BMC में गजब राजनीती Congress -BJP बने दोस्त बेचारे शिंदे बन गए विरोधी

महाराष्ट्र में BMC चुनाव प्रचार peak पर है और यहां 15 जनवरी को BMC समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होंने हैं, पर पर्दें के पीछे महाराष्ट्र की राजनीती में जो खेल चल रहा है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता , जी हां कहा जाता है कि राजनीती में बेमेल गठबंधन कोई नईं बात नहीं पर महाराष्ट्र में जब बीजेपी- कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन कर ले तो कहा जा सकता है कि बेमेल गठबंधन के मामले में महाराष्ट्र ने सबको पीछे छोड़ दिया। अब आपको बताते हैं कि ये असंभव बात कैसे संभव हो गई, दरअसल 20 दिसंबर को महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद् की 59 सीटों पर बीजेपी के साथ साथ उसके साथी दल अजीत पवार और एकनाथ शिंदे की पार्टी अलग अलग चुनाव लड़ी और इसमें एकनाथ शिंदें की पार्टी को सबसे ज्यादा 27 सीटे मिली पर पार्टी के किसी उम्मीदवार को नगराध्यक्ष बनाने के लिए 30 सीटे चाहिए ऐसे में बीजेपी ने खेला कर दिया और पता चला है कि कांग्रेस और अजीत पवार के साथ गठजोड करके बीजेपी नेताओं ने शिंदे ग्रुप को आउट करके अपनी नेता तेजश्री करंजुले को नगराध्यक्ष बनवा दिया, पर अभी भी यहां उल्टफेर जारी है और कुछ भी हो सकता है , अब बात करें अकोट नगर परिषद् की तो यहां भी अजीबोगरीब स्थिति है। जहां अंबरनाथ में बीजेपी , शिंदे और अजीत पवार अलग अलग लड़े, यहां वो साथ लड़ते दिखे, और मजे की बाज है कि AIMIM भी आ गई। कुल 33 सीटों में से 11 बीजेपी के पास गई और अपने साथियों के सहयोग से बीजेपी ने अपनी नेता माया धुले को नगराघ्यक्ष बनवा दिया। यह बात अलग है कि कांग्रेस और AIMIM के साथ बीजेपी का गठबंधन जल्द ही टूट गया खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणडवीस ने इसके खिलाफ चेतावनी दे डाली, और कांग्रेस ने भी बीजेपी का साथ देने वाले नेताओं को निलंबित कर दिया, पर जो खेला होना था वो हो गया और BJP की जीत हो ही गई।
Maharashrta चुनाव कहीं दोस्त दुश्मन बने और सता के लिए कहीं विरोधियों का थामा हाथ

अब माना यही जा रहा है कि जब 15 जनवरी को महाराष्ट्र में 29 महानगर पालिलाकाओं के चुनाव होने वाले हैं और कुछ अजीब स्थिति ही बनी हुई है हाल यह है कि जहां मित्र दल एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं वहीं कट्टर विरोधी एक दूसरे से दोस्ती निभा रहे हैं। अब उदाहरण के तौर पर जहां मुंबई में बीजेपी शिंदे और अजीत पवार के साथ चुनाव लड़ रही है , वहीं नवी मुबंई में शिंदे सेना और बीजेपी अलग अलग लड़ रहे हैं। नागपुर में बीजेपी अकेली है तो अजीत पवार और शिंदे साथ खड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ नजर डालें तो ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्वव और राज ठाकरे की पार्टी नवी मुंबई, नासिक, ठाणे जैसी प्रमुख महापालिकाओं में साथ लड़ रही है पर कोल्हापुर में राज ठाकरे उद्वव के साथ नहीं हैं यहां पर उन्होंने कांग्रेस और शरद पवार से दोस्ती कर ली। तो अगर कहा जा रहा है कि महाराषट्र की राजनीती में अजब गजब हो रहा है और सभी दलों में एक नारा बुलंद लगता है कि हमारी दोस्ती तो बस सत्ता पाने भर के लिए है आगे का कुछ पता नहीं , पर महाराष्ट्र महानगर पालिकाओं के चुनाव में जो जबरदस्त रायता फैला हुआ है इसके चलते यहां की आम जनता बहुत ही Confuse दिख रही है क्योंकि उसे पता ही नहीं चल पा रहा कि कौन सा दल किसके साथ है।
बेमेल राजनीतीक गठबंधन शुरूआत बहुत पहले हो चुकी-इंदिरा गांधी के खिलाफ

वैसे आपको बता दें कि सबसे पहले बेमेल राजनीतीक गठबंधन बनाने का सिलसिला साल 1967 में शुरू हुआ था, जब कांग्रेस के विरोध यानी इंदिरा गांधी के विरोध में जनसंघ- यानी आज की BJP है उसके साथ मारारजी देसाई का संगठन कांग्रेस, CPI, CPM और समाजवादी दल सब एकजुट हो गए थे, पर कहा यही जा सकता है कि उस समय एक पार्टी के खिलाफ लड़ने के लिए बेमेल गठबंधन हुआ पर महाराषट्र में जो बेमेल गठबंधन बन रहे हैं और टूट भी रहे हैं सभी का मकसद सिर्फ और सिर्फ सता हथियाना है।
