Priyanka Gandhi गई आसाम — कद बड़ा या छोटा किया गया

हाल ही में प्रियंका गांधी को आसाम स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है और उसके बाद से हर जगह यही चर्चा चल रही है कि कांग्रेस में प्रियंका गांधी का कद बढ़ गया है। प्रियंका गांधी को इतना महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दे दिया गया है जो अभी तक किसी को नहीं दिया गया। लेकिन वास्तव में जो नेता प्रियंका गांधी के करीब है और जो चाहते है प्रियंका गांधी आगे बढ़े चर्चाएं चल रही है कि वो दबे स्वरों में कह रहे हैं कि ये जो कद बढ़ाने कीबात कर रहे हैं वास्तव में प्रियंका गांधी का कद छोटा किया गया है और प्रियंका गांधी का जो रुतबा है जो उनका कद है उसके हिसाबसे उनको यह काम जो दिया गया है बहुत ही छोटा काम है मामूली सा काम है इसमें कोई बड़ी बात नहीं है अब ये क्यों कहा जा रह है इसको समझने की कोशिश करते हैं ।
क्या काम है Screening Committee का

सबसे पहले स्क्रीनिंग कमेटी का काम क्या होता है? स्क्रीनिंग कमेटी का काम है, जो भी उम्मीदवार आसाम में लड़ना चाहता है उनके नामों का चयन अब ये स्क्रीनिंग कमेटी करेगी जिसकी अध्यक्ष प्रियंका गांधी को बनाया गया है। तो एक काम ये होता है। दूसरा कि जो भी दल गठबंधन करना चाहता है कांग्रेस के साथ आसाम में छोटे-छोटे दल य बड़े दल वो कौन से दल है जिनके साथ सेटिंग है उनको कितनी सीटें मिले? कौन से उनके उम्मीदवार हो? इन तमाम बातों की चर्चा में स्क्रीनिंग कमेटी का भी हिस्सा होता है उनकी जो राय है वो इंपॉर्टेंट होती है। तो यह काम होता है स्क्रीनिंग कमेटी का। अब जानते हैं कि प्रियंका गांधी को वहां भेजकर कांग्रेस ने क्या गेम खेला है जो नहीं चाहते। कुछ ऐसे नेता हैं राहुल गांधी कहिए या खुद सोनिया गांधी कहिए कि अंदर ही अंदर जो नहीं चाहते कि जो कद है प्रियंका गांधी का वो बढ़े।
अपनी पसंद से कैसे कर पाएंगी उम्मीदवारों का चयन
कम ही लोग यह जानते होंगे कि आसाम में चुनाव प्रभारी जितेंद्र सिंह को बनाकर भेजा गया है और उन्होंने बहुत पहले से ही वहां पर काम करना शुरू कर दिया गया है। अब जाहिर सी बात है जब एक कद्दावर नेता पहले से ही वहां मौजूद है आसाम के बारे में उसने काम करना शुरू कर दिया अंदर जाकर के उसको पूरा समय मिल गया आसाम की जो पूरी ज्योग्राफी है उसको समझने के लिए। उसका जो कल्चरल स्ट्रक्चर है, जो पॉलिटिकल स्ट्रक्चर है, जो सोशल स्ट्रक्चर है, उसके बारे में पूरी जानकारी लेनी शुरू कर दी है जितेंद्र सिंह ने, और अब प्रियंका गांधी को वहां भेजा गया है। तो जाहिर सी बात है काफी हद तक डिपेंडेंसी प्रियंका गांधी की जितेंद्र सिंह पर रहेगी जब वो नामों का चयन करेंगी , क्योंकि खुद का प्रियंका गांधी का होमवर्क अभी नहीं है। वो नहीं जानती आसाम के बारे में। दूसरा गौरव गोगई की यहां बात करें। गौरव गोगई जाहिर सी बात है कि वो आसाम में पले बड़े हुए हैं। उनके जो फादर हैं चीफ मिनिस्टर रह चुके हैं। गौरव गोगई को आसाम का बच्चा-बच्चा जानता है। और वो आसाम का पूरा कल्चरल , सोशल, पॉलिटिकल, ज्योग्राफिकल है पूरा वो गौरव गोगई को रटा पड़ा है। गौरव गोगई उससे भली-भांति परिचित हैं। और ऐसे में बिल्कुल जाहिर सी बात है जब प्रियंका गांधी वहां जाएंगी उम्मीदवारों का नाम जो है सेलेक्ट करेंगे और गौरव गोगोई अगर उनको कहते हैं कि फला उम्मीदवार को आप लीजिए क्योंकि इसका अपने एरिया में पैठ ज्यादा है तो क्या प्रियंका गांधी उसको मना कर पाएंगी और क्या प्रियंका गांधी अपनी पसंद का कोई उम्मीदवार चुन पाएंगी क्योंकि खुद प्रियंका गांधी आसाम में बिल्कुल नई हैं , ऐसे में साफ है कि प्रियंका को उम्मीदवारों के चयन के लिए पूरी तरह से गौरव गौगई और जितेंद्र सिंह पर निर्भर रहना पडेगा।
Priyanka Gandhi —नहीं जानती आसाम के बारे में कुछ भी

और अगर ऐसा नहीं है तो प्रियंका गांधी वहां जाकर रोज सभाएं करें, जमीनी तौर पर लोगों से मिलने जाएं, प्रियंका गांधी को समझ में आना चाहिए कि आसाम के लोग क्या चाहते हैं और कांग्रेस की स्थिति वहां पर क्या है? ग्राउंड लेवल पे कांग्रेस की स्थिति क्या है और कौन-कौन से उम्मीदवार हैं जिनको लोग पसंद करते हैं? कौन से नेता ऐसे हैं जो जमीनी लोगों से जुड़े हैं और जिनको अगर टिकट दिया जाए वो कांग्रेस की जीत का भरोसा कर सकते हैं। लेकिन समझना यही है कि क्या प्रियंका गांधी इतनी मेहनत कर पाएंगी या उनके पास इतना समय बचा है और ना वो इतना टाइम आसाम को अब दे सकती है और ऐसे प्रियंका गांधी को उम्मीदवारों के चयन के लिए जितेंद्र सिंह और के ऊपर होगी और गौरव गोगोई के बीच के ऊपर ही निर्भर रहना होगा। अपनी अपनी मर्जी से प्रियंका गांधी किसी भी तरह का नाम का चयन नहीं कर पाएंगी। ये एक बड़ी बात है और इसको नजरअंदाज करके एक नैरेटिव बनाया जा रहा है कि प्रियंका का कद बढ़ाया गया है लेकिन कद तो बड़ा नहीं है। कद छोटा ही है इनका और वो इन दोनों लीडर्स के की मदद के बिना कुछ नहीं कर पाएंगी।
Priyanka Gandhi की बढ़ती लोकप्रियता सबकी आंखों में खटकी

जिस तरह से प्रियंका की लोकप्रियता बढ़ रही है , इस कारण कहा जा रहा है कि आसाम उनके साथ एक गेम खेला गया है, सब जानते हैं हेमंता विश्वकर्मा की कितनी पैठ है। 10 साल से वहां काबिज हैं वहां पर हेमंता विश्वकर्मा और जो वो कर रहे हैं काफी बड़ी संख्या में लोग उनके फेवर में हैं। उनकी पूरी पैठ है। तो ऐसे में प्रियंका गांधी को वहां भेज के एक तरह से गेम खेला गया है। एक तरह से बलि का बकरा बनाया गया है, बलि का बकरा क्यों है? क्योंकि आसाम में पहले से हेमंता विश्वकर्मा की बहुत बड़ी पैठ है और कांग्रेस का स्कोप इतना ज्यादा नहीं है। तो अगर कुछ गड़बड़ होती है आसाम में औरकांग्रेस की जीत नहीं आती जितना वो चाहती है उतनी सीटें नहीं आती है तो पूरा ठीकड़ा जो है वो प्रियंका गांधी और इमरान मसूद के सर पर डाल दिया जाएगा और कह दिया जाएगा कि बस की नहीं है, प्रियंका गांधी के साथ लग जाएगा कि प्रियंका गांधी कुछ नहीं कर पाई आसाम में। दूसरा अगर प्रियंका गांधी सक्सेस हो जाती है वहां पर आसाम में प्रियंका गांधी की वजह से अच्छी सीटें आ जाती हैं तो कांग्रेस को तब भी फायदा है क्योंकि पिछले 10 साल से कांग्रेस की सरकार वहां नहीं पर बन पा रही है , अगर प्रियंका गांधी की मेहनत की वजह से उनके काम की वजह से , कांग्रेस की सीट बढ़ जाती है, तो दोनों तरफ कांग्रेस को फायदा है। एक तरफ जो भेजा गया प्रियंका गांधी को एक तरफ से जुआ खेला गया है और प्रियंका गांधी के रुतबे के हिसाब से उनको यह पद नहीं दिया गया है। और अगर सोचा गया अगर कुछनहीं कर पाती तो कोई बात नहीं प्रियंका गांधी के ऊपर ये ठीकड़ा फूटेगा। किसी और का नाम सामने नहीं आएगा क्योंकि नाम उनका इतना वजनदार है ना आसाम में अगर कुछ गड़बड़ होती है गौरव गोगोई का नाम लिया जाएगा, ना जितेंद्र सिंह का नाम लिया जाएगा प्रियंका गांधी के ऊपर हार का ठिकड़ा फोड दिया जाएगा तो कुछ अच्छा हो जाता है और प्रियंका गांधी वहां बहुत मेहनत करती हैं, अगर अच्छी सीटें आ जाती है तब भी कांग्रेस को फायदा और नहीं कुछ होता तो प्रियंका का नाम लेकर हर कोई पल्ला छाड़ लेगा।
