BJP में तकरार क्या नुकसान होगा 

 

अभी हाल फिलहाल में तिरुवनंतपुरम के मेयर का निर्वाचन हुआ है। वीवी राजेश जो है वो भारतीय जनता पार्टी के पहले मेयर निर्वाचित हुए हैं। लेकिन इस निर्वाचन को लेकर के एक विवाद हो गया है।कि भाजपा वहां पहली बार म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में अपना अपनी पैठ बना पाई है और उनका पहली बार मेयर बना है। तो इस तरह के इस तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि जो एक आईपीएस अधिकारी थी श्रीलेखा डीजीपी थी केरल की और वो आर श्रीलेखा वो भारतीय जनता पार्टी में आई थी। उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत करके आई और ऐसा वो उम्मीद कर रही थी कि उनको मेयर बनाया जाएगा। उनका दावा यह है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनसे प्रॉमिस किया था। लेकिन वीवी राजेश को मेयर बना दिया गया। उसके बाद उन्होंने एक चैनल से बात करते हुए ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल से बात करते हुए अपनी नाराजगी जताई और यह कहा कि जनता ने उन्हें एक्सेप्ट किया है इसलिए वो जनता को सर्व करती रहेंगी। लेकिन प्रॉमिस उनसे किया गया था कि उनको मेयर बनाया जाए और वह यहां तक कह रही हैं कि वह तो चुनाव लड़ने के लिए नहीं तैयार थी। लेकिन जब उनसे यह प्रॉमिस किया गया कि मेयर उन्हीं को बनाया जाएगा अगर जीतती है भारतीय जनता पार्टी तो लेकिन ऐसा नहीं हुआ इस बात को लेकर के भारतीय जनता पार्टी में क्रैक नजर आ रहा है। सहमति नहीं नजर आ रही है और विरोध करने वाले लोग हैं वह खुलकर के सामने आ रहे हैं। सामान्यत भारतीय जनता पार्टी में इस तरह की चीजें नहीं होती हैं। लेकिन यह हुई हैं और इसको जो है केंद्रीय नेतृत्व ना केवल संज्ञान में लेगा बल्कि सावधानी बरतेगा इसलिए कि अगर इस तरह की स्थिति रहती है तो फिर जो 26 का विधानसभा चुनाव होने वाला है उसमें भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किलें आ सकती हैं। अगर भारतीय जनता पार्टी को कुछ बढ़िया करके दिखाना है केरल में विधानसभा के चुनाव में तो सबको एकजुट रहना होगा। एक साथ काम करना पड़ेगा। हो सकता है भारतीय जनता पार्टी जो श्रीलेखा हैं उनको विधानसभा के चुनाव में भी मौका दें और उनको विधायकी का चुनाव लड़ाएं। इस तरह की पूरी संभावनाएं हैं। तो अब आगे क्या होता है उस पर तो आने वाला समय बताएगा लेकिन अभी नाराजगी है क्रैक्स नजर आ रहे हैं पार्टी में जो पार्टी के लिए चिंता का कारण है।

बड़ी वजह है जो Supreme Court से भी जमानत नहीं मिली

सुप्रीम कोर्ट ने भी सरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत को रिजेक्ट कर दिया है। डिनाई कर दिया है। अब इसको लेकर के एक नैरेटिव चल रहा है या पहले भी नैरेटिव चलाया जा रहा था। जब लगातार यह बात कही जा रही थी कि वो 5 साल से जेल में है। बेल नहीं मिली। वो मुस्लिम है इसलिए उसको बेल नहीं मिल रही है। और यहां तक कि बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से सरजील उमर खालिद के फादर को अमेरिका बुलाया गया।अमेरिका में उनकी ममदानी से मुलाकात हुई और उसके बाद ममदानी के एक रिटेन हैंड रिटन मैसेज को शेयर करके यह बताया गया कि अब तो ममदानी ने भी कह दिया है और उसके अलावा सात जो कांग्रेस मैन है अमेरिका के उन्होंने भी सरजील इमाम को जमानत देने की बात कही। तो ये बाकायदा एक इको सिस्टम ने काम किया और लगातार जो भारत में है एक इकोसिस्टम उसमें कांग्रेस के भी लोग शामिल हैं। लेफ्ट के लोग भी शामिल हैं। निश्चित तौर पर मुस्लिम जो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हैं उसमें मैं किसी का नाम नहीं लेना चाह रहा हूं। वो लगातार ये कैंपेन चला रहे थे कि 5 साल हो गया जमानत नहीं मिली, जमानत नहीं मिली। इन सारे कैंपेन के बावजूद भी सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को ध्यान रखा कि अदालत और कानून सम्मत क्या है? जि तरह के अपराध वैसा नहीं है। अगर केवल मुस्लिम का आईडिया होता तो जिन पांच लोगों को जमानत मिली है वो सारे के सारे मुस्लिम है। लेकिन अदालत ने इन दोनों लोगों के बारे में स्पेसिफिकली बात कही कि इन दोनों लोगों की प्राइमा ऑफसी भूमिका और इनके रोल और इनकी जो जिस तरह से इन लोगों ने काम किया है इस पूरे दंगे को मास्टरमाइंड किया है। इसलिए इनको जमानत नहीं दी जानी चाहिए और इसीलिए उनको जमानत नहीं दी गई। इस दंगे में 53 मासूम लोग मारे गए और यहां तक कि एक आईबी का पुलिस वाला मारा गया। एक आईपीएस ऑफिसर का ड्राइवर मारा गया। आईपीएस ऑफिसर को गोली लगी थी। दूसरा जो महत्वपूर्ण बात यह है कि उमर खालिद का जो पॉलिटिकल ओपिनियन जिसको लोग कहते हैं वो ये है कि जम्मू कश्मीर जो है वो इंडिया जो है वो जम्मू कश्मीर पर गलत तरीके से कब्जा करके रखा हुआ है। इंडिया इज इन इललीगल ऑक्यूपेशन ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर। ये उनका बयान था। दूसरा जो सरजील इमाम को लेकर के है। सरजील इमाम लगातार यह बात करते रहे हैं कि 5 लाख मुसलमान अगर इकट्ठे हो जाए तो चिकन नेक कब्जा करके नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग किया जा सकता है और ये करना पड़ेगा अगर अपनी मांगे मारी है। तो इसके बाद क्या इनको जमानत मिलनी चाहिए? यह देश के खिलाफ वेजिंग वॉर कहा जाता है।

मंदिर में दीप तो जलेगा ही

मद्रास हाई कोर्ट ने एक बार फिर दीपोत्थान पर एक बार वहां पर दीप जलाने के लिए हिंदुओं को अनुमति दे दी है और यह कहा है कि ये जो सरकार है वहां पर मतलब डीएम के सरकार या जो बोर्ड है जो ये कह रहा है कि वहां दीप नहीं जलना चाहिए वो गलत है। उसको हिंदुओं को वहां दीप जलाने की अनुमति दी जाएगी। इस पूरे मामले में जब जीआर रामास्वामी का जजमेंट आया था तो उसको लेकर के ना केवल डीएमके ने विरोध जताया था वो उनके अपीजमेंट उनके इंपीचमेंट तक के लिए उन्होंने लोकसभा में अर्जी दे दी है। बल्कि लगातार हिंदू संगठनों के प्रयासों के बावजूद उसको फॉइल किया गया। जबकि झंडा फहराने की इजाजत जो वहां पर सिकंदर शाह की मजार है वहां पर दिया गया। लेकिन हिंदुओं को दीप जलाने की अनुमति नहीं दी गई। जबकि पूरा का पूरा इलाका या पूरी की पूरी पहाड़ी जो है वो मुर्गन स्वामी के नाम से है और यह हजारों साल से वहां चलाया जा रहा है। जबकि ये जो सिकंदर शाह साहब है इनकी मजार कब आई कैसे आई उसके बारे में बहुत कुछ वो नहीं है। अब ये जो है डिवीजन बेंच जो है जस्टिस जी जयचंद्रन और के के रामकृष्णन ने जो सिंगल बेंच का आर्डर था उसको एंडोर्स किया है। तो कुल मिलाकर के ये जो लगातार हिंदुओं के खिलाफ चल रहा है मामला उसको अदालत ने एक बार फिर उसको नकारते हुए अदालत ने वहां पर हिंदुओं को अपनी पूजा करने की की इजाजत दे दी और वहीं पर जो दीपोत्थान जहां पर वोल पिलर है जहां पर जलाने की बात की वहीं पर दीप जलाने की इजाजत दी है।

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