Chandigarh कांग्रेस ने तोड़ा साथ BJP की बल्ले बल्ले

 

कईं सीनियर नेताओं के मना करने के बाद भी दिल्ली के चुनाव में कांग्रेस ने आम आदमी का हाथ पकड़कर चुनाव लड़ा तो जबरदस्त हार का सामना कराना पड़ा, इसके बाद हरियाणा में आप के लाख चाहने पर भी कांग्रेस ने वो गलती नहीं दोहराई, तब से अब तक कांग्रेस और आप के रिश्तों में तल्लखियां लगातार बढ़ रही हैं , दोनों दलों की यही दूरियां बीजेपी के लिए वरदान साबित हो रही हैं ,जी हां पता चला है कि कल तक चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन करने की बात कर रहे थे पर अब खबरें आने लगी हैं कि दोनों के बीच गठजोड होने की संभावना कम है और अगर ऐसा होता है तो बीजेपी को अपना मेयर बनाने का मौका मिल सकता है। यह भी पता चला है कि आम आदमी पार्टी के सभी पार्षद पंजाब के गढ़शंकर में हैं, पर आप पार्षद रामचंद्र यादव वहां से गायब हैं और पार्टी नेताओं के संपर्क में भी नहीं हैं , चर्चाएं चल रही हैं कि वो बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं और अगर वो ऐसा करते हैं तो भाजपा के लिए चुनाव और भी आसान हो जाएगा। उसकी वोट संख्या बढ़कर 19 हो जाएगी।अब कांग्रेस में आप के साथ गठबंधन को लेकर पहले ही घमासान चल रहा है क्योंकि उसके कईं पार्षद और नेता नहीं चाहते कि आप का साथ दिया जाए। ऐसे में बीजेपी की बल्ले बल्ले हो सकती है।

Congress बनी सैंडविच 30 जिलाध्यक्षों ने क्या कह दिया

 

नेशनल पार्टी और सबसे बड़ी और पुरानी कही जाने वाली कांग्रेस पार्टी इस समय पूरी तरह बिखराव के दौर से गुजर रही है, पार्टी में नेतृत्व की कमी साफ दिखाई देती है आजकल कांग्रेस दोहरी चुनौती से गुजर रही है पर इससे निपटने के लिए कब , किसको, क्या फैसला लेना है कांग्रेस आलाकमान वहीं नहीं कर पा रही है। जी हां जैसे कि बंगाल में कांग्रेस के इंडि गठबंधन के दो साथी मौजूद हैं, tmc और left , अब बंगाल के नए प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार यहां अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, पर वहीं पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी लेफ्ट के साथ जाने को उतावले हैं , इन सब के बीच बंगाल के 33 जिलाध्यक्षों में से 30 जिलाध्यक्षों चाहते हैं कि कांग्रेस बंगाल में अकेले ही चुनाव लड़े तभी फायदा होगा। अब कांग्रेस आलाकमान को समझ में नहीं आ रहा किसी सुने किसको अनदेखा कर दे, यही नहीं बंगाल के साथ केरल में आने वाले चुनाव भी कांग्रेस के लिए सिरदर्दी बन चुके हैं , यहां के नेताओं ने साफ कह कह दिया कि यदि काग्रेस गठबंधन घर्म निभाती है और बंगाल में tmc और left के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो इसका सीधा खामियाजा केरल में भुगतना पड़ेगा , खासकर बंगाल में लेफ्ट के साथ दोस्ती से केरल में यही मैसेज जाएगा कि कांग्रेस और लेफ्ट की लड़ाई केरल में महज एक ‘दिखावा’ है, जबकि बंगाल में वे दोस्त हैं, साथ चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस के कईं नेता मान रहे हैं कि इससे केरल का वोटर भ्रमित हो सकता है और कांग्रेस को इस राज्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब लेफ्ट और tmc के बीच कांग्रेस सैंडविच बनी दिख रही है, दोस्ती भी बुरी और दुश्मनी भी नुकसान देगी।

 

बांग्‍लादेश की रीढ़ की हड्डी तोड़ देगा India का ये कदम

 

मोदी सरकार के कईं फैसले आने वाले साल में बांग्लादेश पर बहुत भारी पड़ने वाले हैं और जिस तरह से यह देश भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है, माना जा रहा है ये फैसले उसकी कमर तोड़ कर रख देंगें. जी हां पता चला है कि भारत ने साल 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात को दोगुना कर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एक सोचा समझा लक्ष्य रखा है। अब कम ही लोग ये जानते होंगे कि इस समय टेक्सटाइल निर्यात बांग्लादेश की अर्थव्‍यवस्‍था का ‘बैकबोन है ,उसकी जीडीपी और कुल एक्‍सपोर्ट में इसका 80% से ज्‍यादा कॉन्ट्रिब्‍यूशन है, भारत का ये टारगेट बांग्‍लादेश की अर्थव्यस्था पर सीधा असर डालेगा। आपको बता दें कि बांग्लादेश को मिलने वाली कामयाबी की एक बड़ी वजह उसे मिलने वाला अल्प विकसित देश (LDC) का दर्जा भी है जिसके कारण उसे यूरोपीय संघ और अमेरिका के बड़े बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री सामान पहुंचाने का मौका मिल रहा है पर अब जल्द ही वह एलडीसी दर्जे से बाहर होने वाला है और इसी कारण वो टेक्टसटाइल में भारत का मुकाबला नहीं कर पाएगा। पता चला है कि भारत ने अपनी इस योजना को पूरा करने के लिए उन देशों को निर्यात करेगा जिसके साथ उसके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA) वाले रिश्ते हैं। भारत इन देशों के साथ कालीन, हैंडलूम और रेशमी सामान का निर्यात करके बांगल्देश को करारा झटका देगा। साथ ही भारत की कोशिश है कि उन जिलों को भी एक्‍सपोर्ट के नक्शे पर लाया जाएगा जो अभी तक निर्यात नहीं कर रहे हैं।

 

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