद्वव के गठबंधन और कांग्रेस मुंबई का मेयर अपनी पार्टी का बनाने के लिए एक एक वोट के लिए लड़ रहे हैं। इन सब के बीच एक खबर ने बीजेपी खेमे को थोड़ा परेशान कर डाला है, जी हां एनडीए के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज ने भी इन चुनाव में ना केवल एंट्री की है बल्कि अजीत पवार की पार्टी को सपोर्ट करने का एलान करके सबको चौका दिया है। जैसा की अजित पवार ने घोषणा कर रखी है कि वो ये चुनाव बीजेपी-शिवसेना से अलग होकर लड़ रहे हैं। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर का अजीत पवार को सपोर्ट करना एनडीए के लिए थोड़ी परेशानी तो खड़ा कर ही सकता है। पता चला है कि सोहलदेव पार्टी के महाराष्ट्र ईकाई के अध्यक्ष उमाशंकर राजभर ने इसके बारे में अजीत पवार की पार्टी को समर्थन की चिट्‌ठी भी दे दी है। वैसे आपको बता दें कि यूपी में भी ओमप्रकाश राजभर की योगी सरकार के साथ तनातनी की खबरें चल ही रही हैं और राजभर के महाराष्ट्र नें ऐसा करने से इस खबर को और दम मिला है।वैसे आपको बता दें कि मुंबई बीएमसी चुनावों में उत्तर भारतीय voters किसी की हार जीत करवाने में अहम भूमिका निभाते हैं और बीजेपी को उत्तर भारतीयों का एकतरफा समर्थन मिलने की आस पर क्या ओम प्रकाश राजभर पानी फेर सकते हैं यह तो समय ही बताएगा। वैसे यह चुनाव कांग्रेस ने भी अकेले लड़ने का फैसला किया हुआ है और कांग्रेस ने शरद पवार और ठाकरे ब्रदर्स का साथ छोड़ प्रकाश आंबेडकर की अगुवाई वाली वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंध किया है।

Tamilnadu चाणक्य की नई रणनीती कामयाब होगी क्या

तमिलनाडू में भी जल्दी चुनाव होने वाले हैं और पता चला है कि बीजेपी चाणक्य ने इस बार यहां ज्यादा से ज्यादा सीट लाने के लिए तमाम तरह की रणनीती बनानी शुरू कर दी है और इसी रणनीती के तहत बीजेपी चाणक्य कोशिश कर रहे हैं कि तमिलनाडू के मशहुर अभिनेता जो अब राजनेता भी बन गए हैं, जी हां यहां हम फिल्म स्टार विजय की ही बात कर रहे हैं तो BJP की कोशिश है कि विजय की पार्टी तमिलनाडु वेत्री कज़गम (TVK) के साथ गठबंधन की संभावनाओं तलाशी जाएं। यह जरूरी भी है क्योंकि लाख कोशिशों के बाद भी बीजेपी इस राज्य में अब तक कुछ खास नहीं कर पाई है। 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने राज्य की 234 सीटों में से केवल चार सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनावों में तो बीजेपी खाता भी नहीं खुला था।ऐसे में पता चला है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राज्य के एक कोर कमेटी की बैठक में पार्टी नेताओं चुनाव लड़ने से ज्यादा जीतने पर ध्यान देने का पाठ पढाया है और इसके लिए सभी संभावनाओं पर ध्यान देने को भी कहा आपको बता दें एक्टर विजय ने हाल ही में एक बयान दिया था और कहा था कि तमिलनाडु में कांग्रेस कमेटी के वर्तमान नेतृत्व का व्यक्तिगत हित, व्यावसायिक या वित्तीय हित, उन्हें उनकी पार्टी के साथ बातचीत शुरू करने से रोक सकते हैं।इसके बाद ही बीजेपी को उम्मीद जगी है कि विजय उनके साथसकते हैं और चर्चा यह भी है कि बीजेपी नेता जानबूझकर सहयोगी एआईएडीएमके पलानीस्वामी (EPS) से भी मुलाकात नहीं कर रहे हैं । ताकी सभी को संदेश दें कि एनडीए को सभी डीएमके विरोधी ताकतों को एक साथ लाना चाहिए और चुनावी लड़ाई एनडीए और डीएमके के बीच होनी चाहिए।

 

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