Bihar —तेजस्वी ने ठानी गाज गिरेगी कुछ Spokesperson पर

 

लगभग 2 महीने हो गए हैं और बिहार में आरजेडी जो महागठबंधन का बड़ा घटक है, उसने अपने चुनाव में जो हार हुई है उसका विश्लेषण करना शुरू किया है और एमपीज ,एमएलए और बाकी पार्टी के लोगों के साथ जो बैठक हुई है उसमें एक बात यह निकल कर के आई है कि जिस तरह से प्रवक्ताओं ने अग्रेसिव हो के और जिस तरह की भाषा का उपयोग किया है पूरे चुनाव के दौरान उसका बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है विशेष रूप से तब जब जनता जो वोटर्स है वो उसको लिंक कर पाई जो लालू प्रसाद यादव का जिसको जंगल राज बोला जाता है उससे कि अभी जब ये विपक्ष में है और इस तरह की भाषा और इस तरह के संवाद इस्तेमाल कर रहे हैं तो ये सरकार में आएंगे तो ये किस तरह की भाषा या संवाद का इस्तेमाल करेंगे और इसको लेकर के बहुत नाराजगी है और भी बहुत सारे विषय हैं कि जनता की बात नहीं सुनी गई टिकट जो कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी गई टिकट डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर के बहुत सारा अंतर पड़ा है। यहां तक कि संजय यादव जो पूरी स्ट्रेटजी बनाए थे उन पर भी प्रश्न किया गया है और जो प्राइवेट एजेंसी पूरा चुनाव प्रबंधन में लगी थी वो भी ग्राउंड की रियलिटी नहीं समझ पाई और इसके कारण जो है हार जो है वो इस स्तर पर पहुंच गई। नहीं तो शायद अगर आरजेडी हारती भी तो भी कुछ बेहतर करती हुई नजर आई। लेकिन जिस तरह से 25 सीट पर आरजेडी कनफाइंड हो गई है, अब तो यह भी कहा जा रहा है कि जो कुछ इस तरह के अब्यूसिव प्रवक्ता हैं उनमें से कुछ को छुट्टी मिल सकती है। कुछ को दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनको टीवी में अपीयरेंस या बाइट या इस तरह की चीजों से दूर रखा जा सकता है। इस तरह की बात सामने आ रही है।

UP —कल जिस संत को डंडों से पिटवाया आज उसकी के साथ खड़े अखिलेश

 

कुंभ में जिस तरह से अभिमुक्तेश्वरंद का मामला विवादों में आ गया है। किस तरह से उन्हें माघ मेले में स्नान नहीं करने दिया गया। उनकी जो पालकी थी उसको रोक दिया गया। इसको लेकर के बवाल हो रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि उनके शिष्यों की पुलिस ने पिटाई भी की। अब इसको लेकर के जो बात निकल कर के आ रही है वो यह कि प्रशासन का कहना यह है कि अभिमुक्तेश्वरानंद का जो जुलूस था वो उसने लगभग 3 घंटे तक सामान्य जो श्रद्धालु हैं उनका रास्ता जाम करके रखा गया था। इसलिए रख रखा था और बहुत सारे और
श्रद्धालु थे उनको दिक्कत हो रही थी इसलिए पालकी के रास्ते को वो किया गया था और इस पर प्रशासन का बयान आ चुका है, दूसरा मुक्तेश्वर आनंद , वो रिकॉग्नाइज शंकराचार्य भी नहीं है उनका मामला अदालत में है लेकिन वह भाजपा के खिलाफ बात करते हैं। इसलिए सब लोग उनको हाथों हाथ लेते हैं। विशेष रूप से पूरा का विपक्ष चाहे वो कांग्रेस हो, चाहे समाजवादी पार्टी हो, चाहे आरजेडी हो, चाहे जितने भी लोग हैं तो उनको हाथों हाथ लेने का एक वो है और उसी उसी के तहत आजकल सब जगह सोशल मीडिया से लेकर के टेलीविजन पर उनको डिफेंड किया जा रहा है। उनको समर्थन किया जा रहा है। और इसी क्रम में जो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं, उन्होंने अभिमुक्तेश्वर आनंद से बात भी की। लेकिन एक बात इसमें ध्यान रखने वाली है कि 2015 में इसी अखिलेश यादव की सरकार ने अभिमुक्तेश्वरंद
को डंडों से पिटवाया था। उनके कार्यकर्ताओं को पिटवाया था और आज वह उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं, उनको लग रहा है कि अभिमुक्तेश्वरानंद के माध्यम से वो भारतीय जनता पार्टी की सरकार को और योगी आदित्यनाथ को टारगेट कर सकते हैं।

Tamilnadu —बार बार राष्ट्रगान का अपमान

तमिलनाडु, में एक बार फिर राष्ट्रगान को लेकर के ,राष्ट्रगान के अपमान को लेकर के वहां के तमिलनाडु के राज्यपाल हैं आर एन रवि उन्होंने अपनी नाराजगी जताई है। नाराजगी जताने का उनका तरीका बहुत स्पष्ट है। जब उन्होंने अपनी जो कस्टमरी एड्रेस होता है जो राज्यपाल का अभिभाषण होता है , तमिलनाडु असेंबली में वो उन्होंने छोड़ दिया। अब उनका यह कहना था कि जब प्रदेश का मतलब स्टेट एंथम बजा तो उसके बाद नेशनल एंथम भी बचना बजना चाहिए जो फंडामेंटल कॉन्स्टिट्यूशनल ड्यूटी हर भारतीय नागरिक का होता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ जो जिसके विरोध में फिर उन्होंने बिना अभिभाषण के वॉकआउट कर दिया इसमें एक रिलीज आ गई है कि जिसमें कहा गया कि रवि जी का माइक बंद कर दिया गया। उनको बोलने नहीं दिया गया। तो यह इस सब के विरोध में उन्होंने वॉकआउ कर दिया और यह लगातार जो तमिलनाडु में इस तरह का होता रहता है और जो वहां के गवर्नर हैं उनके साथ एमके स्टालिन सरकार का जो ये विवाद है यह चलता रहता है। इसके पहले भी एक बार उन्होंने वॉकआउ किया था। इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता, इसलिए कि जिस तरह की
तमिलनाडु की सरकार है वो ना केवल नॉर्थ इंडियन उनका पूरा का पूरा एजेंडा ना केवल एंटी नॉर्थ इंडियन है बल्कि एंटी हिंदू भी है। तो इसलिए वो इस इस पूरे कवायद से उनको फर्क भी नहीं पड़ता है। वहां भाषण हो ना हो इन सब चीजों से उन पर कोई उनकी सेहत पर फर्क नहीं पड़ता है।

दोनों ही दल बढ़ाने में लग अपना कुनबा

कांग्रेस में भी जो बिहार कांग्रेस है उसमें नाराजगी है इस बात को लेकर के कि वो छह विधायक जीत के आए हैं। लेकिन पार्टी की तरफ से ना उनसे कोई संपर्क साधा गया ना उनको आगे की रणनीति ना आगे की योजना ना हार का जो कारण है उस पर विश्लेषण ये सब
कुछ नहीं हुआ है और उनको पार्टी के बड़े नेताओं का समय भी नहीं मिलता है। इसको लेकर के जो कांग्रेस है उसमें बहुत नाराजगी है। इन परिस्थिति में इस तरह की खबरें निकल कर के आने लगी है कि ये जो कांग्रेस के विधायक हैं ये जनता दल यू में शामिल हो
सकते हैं और इस तरह की खबरें भी हैं कि वो लगातार संपर्क में हैं। तो जनता दल यू के नेताओं के साथ और नीतीश कुमार के साथ। अब बीजेपी भी चाहती है कि उपेंद्र कुशवाहा के जो एमएलए हैं वो भाजपा जॉवइन कर ले। इसलिए कि अगर कांग्रेस के एमएलए जेडीयू में मिल जाते हैं तो जेडीयू सिंगल लार्जेस्ट पार्टी हो जाएगी। तो बीजेपी अपनी मंशा इस उसमें है कि अगर उपेंद्र कुशवाहा के जो तीन एमएलए हैं चौथा तो उनके परिवार के हैं, उनकी पत्नी है तो तीन ही ज्वाइन करेंगे। तो तीनों अगर ज्वाइन कर लेते हैं तो एक तो उसमें ये नहीं लगेगा एंटी डिफेक्शन नहीं लगेगा और फिर भारतीय जनता पार्टी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी रहेगी, आज नहीं तो कल ऐसा होता हुआ दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस के लोग जेडीयू के साथ जा सकते हैं और कुशवाहा के उपेंद्र कुशवाहा के की जो पार्टी है उसके एमएलए बीजेपी के साथ जा सकते हैं।

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