Bjp अध्यक्ष बना—अखिलेश को मिल गया जवाब

हाल ही में संसद में एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद में अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा था कि इतनी बड़ी पार्टी होने का दम भरते हैं पर अभी तक अपना अध्यक्ष नहीं चुन पाए, इसपर अमित शाह ने बड़े मजकिया अंदाज में खड़े होकर जवाब दिया कि आपको कांग्रेस या किसी और पार्टी को अपना अध्यक्ष अपने घर के किसी 5 लोगों में से ही चुनना पड़ता है जबकि हमें करोड़ों लोगों के बीच में जाकर अपने अध्यक्ष की तलाश करनी पड़ती है इसलिए देरी तो स्वाभाविक है, खैर ये तो हुई मजाक की बात अब मुद्दे पर आते हैं कि बीजेपी को अपना अध्यक्ष पद चुनाव करने में देरी तो हुई और जे पी नड्डा जी को ही स्वस्थय मंत्रालय के साथ यह पद भी संभालना पड़ा, पर अब बीजेपी को अपना नया अध्यक्ष मिल गया है और अब चर्चाएं यह नहीं कि अध्यक्ष बहुत देरी से चुना गया बल्कि ये है कि बिहार के नेता नितिन नवीन में ऐसा क्या रहा कि उन्हें बीजेपी के सबसे महत्वपूर्ण पद के लिए चुन लिया गया। यह एक सवाल है जिसका जवाब देने की स्थिति में कोई भी नहीं होगा और ये सवाल कभी बूझेगा भी नहीं , पर हां सबको ये जरूर मालूम है कि 1980 में जनसघ के बाद बनी बीजेपी में अभी तक 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं और शुरूआत हुई थी ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा का नारा देने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी से, उनके बाद बीजेपी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी ने संभाली। लाल कृष्ण आडवाणी तीन बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। और उनके नेतृत्व में 4 के आंकड़े पर बैठी बीजेपी 120 पर पहुंची, पर 2005 में जब आडवाणी ने पाकिस्तान में जिन्ना को ‘धर्मनिरपेक्ष’ कहा इसके तो पार्टी में इतना बवाल मचा कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया था। उसके बाद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 1991-1993 तक पार्टी की कमान संभाली उस समय तब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था और उन्होंने भाजपा को मुख्य विपक्षी पार्टी की लेस्ट में शामिल किया।
कुशा भाऊ ठाकरे का कार्यकाल पहली बार सहयोगी दलों के सहयोग से बनी एनडीए सरकार का था। वे आरएसएस से आए थे। उसके बाद पहले दलित अध्यक्ष बंगारु लक्ष्मण बने जो 2000-2001 केवल एक साल तक अध्यक्ष रहे क्योंकि एक स्टिंग ऑपरेशन में पैसा लेने के आरोप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद के. जाना कृष्णमूर्ति ने 2001-2002 तक पार्टी की कमान थोड़े समय के लिए संभाली। वेंकैया नायडू का अध्यक्ष पद का कार्याकाल 2002-2004 तक का था और उनके नेतृत्व में पार्टी ने उत्तर भारत में फिर से पकड़ मजबूत की थी। साल 2005 में राजनाथ सिंह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वह दो बार संगठन के अध्यक्ष बने। संगठन को मजबूत करने , विपक्ष के साथ समन्वय बनाने में राजनाथ सिंह की बड़ी भूमिका मानी जाती है
नितिन गडकरी 2010 से 2013 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। गडकरी सादगी को इतना पसंद करते थे कि साइकिल से मीटिंग जाते थे, साथ ही विपक्ष के हर नेता के साथ गडकरी की मित्रता हर कई जानता है, फिर साल 2014 में अमित शाह यानी बीजेपी में चाणक्य के नाम से मशहूर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। देखा यही गया कि उनके कार्यकाल में पार्टी को कई राज्यों में जीत मिली। अमित शाह के कार्यकाल के दौरान ही पीएम नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने।अमित शाह के बाद जगत प्रकाश नड्डा साल 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और माना जाता है कि अमित शाह से नजदीकियों के कारण उन्हें इस पद के लिए चुना गया। और अब नितिन नवीन का नाम इसमें शामिल हो गया है , देखना यही है कि वो अपने कार्यकाल में देशभर में लगातार बढती बीजेपी की चाल को और कितनी गति देते हैं।
अखिलेश तेरे राज में क्या हो रहा – क्यों बढ़ रही गुटबाजी

इस समय राजनीती बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रही है और पार्टी के अंदर ही गुटबाजी, कलह से लगभग हर दल जूझ रहा है यह बात अलग है कि किसी पार्टी में यह बहुत ज्यादा दिख रही है और कई पार्टी इसे अंदर ही अंदर दबाने में कामयाब हो रही है, पर पिछले कुछ समय से कांग्रेस rjd और समाजवादी पार्टी में टूटने बिखरने और कलह की खबरें लगातार सामने आ रही है, कारण साफ है लगातार मिलती हार के चलते कार्यकर्ता निराश परेशान है और उपर से पार्टी में बढ़ता भाई-भतीजावाद आग में घी डालने का काम करता है। अब समाजवादी पार्टी में जो विवाद हुआ वो भी चर्चा का विषय बना हुआ है, दरअसल sir के दूसरे चरण के लिए समाजवादी पार्टी ने पूर्व एमएलसी शशांक यादव को जिले का sir प्रभारी बनाया , रविवार को जब वह पहली बार सभी पदाधिकारियों व नेताओं के साथ बैठक करने पहुंचे तो उनके सामने ही भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र में बूथों की गिनती को लेकर विधायक शहजिल इस्लाम और पूर्व विधायक सुल्तान बेग के बीच तनातनी हो गई। हुआ यूं कि मीरगंज से विधायक रह चुके सुल्तान बेग के साथ भोजीपुरा विधायक शहजिल इस्लाम ने अपने क्षेत्र की जानकारी देते हुए कहा कि भोजीपुरा में पहले 418 बूथ थे, जो अब बढ़कर 463 हो गए हैं। इस पर सामने बैठे सुल्तान बेग ने कटाक्ष करते हुए उनसे याददाश्त को दुरुस्त करने को कहा और बताया कि भोजीपुरा में अभी भी 418 ही बूथ हैं। बस फिर क्या था कोई पूर्व विधायक वर्तमान विधायक की ऐसे बेज्जती कर दे तो हंगामा तो होगा ही , शहजिल इस्लाम भी भडक गए और तूतू मैं मैं शुरू हो गई और उन्होंने इस बात का विरोध किया, खैर किसी तरह से मामले को शांत कर दिया गया , कुछ दिन पहले भी पार्टी की गुटबाजी देखने मे आई जब डिंपल यादव के जन्मदिन पर कार्यालय परिसर में बैनर लगाए गए पर कार्यालय पहुंचे कुछ लोगों ने बैनर फाड़ दिए, जल्दबाजी में वहां दूसरे बैनर लगाए गए , इन सभी के चलते चर्चाएं चल निकली की समाजवादी पार्टी के बहुत से नेता अपनी निराशा कुछ ऐसे ही जाहिर कर रहे हैं।
