एक लिस्ट जारी BJP को लगा 440 बाट का झटका

क्या एक राज्य का सांसद दूसरे राज्य के किसी क्षेत्र में अपने विकास कार्य का फंड खर्च कर सकता है, इस बार पर बीजेपी और कांग्रेस में जमकर भि़ड़ंत हो रही है, हाल ही में बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राजस्थान के तीन सांसदों के नाम लेकर आरोप लगया था कि उन्होंने कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को खुश करने के लिए उनके विधायक बेटे के क्षेत्र में विकास के लिए अपना फंड खर्च कर रहे हैं, मालवीय ने सवाल उठाए कि क्या एक राज्य का सांसद अपने फंड दूसरे राज्य पर खर्च कर सकता है, पर गजब हो गया जब राजस्थान कांग्रेस के महासचिव आरसी चौधरी ने एक सूची जारी करके बीजेपी नेताओं को जैसे 440 बाट का झटका दे डाला, जी हां चौधरी जी ने बीजेपी के आठ उन सांसदों की एक लिस्ट जारी कर दी जिन्होंने अपने कार्यकाल में दूसरे राज्यों को अपने फंड मुहैया कराए थे, बस इसके बाद से ही बीजेपी और कांग्रेसी नेता तलवार निकाले जैसे एक दूसरे पर वार कर रहे हैं, यहीं आरसी चौधरी ने जो सूची जारी की उसमें से आठ भाजपा सांसदों में से तीन तो राजस्थान के ही हैं, यही नहीं उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी दूसरे सांसद फंड दे रहे हैं, इसपर क्यों नहीं सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने के जबरदस्त आरोप लगाए हैं, वैसे बात तो सही है और ये कहावत भी खरी बैठती है कि अपने घर शीशे के हों तो दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फैंकते

 

BIHAR क्या नीतीश की पार्टी मठाधीश चला रहे हैं

 

आजकल नीतीश कुमार से रूठने वाले नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, अभी कुछ समय पहले ही बड़ी सख्या में मुस्लिम नेताओं ने वक्फ बोर्ड बिल को लेकर JDU को छोड़ा था और अब JDU के एक कद्दावर नेता डॉ. चंदन यादव ने पार्टी छोड़ JDU को जबरदस्त झटका दिया है। डा चंदन पिछले 20-22 सालों से पार्टी से जुड़े हुए थे, डा चंदन ने खुलकर आरोप लगाए हैं कि पार्टी के कुछ नेता संगठन से लेकर सरकार तक में अपने चहेतों को स्थापित कर रहे हैं और इसके कारण सालों से पार्टी से जुड़े ईमानदार कार्कर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इन नेताओं का ऐसा जाल बिछ गया है कि जिनकी जी हजूरी किए बिना न संगठन में कोई जिम्मेदारी मिलती है और न ही नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इस इस्तीफे और इन आरोपों के सामने आने के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि उनकी कमजोरी को फायदा उठाकर कुछ नेता उनकी नाक के ही नीचे अपनी मनमर्जी कर रहे हैं और पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ती जा रही है। नीतीश को समय रहते संभलना होगा, नहीं तो इस्तीफों की बढ़ती परंपरा किसी भी पार्टी के लिए अच्छी नहीं है।

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